विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) के ग्लोबल हेड, क्रिस वुड (Chris Wood) का कहना है सेंसेक्स अगले कुछ सालों में 1,00,000 अंक तक पहुंच सकता है। वुड ने अपने एक साप्तहिक लेटर में कहा, "मुझे अगले 5 साल में इस लक्ष्य के हासिल होने की उम्मीद है। इसके लिए हम यह मानकर चल रहे हैं कि EPS में 15 फीसकी बढ़ोतरी का ट्रेंड और एक साल के फॉरवर्ड पर पांच साल का औसत PE मल्टीपल 19.8 गुना पर बना हुआ है।" अगर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अपनी मौद्रिक नीति को कड़ा करना बंद कर देता है तो क्रिस वुड को भारतीय कंपनियों के शेयरों के वैल्यूएशन में और गिरावट के लिए 'निकट भविष्य' में कोई सप्षट कारण नहीं दिखता है।
उन्होंने कहा, "अगर ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र खत्म हो गया है और इस साल के अंत या अगले साल की शुरुआत से इसमें कटौती होती है, तो निकट भविष्य में ऐसी कोई वजह नहीं बनती है जिससे वैल्यूएशन को और घटाया जाए।"
वुड का मानना है कि भारतीय स्टॉक पिछले साल की तरह इस साल भी बाकी मार्केट्स की तुलना में 'महंगे' नहीं हैं। इसके साथ क्रिस वुड ने अपने 'एशिया-पैसेफिक माइनस जापान पोर्टफोलियो' में भारतीय, कोरियाई और ताइवान के शेयरों में अपनी ओवरवेट स्थिति को 1% तक बढ़ा दिया है।
क्रिस वुड ने अपने पोर्टफोलियो से HDFC लाइफ इंश्योरेंस और स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक को निकाल दिया है और इसकी जगह उन्होंने जोमैटो और SBI लाइफ इंश्योरेंस को शामिल किया है। वहीं AIA ग्रुप, बैंक सेंट्रल एशिया, बजाज फाइनेंस, गोदरेज प्रॉपर्टीज और मैक्रोटेक डेवलपर्स में अपना निवेश बढ़ाया है।
वुड ने कहा, "लंबी अवधि के सभी बुल मार्केट की तरह, भारतीय शेयर बाजार भी चिंता की कुछ दीवारें बनी रहेंगी।" उन्होंने कहा कि वह शेयर बाजार में उथल-पुथल के लिए आम चुनावों में मोदी की हार को सबसे बड़ा जोखिम मानते हैं।
इंडियन मार्केट में फॉरेन इनवेस्टर्स की वापसी
Chris Wood ने अपने नोट 'Greed & Fear' में लिखा है कि विदेश निवेशक चीन से पीछे हटने के बाद बतौर नेट बायर्स इंडियन मार्केट में लौट आए हैं। मार्च से अब तक उन्होंने 7 अरब डॉलर के शेयर खरीदे हैं। उन्होंने लिखा है कि एक मसला यह है कि MSCI बेंचमार्क्स में इंडिया की हिस्सेदारी उसकी इकोनॉमी की साइज को देखते हुए काफी कम रही है। उन्होंने नोट में लिखा है कि हाल के सालों में जापान को छोड़ कर एशिया में लॉन्ग-ओनली पोर्टफोलियो में ग्रीड एंड फीयर का एक्सपोजर औसतन 40 फीसदी रहा है।