Reliance Share Price: मार्केट कैप के हिसाब से देश की सबसे बड़ी कंपनी Reliance के शेयरों में आज खरीदारी का रुझान दिख रहा है। इसके शेयर इंट्रा-डे में बीएसई पर एक फीसदी से अधिक उछाल के साथ 2473.25 रुपये के भाव पर पहुंच गए। इसके शेयरों में तेजी की अहम वजह जेफरीज का रिलायंस को लेकर रुझान है। वैश्विक रिसर्च और ब्रोकिंग फर्म Jefferies ने इसे खरीदारी की रेटिंग दी है और इसमें निवेश के लिए टारगेट प्राइस 3500 रुपये (Reliance Target Price) फिक्स किया है। यह मौजूदा भाव से करीब 42 फीसदी अपसाइड है।
रिलायंस के ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन में शानदार रिकवरी हुई है। वहीं जियो का भी प्रदर्शन बेहतर है और इसके लिस्टिंग की संभावना को देखते हुए फिर से वैल्यूएशन करना पड़ा। इन सबके अलावा जेफरीज ने ग्रीन हाइड्रोजन की शानदार ग्रोथ के आसार को देखते हुए रिलायंस में निवेश की सलाह दी है।
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Green Hydrogen के दम पर Reliance में उछाल के आसार
जेफरीज के मुताबिक यूरोपीय संघ और भारत ने 2030 ग्रीन हाइड्रोजन का जो लक्ष्य रखा है, उससे रिलायंस के इलेक्ट्रोलाइजर मैन्यूफैक्चरिंग कारोबार का टोटल एड्रेसेबल मार्केट (TAM) 7400 करोड़ डॉलर का हो सकता है। रिलायंस अपनी रिफाइनरीज में ग्रे हाइड्रोजन को ग्रीन हाइड्रोजन से रिप्लेस करेगी। जेफरीडज के मुताबिक इससे रिलायंस का इलेक्ट्रोलाइजर मैन्यूफैक्चरिंग कारोबार यूरोपीय बेंचमार्क से 20 फीसदी डिस्काउंट पर बैठ रहा है। अगर सरकार से सब्सिडी मिलती है तो रिलायंस के ग्रीन हाइड्रोजन इकाई की वैल्यू और बढ़ेगी।
सरकार ने वर्ष 2030 तक 50 लाख टन की क्षमता और 125 गीगावॉट की एसोसिएटेड रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता डेवलप करने की मंजूरी दी है। पहले चरण में हाइ्ड्रोजन के मौजूदा यूजर्स और इलेक्ट्रोलाइजर कैपेसिटी क्रिएशन पर फोकस किया जाएगा। वहीं दूसरे चरण में नई कंपनियों को शामिल किया जाएगा।
Green Hydrogen और Grey Hydrogen क्या हैं
हाइड्रोजन रंगहीन गैस है लेकिन यह किस प्रोसेस के तहत निकली है, उसके आधार पर ही इसके साथ रंग जोड़े गए हैं। ग्रे हाइड्रोजन का मतलब है कि हाइड्रोजन फॉसिल्स ऑयल्स और इलेक्ट्रिसिटी से प्रोड्यूस हुई है। यह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है। वहीं ग्रीन हाइड्रोजन का मतलब है कि हाइड्रोजन को पानी को ऑक्सीजन के साथ इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए बनाया गया है और इसमें रिन्यूएबल एनर्जी स्रोत से इलेक्ट्रिसिटी का इस्तेमाल किया गया है। यह पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाती है। वहीं दो और हाइड्रोजन हैं-टॉरक्वाइज हाइड्रोजन और ब्लू हाइड्रोजन। हाइड्रोजन का इस्तेमाल मुख्य रूप से रिफाइनरियों में होता है।
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