Retail Investors Sell-off: पांच महीने बाद खुदरा निवेशकों ने जमकर बेचे शेयर, इन दो वजहों से हुई ताबड़तोड़ मुनाफावसूली

Retail Investors Sell-off: घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) पिछले कुछ दिनों से लगातार नई ऊंचाई पर पहुंच रहे थे। आज की बात करें तो इनमें बिकवाली का दबाव है। हालांकि पूरे सितंबर महीने में अब तक की बात करें तो खुदरा निवेशकों ने जमकर शेयरों की बिकवाली की। जानिए इसकी वजह क्या है?

अपडेटेड Sep 30, 2024 पर 1:21 PM
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सितंबर महीने में खुदरा निवेशकों ने खरीदारी से अधिक बिकवाली की और एनालिस्ट्स के मुताबिक इसकी वजह मुनाफावसूली तो रही ही। इसके अलावा आईपीओ भी है। (File Photo- Pexels)

Retail Investors Sell-off: खुदरा निवेशक लगातार पांच महीने से खरीदारी कर रहे थे और एकाएक उन्होंने सितंबर में मुनाफावसूली शुरू की। मुनाफावसूली इतनी तेज रही कि उन्होंने खरीदारी से अधिक बिकवाली की और सितंबर महीने में अब तक 7500 करोड़ रुपये के शेयरों के नेट बिक्री कर दी। रिटेल इनवेस्टर्स ने ऐसे समय में बिकवाली की, जब विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने ताबड़तोड़ निवेश किए जिससे मार्केट नई-नई रिकॉर्ड हाई पर पहुंचता चला गया। सितंबर में खुदरा निवेशकों ने अब तक 7,500 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे, जो मार्च 2024 के बाद से सबसे बड़ी बिकवाली है। वहीं घरेलू निवेशकों ने करीब 17,421 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि विदेशी निवेशकों ने सितंबर में अब तक 55,855 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

IPO के चलते बढ़ी शेयरों की बिकवाली?

सितंबर महीने में खुदरा निवेशकों ने खरीदारी से अधिक बिकवाली की और एनालिस्ट्स के मुताबिक इसकी वजह मुनाफावसूली तो रही ही। इसके अलावा आईपीओ भी है। आईपीओ से फटाफट मुनाफा कमाने के लिए खुदरा निवेशकों ने सेकंडरी मार्केट यानी लिस्टेड शेयरों की बिक्री कर पैसे निकाले और अब जो शेयर लिस्ट होने जा रहे हैं, उनके आईपीओ में पैसे लगाए ताकि लिस्टिंग गेन कमाया जा सके।


एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्रमुख (रिटेल रिसर्च) दीपक जासानी के मुताबिक कई रिटेल इनवेस्टर्स आईपीओ मार्केट में तेजी का फायदा उठाने की कोशिश में ही सेकंडरी मार्केट में बिकवाली कर रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि निवेशक रियल एस्टेट, गोल्ड या बाकी विकल्पों में भी पैसे डाल सकते हैं। सितंबर में 13 कंपनियों के 11,890 करोड़ रुपये के आईपीओ खुले जिसमें से सिर्फ एक के शेयर डिस्काउंट पर लिस्ट हुए जबकि तीन में मामूली लिस्टिंग गेन मिला। बाकी 9 आईपीओज की लिस्टिंग पर 18-135 फीसदी तक का मुनाफा मिला। इस साल 63 कंपनियों के 65,345 करोड़ रुपये के आईपीओ आए हैं।

आईपीओ के अलावा खुदरा निवेशकों ने इसलिए बिकवाली की क्योंकि मार्केट रिकॉर्ड ऊंचाई पर है तो करेक्शन का डर है और निवेशक इसके चलते पैसे निकाल रहे हैं। हालांकि एनालिस्ट्स का कहना है कि फिलहाल करेक्शन की आशंका नहीं है लेकिन उनका यह भी कहना है कि अभी पैसे डालने पर अधिक रिटर्न की गुंजाइश नहीं है।

मार्केट की कैसी है स्थिति?

सितंबर में अब तक सेंसेक्स 3.9 फीसदी और निफ्टी 50 भी 3.7 फीसदी मजबूत हुआ है। वहीं ब्रोडर लेवल पर बात करें तो बीएसई मिडकैप अब तक 0.9 फीसदी और बीएसई स्मॉलकैप 1.91 फीसदी मजबूत हुआ है। इस साल में अब तक की बात करें तो सेंसेक्स 18.5 फीसदी और निफ्टी 20 फीसदी ऊपर चढ़ा है जबकि बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप, दोनों ही इंडेक्स 34 फीसदी से अधिक उछले हैं।

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