Stock Market Crash: भारत समेत दुनिया भर के शेयर सोमवार (7 अप्रैल 2025) को एकदम से क्रैश हो गए। इसे दूसरा Black Monday भी कहा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ और इस पर चीन के पलटवार के चलते वैश्विक मंदी की आशंका बढ़ गई है। दुनिया भर के निवेशक आंख बंद करके बिकवाली कर रहे हैं।
सोमवार को सेंसेक्स 3,914.75 अंक यानी 5.19% गिरकर 71,449.94 पर खुला। वहीं, निफ्टी 50 में 1,146.05 अंकों या 5.00% की गिरावट आई। यह 21,758.40 पर खुला। यह शेयर बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी एकदिन की गिरावटों में से एक रही। आइए जानते हैं, भारतीय शेयर बाजार में एक दिन में आने वाली सबसे बड़ी गिरावटों के बारे में।
हर्षद मेहता स्कैम क्रैश (1992)
1992 में हर्षद मेहता का ₹4,000 करोड़ स्कैम सामने आया। उसके बाद सेंसेक्स बुरी तरह टूट गया। 28 अप्रैल 1992 को सेंसेक्स 570 अंक या 12.7% गिरा। इस स्कैम के बाद भारत में कई बड़े वित्तीय सुधार हुए। मार्केट रेगुलेटर SEBI को और भी सशक्त बनाया गया।
केतन पारेख स्कैम क्रैश (2001)
2001 में ब्रोकरेज स्कैम के साथ-साथ डॉट-कॉम बबल के फूटा। गुजरात भूकंप जैसी भारी त्रासदी भी आई। इसका शेयर बाजार पर काफी बुरा असर दिखा। 2 मार्च 2001 को सेंसेक्स 176 अंक या 4.13% गिर गया।
चुनावी झटके से क्रैश (2004)
2004 के आम चुनावों के नतीजों ने निवेशकों को चौंका दिया। तमाम एक्सपर्ट से लेकर एग्जिट पोल बीजेपी की अगुआई वाले एनडीए की जीत की उम्मीद लगा रहे थे। लेकिन, कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की अप्रत्याशित जीत हुई। इससे आर्थिक सुधारों की निरंतरता पर सवाल खड़े हो गए। नतीजा, 17 मई 2004 को सेंसेक्स 11.1% गिरा और भारी बिकवाली के कारण दिन में दो बार ट्रेडिंग रोकनी पड़ी।
ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस (2008)
अमेरिका में Lehman Brothers के दिवालिया होने के बाद दुनिया भर में मंदी की लहर दौड़ गई। 21 जनवरी 2008 को सेंसेक्स 1,408 अंक या 7.4% गिरा। इसके बाद के महीनों में सेंसेक्स अपने पीक से लगभग 60% तक टूट गया।
कोविड-19 महामारी क्रैश (2020)
23 मार्च 2020 को कोरोना महामारी के बाद देश भर में लॉकडाउन का ऐलान हुआ। इसके बाद सेंसेक्स 3,935 अंक या 13.2% गिर गया। इस दिन को भारतीय शेयर बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट माना जाता है। हालांकि, सरकार ने फौरी आर्थिक मदद दी, जिससे बाजार जल्द ही रिकवर कर गया।
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