Short Call: एमसीएक्स, 63 मून्स, एएमसी स्टॉक और बाजार पर सीएलएसए का विरोधाभासी नजरिया और बैंक निफ्टी के भ्रमित करने वाले डेटा
आज के दिन एएमसी शेयर फोकस में रह सकते हैं। सेबी ने कहा है कि पुराने मसौदा Total Expense Ratio प्रस्ताव में एक अहम बदलाव किया जायेगा। नियामक ने यह भी संकेत दिया है कि म्यूचुअल फंड उद्योग TER नियमों के नए मसौदे को देखकर प्रसन्न होगा। पिछले कई महीनों में एसेट मैनेजमेंट कंपनी के शेयरों के खराब प्रदर्शन का मुख्य कारण TER में बदलाव होने की चिंता रहा
ब्लॉक डील्स का सीजन लगातार जारी है। सूत्रों के हवाले से CNBC-TV18 की रिपोर्ट के अनुसार क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण और टीडी पावर के प्रोमोटर अपनी हिस्सेदारी का एक भाग बेचेंगे। स्ट्रीट इस बात पर विभाजित है कि क्या प्रोमोटरों और बड़े संस्थागत निवेशकों द्वारा हिस्सा बिक्री की हड़बड़ाहट बाजार के शिखर पर पहुंचने का संकेत दे रही है। दूसरा ये कि क्या यह नये निवेशकों की ओर से इंडिया स्टोरी पर इसे भरोसे के रूप में लेना चाहिए। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि उच्च ब्याज दरों के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती एक नई सामान्य स्थिति का संकेत दे रही है। मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के एक उपकरण के रूप में दर वृद्धि अपनी शक्ति खो रही है। दूसरों का तर्क है कि यह आने वाले तूफान से पहले की शांति है। जब ब्याज दरें अंततः कमजोर उपभोक्ता खर्च और धीमी कॉर्पोरेट अर्निंग ग्रोथ के चलते बढ़ेंगी।
आज इस शेयर से बाहर निकलने के लिए भगदड़ मच जाएगी क्योंकि 63 Moons के साथ टेक्नोलॉजी कॉन्ट्रैक्ट के विस्तार से शेयर बाजार में बड़ा झटका लगेगा।
इस वर्ष की कमाई पर नजर डालें तो दो-तिमाही अनुबंध पर MCX की लागत 250 करोड़ रुपये आयेगी। ये रकम वित्त वर्ष 2023 के 149 करोड़ रुपये के शुद्ध मुनाफे से लगभग 70 प्रतिशत अधिक है। स्टॉक पर कई संस्थानों की बड़ी हिस्सेदारी है। इसके अलावा कई HNIs ने पिछले महीने इस उम्मीद में बड़ी खरीदारी की थी कि नए ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर बदलाव से कंपनी को लागत बचाने में मदद मिलेगी।
उस कहानी को सामने आने में अभी थोड़ा समय लग सकता है। एमसीएक्स के लिए मामले को बदतर बनाने के लिए नया टेक्नोलॉजी वेंडर एमसीएक्स के साथ समझौते का पेनाल्टी क्लॉज अतिरिक्त खर्चों को कवर नहीं करेगा जिसका एमसीएक्स को 63 मून्स को भुगतान करना होगा।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज के साथ अनुबंध के नवीनीकरण की खबर सार्वजनिक होने से पहले ही स्टॉक केवल चार कारोबारी सत्रों में 28 प्रतिशत बढ़कर 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर 217 रुपये पर बंद हुआ। क्या कुछ समझदार व्यापारियों को बाजार से पहले सौदे की भनक लग गई थी?
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एएमसी शेयर आज के दिन फोकस में रह सकते हैं। सेबी ने कहा है कि पुराने मसौदा टोटल एक्सपेंस रेशियो (Total Expense Ratio) प्रस्ताव में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया जायेगा। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि नियामक ने यह भी संकेत दिया है कि म्यूचुअल फंड उद्योग TER नियमों के नए मसौदे को देखकर प्रसन्न होगा। TER में बदलाव के कारण कमाई प्रभावित होने की चिंता पिछले कई महीनों में एसेट मैनेजमेंट कंपनी के शेयरों के खराब प्रदर्शन का मुख्य कारण थी। सवाल यह है कि क्या यह रीरेटिंग के लिए पर्याप्त ट्रिगर है या क्या बाजार अभी भी नए ड्राफ्ट TER प्रस्तावों की रूपरेखा देखना चाहेगा।
शेयर बाज़ार की रैली पर बहुत सारी आशावादी रिपोर्ट्स आ रही हैं। ऐसे में सीएलएसए के की रिपोर्ट जुदा है। ब्रोकर ने निम्नलिखित पांच कारणों से भारत पर अपना सतर्क नजरिया बरकरार रखा है:
रिलेटिव वैल्यूएशन, यद्यपि पूरी तरह चरम पर नहीं है, फिर भी बहुत आकर्षक नहीं है
मार्जिन में गिरावट से भारत की रिलेटिव प्रॉफिटैब्लिटी और कम हो सकती है
अनुमानित EPS ग्रोथ डेलिवर्ड की तुलना में बहुत आशावादी बनी हुई है
अन्य EM केंद्रीय बैंकों द्वारा RBI से पहले पॉलिसी में ढील दिए जाने की संभावना है
हमारा भारत रिग्रेशन मॉडल संकेत दे रहा है कि बाजार 14 प्रतिशत ओवरबॉट है
Confusing trend (भ्रामक रुझान)
आंकड़ों के स्पष्ट न होने की बात करें तो बैंकिंग सेक्टर इस समय इसका प्रमुख उदाहरण है। बैंक निफ्टी के लिए पुट-कॉल रेशियो (PCR) अब तक 1 से ऊपर है। ये एक संकेत है कि पुट राइटर बहुत सक्रिय हैं। इस प्रकार इंडेक्स ऊपर जा सकता है। PCR एक विरोधाभासी रणनीति है जिसमें माना जाता है कि ऑप्शन खरीदने वाले आमतौर पर पैसा गंवा देंगे। इस प्रकार यदि अधिक पुट खरीदे जा रहे हैं - जिसका अर्थ है कि PCR 1 से ऊपर है - तो इंडेक्स ऑप्शन खरीदारों के विश्वास के विपरीत चल सकता है। जब ट्रेडर्स निराशावादी नजरिया रखते हैं तो वे अधिक पुट खरीदते हैं।
दूसरी ओर, प्रमुख बैंकिंग स्टॉक - SBI, HDFC Bank और ICICI Bank जिनका बैंक निफ्टी में सबसे अधिक वेटेज है। इन सभी का PCR 1 से काफी नीचे है। इसका अर्थ है कि उनमें अधिक कॉल राइटिंग हुई हैं - जो सप्लाई प्रेस्सर को दर्शाता है।
इसलिए जब डेटा से पता चलता है कि प्रमुख घटक सप्लाई प्रेस्सर देख रहे हैं और इंडेक्स डिमांड में हैं, तो ट्रेडर्स को यह समझ में नहीं आ रहा है कि बैंकों पर क्या पोजीशन रखी जाये।
(डिस्क्लेमरः Moneycontrol.com पर दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह निवेश विशेषज्ञों के अपने निजी विचार और राय होते हैं। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।)