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Short Call: रिटेल इनवेस्टर्स का सपोर्ट क्या मार्केट को हमेशा मिलता रहेगा? जानिए Glenmark Pharma और Zomato क्यों सुर्खियों में हैं

पहली तिमाही के नतीजों का सीजन खत्म हो रहा है। बीएसई 500 कंपनियों (ओएमसी को छोड़कर) की टैक्स के बाद मुनाफे की ग्रोथ लगातार पांचवीं तिमाही 10 फीसदी से कम रही है। इसका मतलब है कि मार्जिन बढ़ाने की गुंजाइश कंपनियों के लिए घट रही है

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 20, 2024 पर 10:26 AM
Short Call: रिटेल इनवेस्टर्स का सपोर्ट क्या मार्केट को हमेशा मिलता रहेगा? जानिए Glenmark Pharma और Zomato क्यों सुर्खियों में हैं
शेयरों की वैल्यूएशन पहले से ज्यादा चल रही है। यह बाजार ऐसा है, जिसमें कीमतें फंडामेंटल्स के मुकाबले ऊपर चल रही हैं।

जून तिमाही के नतीजों का सीजन अब खत्म होने जा रहा है। बीएसई 500 कंपनियों (ओएमसी को छोड़कर) की टैक्स के बाद मुनाफे की ग्रोथ लगातार पांचवीं तिमाही 10 फीसदी से कम रही है। हेल्पफुल बेस के बाद भी आंकड़ों में ज्यादा बदलाव नहीं दिखा है। चिंता की बात यह है कि ज्यादातर कंपनियों के मार्जिन की गुंजाइश घट रही है। नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के एनालिस्ट्स का कहना है कि बढ़ने की जगह मार्जिन पर दबाव दिख सकता है। कंपनियां पहले से ही अपनी उच्चतम क्षमता पर काम कर रही हैं। ऐसे में प्रॉफिट में अच्छी ग्रोथ तभी आएगी जब रेवेन्यू ग्रोथ अच्छी रहेगी।

कंजम्प्शन ग्रोथ (Consumption Growth) ज्यादा बढ़ने की उम्मीद नहीं दिखती। प्राइवेट सेक्टर में सैलरी ग्रोथ साल दर साल आधार पर 8 फीसदी से कम रही है। अगर कोविड के साल को छोड़ दिया जाए तो यह 10 साल में सबसे कम है। सैलरी कम बढ़ने का असर परिवारों की इनकम पर पड़ रहा है। ऐसे में आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की अर्निंग्स पर दबाव दिख सकता है। इधर, शेयरों की वैल्यूएशन पहले से ज्यादा चल रही है। यह बाजार ऐसा है, जिसमें कीमतें फंडामेंटल्स के मुकाबले ऊपर चल रही हैं। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के निवेश से मार्केट को मदद मिल रही है। लेकिन, सवाल है कि यह मदद कब तक मिलेगी?

Glenmark Pharmaceuticals

ग्लेनमार्क फार्मा के शेयर 19 अगस्त को 4 फीसदी चढ़कर 1,630 रुपये पर बंद हुए। Glenmark Pharma की अमेरिकी सब्सिडियरी ने अमेरिका में आंखों में एलर्जी की एक दवा लॉन्च की है। इसका असर शेयरों पर देखने को मिला। कंपनी के पहली तिमाही के नतीजों में कंपनी का प्रदर्शन बहुत अच्छा दिखा है। इसमें डोमेस्टिक फॉर्मुलेशंस और यूरोपीय मार्केट में अच्छे प्रदर्शन का हाथ रहा। मोतीलाल ओसवाल ने FY25 और FY26 में कंपनी की अर्निंग्स के अनुमान क्रमश: 11 फीसदी और 17 फीसदी बढ़ा दिए हैं। उधर, बेयर्स की दलील है कि एब्रिबिएटेड न्यू ड्रग अप्लिकेशन (ANDA) के एप्रूवल में सुस्ती दिख सकती है। नुवामा ने अपनी रिपोर्ट में इस बारे में बताया है। USFDA का रिस्क भी दिख रहा है, जो जेनेरिक्स से जुड़ा है।

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