क्या यह सस्ते भाव पर शेयर खरीदने का मौका है? जबकभी बाजार में बड़ी गिरावट आती है, यह सवाल निवेशकों के मन में होता है। 5 अगस्त को आई गिरावट को बुल्स खरीदारी के मौके के रूप में देख रहे हैं। उधर, कुछ बेयर्स का मानना है कि यह बाजार में आने वाली गिरावट का पहला संकेत है। बुल्स और बेयर्स में से कौन सही है, इसका पता कुछ महीनों बाद ही चलेगा। इसकी वजह यह है कि बाजार कभी एक दिशा में नहीं चलता है। बाजार में गिरावट के दौर (bear Market) में बीच-बीच में तेजी दिखती है। उसके बाद बाद कीमतें अपने निचले स्तर से ऊपर जाने लगती हैं। इस दौरान सूचकांक अपने पिछले रिकॉर्ड हाई के करीब पहुंच जाते हैं, जिससे ऐसा लगता है कि बाजार में तेजी का दौर शुरू हो गया है। जिन लोगों ने 2000-01 और 2008-09 के बेयर मार्केट को देखा है, वे यह जानते हैं।
SIP के रास्ते आ रहा बड़ा निवेश
कोविड की महामारी शुरू होने के बाद शेयरों में निवेश शुरू करने वाले निवेशक यह दलील देंगे कि यह समय अलग है, क्योंकि मार्केट की तेजी में घरेलू निवेश (Domestic Investment) का बड़ा हाथ है। लंबी अवधि का यह निवेश निवेश SIP और EPFO के जरिए आ रहा है। इसका मतलब है कि पहले की तरह पैनिक सेलिंग (घबराहट में बिकवाली) की जरूरत नहीं है। लेकिन, सवाल यह है कि क्या घरेलू निवेश इसी रफ्तार से जारी रहेगा और क्या वैल्यूएशन का कोई मायने नहीं रह जाएगा?
स्ट्रेटेजिस्ट प्रतीक पारेख और प्रियांक शान इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं कि वैल्यूएशन बहुत ज्यादा नहीं है। दोनों ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि वैल्यूएशन काफी ज्यादा है। इस वैल्यूएशन के साथ अगले पांच साल में ज्यादा रिटर्न की उम्मीद नहीं की जा सकती। मार्केट कैपिटलाइजेशन और GDP का अनुपात 150 फीसदी तक पहुंच गया है। 2007-08 के बुल रन के दौरान यह अनुपात देखने को मिला था। दोनों का यह भी कहना है कि कॉर्पोरेट कैश फ्लो बेहतर है, लेकिन यह समय 2007 से बहुत ज्यादा अलग नहीं है। उन्होंने यह भी कहा है कि फंडामेंटल्स खराब हो रहे हैं।
क्या इस वैल्यूएशन पर जोरदार कमाई हो सकती है?
स्ट्रॉन्ग घरेलू निवेश के बारे में दोनों का कहना है कि घरेलू निवेश मजबूत बना हुआ है। लेकिन, यह बात ध्यान में रखने वाली है कि परिवारों का शेयरों में निवेश ऑल-टाइम हाई पर है, जबकि इनकम के मामले में तस्वीर बिगड़ती दिख रही है। तो क्या इसका मतलब है कि आगे मार्केट में बड़ी गिरावट आ सकती है? इस बारे में पक्के तौर पर कुछ भी कहना मुश्किल है। लेकिन, ज्यादातर फंड मैनेजर्स कम से कम एक बात को लेकर सहमत है कि मौजूदा वैल्यूएशन पर अगले तीन साल में ज्यादा कमाई की संभावना नहीं दिखती। जिन निवेशकों ने सालाना 20-30 फीसदी कंपाउंडेड एनुअल रिटर्न कमाया है, उन्हें आगे निराशा हो सकती है।
हिंदुस्तान जिंक के शेयर 5 अगस्त को 5.2 फीसदी गिरकर 618 रुपये पर बंद हुए। कंपनी के पहली तिमाही के नतीजे अच्छे आए हैं। कंपनी का माइंड मेटल (mined metal) का प्रोडक्शन 263केटी रहा, जबकि रिफाइंड मेटल प्रोडक्शन 262केटी रहा। बामनिया कलां खान में उत्पादन शुरू हो जाने से मेटल कंसंट्रेट कैपेसिटी 2mpta तक पहुंच जाएगी। Hindustan Zinc के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में इम्प्रूवमेंट का अच्छा असर मार्जिन पर पड़ सकता है। उधर, बेयर्स का कहना है कि चीन में राहत पैकेज के अभाव और ग्लोबल डिमांड कमजोर होने से स्पॉट जिंक और लीड एलएमई की कीमतों में नरमी आई है। एंटिक ने कहा है कि FY27 की पहली छमाही में EV/EBITDA 14.5 गुना दिखता है, जो महंगा है।
टाइटन के शेयर 5 अगस्त को 2.35 फीसदी की गिरावट के साथ 3,380 रुपये पर बंद हुए। Titan के मैनेजमेंट ने डिमांड बढ़ने की उम्मीद जताई है। कंपनी अपने स्टोर्स की संख्या बढ़ा रही है। गोल्ड की कीमतों मे उछाल के बावजूद कंपनी का ग्रॉस मार्जिन बढ़ा है। बजट में इंपोर्ट ड्यूटी में कमी से गोल्ड की मांग बढ़ने की उम्मीद है। उधर, बेयर्स की दलील है कि अनऑर्गनाइज्ड प्लेयर्स से प्रतियोगिता की वजह से कंपनी की बाजार हिस्सेदारी में कमी आ सकती है। इंपोर्ट ड्यूटी घटने की वजह से कंपनी को 500 करोड़ रुपये का इनवेंट्री लॉस हो सकता है।
यह भी पढ़ें: Japan Nikkei: जापान के शेयरों ने की जबरदस्त वापसी! रिकॉर्ड गिरावट के बाद 10% उछला निक्केई इंडेक्स, जानें वजह
यूपीएल का शेयर 5 अगस्त को 1.7 फीसदी गिरकर 528.30 रुपये पर बंद हुए थे। कंपनी ने पहली तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया है। बुल्स का कहना है कि बीते दो साल में प्राइसिंग प्रेशर के बाद UPL को अब कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है। FY25 की दूसरी छमाही में रिकवरी आ सकती है। उधर, बेयर्स की दलील है कि कंपनी का कर्ज ज्यादा है। अर्निंग्स पर अब भी दबाव दिख रहा है। कोटक का मानना है कि यूपीएल के शेयरों में बड़ी गिरावट आ सकती है।