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Rice Stocks: चावल से जुड़े इन शेयरों में लगे पंख, 15% तक बढ़े भाव, सरकार एक्सपोर्ट लिमिट बढ़ाने पर कर रही विचार

Rice Stocks: भारत सरकार अक्टूबर में चावल की नई पैदावार आने से पहले राइस एक्सपोर्ट की सीमा में ढील देने पर विचार कर रही है। इस खबर के बाद आज 9 जुलाई को चावल से जुड़े शेयरों में भारी तेजी देखी गई। एलटी फूड्स (LT Foods), केआरबीएल (KRBL), जीआरएम ओवरसीज (GRM Overseas) और कोहिनूर फूड्स (Kohinoor Foods) जैसे राइस स्टॉक्स के भाव 9 से 15 प्रतिशत बढ़ गए

Moneycontrol Newsअपडेटेड Jul 09, 2024 पर 12:39 PM
Rice Stocks: चावल से जुड़े इन शेयरों में लगे पंख, 15% तक बढ़े भाव, सरकार एक्सपोर्ट लिमिट बढ़ाने पर कर रही विचार
Rice Stocks: केंद्र सरकार सितंबर में चावल की कुछ किस्मों के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों की समीक्षा कर सकती है

Rice Stocks: भारत सरकार अक्टूबर में चावल की नई पैदावार आने से पहले राइस एक्सपोर्ट की सीमा में ढील देने पर विचार कर रही है। इस खबर के बाद आज 9 जुलाई को चावल से जुड़े शेयरों में भारी तेजी देखी गई। एलटी फूड्स (LT Foods), केआरबीएल (KRBL), जीआरएम ओवरसीज (GRM Overseas) और कोहिनूर फूड्स (Kohinoor Foods) जैसे राइस स्टॉक्स के भाव 9 से 15 प्रतिशत बढ़ गए। वहीं इसके मुकाबले निफ्टी इंडेक्स महज 0.1 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था।

रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार सितंबर में चावल की कुछ किस्मों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों की समीक्षा कर सकती है। सितंबर में मौजूदा खरीफ सीजन समाप्त हो जाएगा और धान के उत्पादन के अंतिम आंकड़े भी तब तक उपलब्ध हो जाएंगे।

पॉलिसी में इस संभावित बदलाव से मिल मालिकों और एक्सपोर्ट्स को फायदा होने की उममीद है। साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) योजना का समर्थन मिल सकता है। फिलहाल बासमती चावल को केवल निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ऊपर के भाव पर ही निर्यात किया जा सकता है, उबले चावल के निर्यात पर 20 प्रतिशत शुल्क लगता है और गैर-बासमती और टूटे हुए चावल के निर्यात पर पूरी तरह से प्रतिबंध है।

ये उपाय घरेलू बाजार में चावल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और कीमतों को स्थिर करने के इरादे से लागू किए गए थे। सरकार अब गैर-बासमती और टूटे चावल के एक्सपोर्ट पर लगे प्रतिबंध को ढील देने पर विचार कर रही है। इसके तहत एक फिक्स एक्सपोर्ट फीस के साथ एक्सपोर्ट की इजाजत मिल सकती है, जो कि उबले हुए चावल के लिए मौजूदा नीति के समान है

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