SEBI चेयरमैन ने कहा-फ्यूचर्स से हमें दिक्कत नहीं, समस्या जीरो-डे ऑप्शंस को लेकर है

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि समस्या F&O के साथ नहीं है। फ्यूचर्स के साथ कभी कोई मसला नहीं था। मसला शॉर्ट-डेटेड ऑप्शंस के साथ है। शॉर्ट डेटेड ऑप्शंस का मतलब ऐसे ऑप्शंस से है, जिनकी एक्सपायरी की तारीख काफी करीब होती है

अपडेटेड Mar 03, 2026 पर 3:18 PM
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शॉर्ट-डेटेड ऑप्शंस जीरो-डे से लेकर एक्सपायरी कॉन्ट्रैक्ट्स के डेरिवेटिव्स होते हैं। वे उसी दिन या कुछ दिन बाद एक्सपायर होते हैं।

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि रेगुलेटर को डेरिवेटिव्स मार्केट के फ्यूचर्स सेगमेंट को लेकर कोई चिंता नहीं है, लेकिन शॉर्ट-डेटेड ऑप्शंस में स्पेकुलेटिव एक्टिविटी पर उसकी करीबी नजरें हैं। उन्होंने कहा कि हाल में रेगुलेटर ने जो कदम उठाए हैं, उनका मकसद कम समय वाले ऑप्शंस में स्पेकुलेटिव एक्टिविटी पर अंकुश लगाना है। हालांकि, रेगुलेटर प्राइस डिस्कवरी और लिक्विडिटी में फ्यूचर्स और डेरिवेटिव्स की महत्वपूर्ण भूमिका बनाए रखना चाहता है।

फ्यूचर्स के साथ कभी समस्या नहीं थी

डेरिवेटिव्स सेगमेंट से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इस मसले को व्यापक रूप से एफएंडओ से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू ने सेबी चेयरमैन ने कहा, "आपको इसे F&O नहीं कहना चाहिए, क्योंकि फ्यूचर्स के साथ हमें कभी कोई मसला नहीं था। मसला शॉर्ट-डेटेड ऑप्शंस के साथ है।" शॉर्ट डेटेड ऑप्शंस का मतलब ऐसे ऑप्शंस से है, जिनकी एक्सपायरी की तारीख काफी करीब होती है।


पहले के उपायों का असर देख रहा सेबी

उन्होंने कहा कि शॉर्ट-डेटेड ऑप्शंस में बहुत ज्यादा स्पेकुलेटिव एक्टिविटी पर अंकुश लगाने के लिए सेबी ने कई कदम उठाए हैं। इन्हें अक्तूबर 2024 और मई 2025 में पेश किया गया था। इन्हें चरणबद्ध तरीके से जुलाई, अक्तूबर और दिसंबर में लागू किया गया है। सेबी इन उपायों के असर को देख रहा है। उन्होंने कहा, "हम डेटा के जरिए देख रहे हैं कि इनका क्या असर पड़ा है।"

सेबी का मकसद समस्या का समाधान करना

पांडेय ने कहा, "अगर हमें लगता है कि हस्तक्षेप की अभी और जरूरत है तो हम मकसद को हासिल करने के लिए दूसरा रास्ता अपनाएंगे। इस बारे में हम फिर से विचार करेंगे।" उन्होंने कहा कि सेबी इस मसले पर ढुलमुल रुख नहीं अपनाना चाहता। रेगुलेटर पहले समस्या को समझना चाहता है फिर चरणबद्ध तरीके से उसका समाधान करना चाहता है।

शॉर्ट डेटेड-ऑप्शंस का मतलब क्या है

शॉर्ट-डेटेड ऑप्शंस जीरो-डे से लेकर एक्सपायरी कॉन्ट्रैक्ट्स के डेरिवेटिव्स होते हैं। वे उसी दिन या कुछ दिन बाद एक्सपायर होते हैं। ये सस्ते होते हैं और हाई लेवरेज ऑफर करते हैं। इससे ट्रेडर्स को शॉर्ट टर्म मार्केट मूवमेंट्स पर दांव लगाने का मौका मिल जाता है। हालांकि, इन इंस्ट्रूमेंट्स में काफी उतार-चढ़ाव होता है और इनकी वैल्यू बहुत जल्द खत्म हो जाती है। इस वजह से इन्हें रिटेल इनवेस्टर्स के लिए बहुत रिस्की माना जाता है।

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सेबी कई बार इस मसले पर चिंता जता चुका है

पिछले साल जुलाई में भी सेबी ने अल्ट्रा-शॉर्ट-टर्म डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग बढ़ने पर चिंता जताई थी। उसने कहा था कि ऐसे ट्रेड का खराब असर इंडिया के कैपिटल मार्केट की सेहत पर पड़ सकता है। कम इनकम वाले लोगों के डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग से दूर रखने की सलाह के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि रेगुलेटर को अलग-अलग वर्गों से कई तरह की सलाह मिलती है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति सलाह दे सकता है। लेकिन, उन्होंने किसी सलाह पर अभी कोई कदम उठाने के संकेत नहीं दिए।

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