Share Market Down: शेयर बाजार में इन 7 कारणों से लौटी गिरावट, सेंसेक्स दिन के हाई से 600 अंक टूटा
Share Market Down: भारतीय शेयर बाजारों में आज 17 मार्च को दिखी शुरुआती तेजी ज्यादा देर टिक नहीं पाई और दोपहर तक बाजार लाल निशान में आ गया। सेंसेक्स दिन के हाई से 600 अंक फिसल गया। वहीं निफ्टी गिकर 23,400 के नीचे चला गया। ग्लोबल अनिश्चितताओं औप मुनाफावसूली और सेंसेक्स और निफ्टी अपने दिन के उच्च स्तर से काफी नीचे आ गए
Share Market Down: ब्रेंट क्रूड की कीमतें करीब 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं
Share Market Down: भारतीय शेयर बाजारों में आज 17 मार्च को दिखी शुरुआती तेजी ज्यादा देर टिक नहीं पाई और दोपहर तक बाजार लाल निशान में आ गया। सेंसेक्स दिन के हाई से 600 अंक फिसल गया। वहीं निफ्टी गिकर 23,400 के नीचे चला गया। ग्लोबल अनिश्चितताओं औप मुनाफावसूली और सेंसेक्स और निफ्टी अपने दिन के उच्च स्तर से काफी नीचे आ गए।
कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स एक समय 511.46 अंक चढ़कर 76,014.31 तक पहुंच गया था। निफ्टी ने 23,500 का स्तर पार करके हुए 23,577.55 तक पहुंच गया। हालांकि दोपहर तक बाजार की दिशा बदल गई।
सुबह 11:30 बजे के करीब, सेंसेक्स 104.93 अंक गिरकर 75,397.92 पर कारोबार कर रहा थ। वहीं निफ्टी 16.90 अंक फिसलकर 23,391.90 पर कारोबार करता दिखा। हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में हल्की मजबूती बनी रही और ये इंडेक्स करीब 0.2 प्रतिशत तक बढ़त में रहे।
शेयर बाजार में आज की इस गिरावट के पीछे 7 बड़े कारण रहे-
1. मुनाफावसूली
सोमवार की जोरदार तेजी के बाद आज निवेशकों ने ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू कर दी। खासतौर पर आईटी, FMCG और फाइनेंशियल शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा और इंडेक्स करीब 2% तक गिर गया।
जियोजित इनवेस्टमेंट के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, वीके विजयकुमार ने बताया कि बाजार के हालिया उतार-चढ़ाव की बड़ी वजह जियोपॉलिटिकल तनाव है। उन्होंने कहा कि युद्ध की स्थिति को लेकर काफी अनिश्चितता और कन्फ्यूजन बना हुआ है, जिसका असर बाजार में भी दिख रहा है। यहां तक कि बड़े एक्सपर्ट भी अभी साफ तौर पर निवेश की सही रणनीति बताने में हिचकिचा रहे हैं। फिलहाल उनकी सलाह है कि निवेशक बाजार में बने रहें और SIP जारी रखें।
2) FIIs की लगातार बिकवाली
विदेशी निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। सोमवार को FIIs ने करीब 9,365.52 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशक 66,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली कर चुके हैं। यह जनवरी 2025 के बाद सबसे बड़ी मासिक निकासी हो सकती है।
3. रुपये की कमजोरी
मंगलवार को रुपया 14 पैसे गिरकर 92.42 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इसकी बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, शेयर बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी डॉलर में मजबूती भी रुपये पर दबाव बना रहे हैं।
4. वीकली एक्सपायरी का असर
मंगलवार को निफ्टी के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी होती है। इस दिन ट्रेडर्स अपनी पोजिशन को एडजस्ट या स्क्वायर ऑफ करते हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव (वोलैटिलिटी) बढ़ जाता है।
5. जियोपॉलिटिकल तनाव
ईरान बनाम अमेरिका-इजराइल के बीच जारी जंग अब तीसरे हफ्ते में पहुंच गई है और फिलहाल इसके शांत होने के संकेत नहीं हैं। मंगलवार को पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में फिर से हमलों की खबरें आईं। ऐसे हालात आमतौर पर ग्लोबल बाजारों में डर का माहौल बनाते हैं, जिससे निवेशक सतर्क हो जाते हैं और शेयर बाजार पर दबाव पड़ता है।
6. कच्चे तेल की कीमतें बढ़ना
क्रूड की सप्लाई को लेकर अभी भी चिंता बनी हुई है, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतें करीब 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। होमुर्ज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई काफी हद तक बंद है। पूरी दुनिया की करीब 20 प्रतिशत क्रूड सप्लाई इसी रास्ते से होती है। तेल की कीमतें बढ़ना भारत के लिए नेगेटिव माना जाता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है।
7. फेड पॉलिसी को लेकर चिंता
अमेरिका के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व की दो-दिवसीय बैठक आज 17 मार्च से शुरू हो गई है। बाजार को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व अपनी ब्याज दरों को 3.50%–3.75% के बीच बनाए रख सकता हे। लेकिन निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी होंगी कि फेडरल रिजर्व आगे दरों में कटौती को लेकर क्या संकेत देता है। इसी अनिश्चितता की वजह से बाजार में सतर्कता और दबाव बना हुआ है।
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