निवेशकों को सेक्टर की थीम के आधार पर स्मॉलकैप स्टॉक्स के सेलेक्शन में सावधानी बरतने की जरूरत है। इसकी बजाय उन्हें इस स्पेस में उपलब्ध व्यापक मौकों का फायदा उठाना चाहिए। दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा (Shankar Sharma) ने यह सलाह दी है। शर्मा ने नए सम्वत 2080 से पहले मनीकंट्रोल से बातचीत की। उन्होंने कहा कि वह इनवेस्टर्स को सेक्टर के हिसाब से निवेश नहीं करने की सलाह देंगे। इसकी वजह यह है कि स्मॉलकैप कंपनियों के लिहाज से हर सेक्टर बहुत विकसित नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं इस एप्रोच में भरोसा नहीं करता। मैं तो इस बारे में सावधानी बरतने की सलाह दूंगा। इसकी वजह यह है कि स्मॉलकैप के लिहाज से अभी सेक्टर का पूरी तरह से विकसित होना बाकी है। अभी ये लार्जकैप सेक्टर्स की तरह नहीं है, जिसमें शेयरों की पहचान करना आसान है।
स्मॉलकैप में कई तरह की कंपनियों में निवेश का विकल्प
शर्मा ने कहा कि अगर आप चल रहे सीजन जैसे रेलवे या डिफेंस पर दांव लगाना चाहते हैं तो आपको सावधानी बरतनी पड़ेगी। आप एक या दो शेयरों में निवेश कर सकते हैं। लेकिन, आपके लिए अपने पोर्टफोलियो में सेक्टर आधारित ज्यादातर स्मॉलकैप स्टॉक्स रखना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा, "स्मॉलकैप स्टॉक्स की ब्यूटी यह है कि यह आपको बड़ी रेंज में कंपनियों के स्टॉक्स खरीदने का मौका देता है।" बीते एक साल में Nifty Smallcap 100 इंडेक्स ने 34.63 फीसदी रिटर्न दिया है, जबकि Nifty Smallcap 100 इंडेक्स ने 25.3 फीसदी रिटर्न दिया है। इस दौरान Nifty 50 का रिटर्न सिर्फ 6.6 फीसदी रहा है।
सेक्टर पर फोकस करना होशियारी नहीं
स्टॉक मार्केट्स का कई दशकों का अनुभव रखने वाले शर्मा ने कहा कि कई बार ऐसा होता है कि किसी खास स्मॉलकैप कंपनी को एक सेक्टर में रखना आसान नहीं रह जाता। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा, "मैंने हाल में एक स्टॉक खरीदा, जो एक मार्केटिंग टेक्नोलॉजी कंपनी का है। हम इसे मार्क-टेक कहते हैं। कंपनी गारमेंट्स बेचती है, कंपनी एक बड़े ऑनलाइन रिटेलर के लिए टेक मार्केटिंग भी मैनेज करती है। यह निवेश के लिए एक मजेदार स्पेस है। क्या मुझे इसे गारमेंट्स में रखना चाहिए या टेक में। मुझे इस सवाल का जवाब नहीं पता। इसलिए मैं इसमें फंसना नहीं चाहता।"
शेयरों के सेलेक्शन लिए यह चेकलिस्ट फायदेमंद
शंकर शर्मा निवेश के लिए स्मॉलकैप कंपनियों की पहचान करने के वास्ते एक चेकलिस्ट का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं बोर्ड की क्वालिटी को देखता हूं--ऐसा करने की वजह है। टैक्स पेमेंट का मसला भी अहम है। कंपनी अगर टैक्स चुका रही है तो यह अच्छी बात है। अगर कंपनी डिविडेंड देती है तो यह और भी बेहतर है। हालांकि, यह ऐसा नहीं है कि 100 फीसदी फुलप्रूफ है। लेकिन, टैक्स पेमेंट्स और डिविडेंड पेमेंट्स से इतना पक्का हो जाता है कि कंपनी कैश जेनरेट कर रही है न कि सिर्फ प्रॉफिट पर फोकस कर रही है। ये चीजें किसी कंपनी में किसी रिटेल इनवेस्टर के लिए थोड़ी हिस्सेदारी खरीदने के लिहाज से अहम हैं।'
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