शेयरों के निवेशकों के जख्म पर मरहम लगाने वाला साल साबित होगा 2026

2025 में इंडियन मार्केट्स का प्रदर्शन ज्यादातर दूसरे बाजारों के मुकाबले कमजोर रहा। बीते साल डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 5 फीसदी की गिरावट आई। हालांकि, साल के अंत तक निफ्टी में अच्छी रिकवरी देखने को मिली। लेकिन, ज्यादातर शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा

अपडेटेड Jan 05, 2026 पर 1:54 PM
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फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में दो साल के बाद कंपनियों की अर्निंग्स में अच्छी ग्रोथ दिख सकती है।

साल 2025 शेयरों के निवेशकों के लिए अच्छा नहीं रहा। निफ्टी का रिटर्न डबल डिजिट में रहने के बावजूद ज्यादातर इनवेस्टर्स को नुकसान उठाना पड़ा। फॉरेन फंडों की बिकवाली, अमेरिका से ट्रेड डील में देरी और डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का असर मार्केट के सेंटीमेंट पर पड़ा। सवाल है कि क्या 2026 पिछले साल की तरह रहेगा या बाजार में रौनक लौटेगी?

इंडियन मार्केट्स का प्रदर्शन दूसरे बाजारों के मुकाबले कमजोर रहा

2025 में इंडियन मार्केट्स का प्रदर्शन ज्यादातर दूसरे बाजारों के मुकाबले कमजोर रहा। बीते साल डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 5 फीसदी की गिरावट आई। हालांकि, साल के अंत तक निफ्टी में अच्छी रिकवरी देखने को मिली। लेकिन, ज्यादातर शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा। इससे इनवेस्टर्स को अपने पोर्टफोलियो पर रिटर्न नहीं मिला। विदेशी फंडों ने 2025 में रिकॉर्ड बिकवाली की। हालांकि, घरेलू फंडों (DII) ने खरीदारी कर बाजार को गिरने नहीं दिया।


स्टॉक मार्केट्स पर अमेरिकी टैरिफ का भी असर

अमेरिका ने भारत पर सबसे ज्यादा टैरिफ लगाया। उसने पहले 25 फीसदी टैरिफ लगाया। बाद में रूस से ऑयल खरीदने पर 25 फीसदी की पेनाल्टी लगाई, जो 27 अगस्त से लागू हो गई। इससे इंडिया पर कुल टैरिफ बढ़कर 50 फीसदी हो गया। इसका असर भी इंडियन स्टॉक मार्केट्स पर पड़ा। विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बढ़ी। इंडियन शेयर बाजार में एआई से जुड़ी कंपनियां नहीं होने से भी विदेशी निवेशकों ने निवेश नहीं किया।

2026 में इंडियन मार्कट्स में लौटने वाली है रौनक

2026 में भारत की तस्वीर गुलाबी लगती है। FY26 के पहले छह महीनों में औसत ग्रोथ 8 फीसदी रही है। ज्यादातर एनालिस्ट्स का मानना है कि इस वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी से ज्यादा रहेगी। रिटेल इनफ्लेशन रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब है। 2025 में आरबीआई ने ग्रोथ की रफ्तार बढ़ाने के लिए रेपो रेट में 1.25 फीसदी की कमी की है। इसका इकोनॉमी और मार्केट के सेंटिमेंट पर पॉजिटिव असर पड़ा है।

कंजम्प्शन बढ़ाने के उपायों का अच्छा असर

सरकार ने ग्रोथ की रफ्तार बढ़ाने के लिए पूंजीगत खर्च पर फोकस बनाए रखा है। इसके अलावा कंजम्प्शन बढ़ाने के लिए भी सरकार ने कई उपाय किए हैं। पिछले साल के यूनियन बजट में सरकार ने सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री कर दी। जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी के रेट्स में कमी करने का फैसला लिया। इससे 300 से ज्यादा चीजों की कीमतों में कमी आई है। ग्रामीण इलाकों में कंजम्प्शन बढ़ रहा है। इंटरेस्ट रेट्स में कमी से शहरी इलाकों में भी कंजम्प्शन बढ़ने के संकेत हैं।

दो साल बाद कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ बढ़ने की उम्मीद

फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में दो साल के बाद कंपनियों की अर्निंग्स में अच्छी ग्रोथ दिख सकती है। ज्यादातर लार्जकैप स्टॉक्स का प्रदर्शन बेहतर रह सकता है। निफ्टी में शामिल करीब 70 फीसदी कंपनियों के शेयरों का रिटर्न पॉजिटिव रह सकता है। आईटी सेक्टर का आउटलुक भी बेहतर हो रहा है। लेकिन, 2026 में शेयरों का प्रदर्शन सबसे ज्यादा अमेरिका से ट्रेड डील पर निर्भर करेगा। रूस से भारत का ऑयल इंपोर्ट घटने के बाद अमेरिका से ट्रेड डील होने की उम्मीद बढ़ी है।

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फॉरेन इनवेस्टर्स इंडियन मार्केट्स में लौट सकते हैं

अगर कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ अच्छी रहती है और अमेरिका से ट्रेड डील होती है तो फॉरेन फंड्स इंडियन मार्केट्स में लौट सकते है। इसके अलावा इंडियन मार्केट्स की वैल्यूएशन भी अपेक्षाकृत अट्रैक्टिव है। अभी निफ्टी में एक साल की फॉरवर्ड वैल्यूएशन के 20.5 गुना पर ट्रेडिंग हो रही है। यह लंबी अवधि के औसत से थोड़ा कम है। इसलिए मार्केट में गिरावट की सीमित आसार दिख रहे हैं। इनवेस्टर्स इस साल अच्छे रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए इंडेक्स और अच्छी कंपनियों के शेयरों में निवेश जरूरी है।

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