Stock Market Strategy in Election Time: चुनावी माहौल में स्टॉक मार्केट को लेकर स्ट्रैटेजी क्या होनी चाहिए? हिंदी बेल्ट के तीन अहम राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद मार्केट में शानदार तेजी का रुझान है। अगले साल लोकसभा चुनाव हैं और इसे लेकर स्ट्रैटेजी पर चर्चा शुरू हो गई है। आमतौर पर माना जाता है कि चुनावी साल में खपत से जुड़े स्टॉक्स यानी कंजम्प्शन स्टॉक्स बेहतर रिटर्न देते हैं क्योंकि चुनाव से पहले सरकार खर्च बढ़ाती है। हालांकि इस बार माहौल कुछ अलग है। एनालिस्ट्स का मानना है कि इस बार प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर की सुस्त ग्रोथ के बावजूद कंजम्प्शन स्टॉक्स से बेहतर इंडस्ट्रियल्स स्टॉक्स रिटर्न दे सकते हैं।
ब्रोकरेज का क्या है रुझान
सुस्त मांग और कच्चे माल के ऊंचे भाव के चलते कंज्यूमर स्टेपल्स के शेयरों को झटका लग सकता है। हालांकि प्रीमियम चीजो को लेकर बढ़ते रुझान के चलते कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी बढ़िया परफॉर्म कर सकते हैं। हालांकि एनालिस्ट्स के मुताबिक सबसे बेहतर परफॉरमेंस इंडस्ट्रियल स्पेस में दिख सकता है। प्रभुदास लीलाधर के रिसर्च हेड अमनीश अग्रवाल के मुताबिक इंफ्रा सेगमेंट में सरकारी निवेश के दम पर इंडस्ट्रियल शेयर बेहतर परफॉरमेंस दिखा सकते हैं। राज्यों के चुनावी नतीजे ने अगले साल के लोकसभा चुनाव में सरकार की वापसी की संभावना बढ़ी है जिससे मौजूदा नीतियों के जारी रहने की उम्मीद है। हाई वैल्यूएशन के बावजूद एनालिस्ट्स को भरोसा है कि इंडस्ट्रियल स्टॉक्स का मजबूत परफॉर्मेंस जारी रहेगा।
वेल्थमिल सिक्योरिटीज के डायरेक्टर (इक्विटी स्ट्रैटेजीज) क्रांति बथिनी के मुताबिक पब्लिक सेक्टर के बढ़ते कैपिटल एक्सपेंडिचर और निजी सेक्टर में भी बढ़ते खर्च के चलते इंडस्ट्रियल सेक्टर मीडियम से शॉर्ट टर्म में बेहतर परफॉर्म कर सकते हैं। क्रांति के मुताबिक इंडस्ट्रियल कंपनियों के लिए सबसे बड़ा फायदा ये है कि मेटल की कीमतें स्थिर हैं। वे लोहा और स्टील की सबसे बड़ी खरीदार हैं और इनके स्थिर भाव से उन्हें फायदा मिलेगा।
कंजम्प्शन स्टॉक्स की बात करें तो आम तौर पर चुनाव से पहले सरकारी खर्च और लोकलुभावन योजनाओं के चलते गांवों में मांग बढ़ती है। हालांकि अमनीश अग्रवाल का कहना है कि इस बार ऐसा नहीं हुआ है। इस बार ऊंचाई महंगाई और खराब मानसून के चलते डिमांड अभी नहीं बढ़ी है।
हाई वैल्यूएशन के बावजूद बेहतर परफॉर्म करेंगे इंडस्ट्रियल शेयर
सिर्फ इस बार ही नहीं इंडस्ट्रियल शेयरों के बेहतर परफॉर्म की उम्मीद नहीं जताई जा रही है बल्कि इससे पहले के चुनाव में कंजम्प्शन स्टॉक्स से बेहतर इंडस्ट्रियल शेयर रहे हैं। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक 2009 और 2014 के जनवरी से अप्रैल में बीएसई इंडस्ट्रियल इंडेक्स 15 फीसदी से ऊपर चढ़ा। अब एक्सपर्ट्स का मानना है कि हाई वैल्यूएशन के बावजूद यह ट्रेंड जारी रहेगा।
अब सवाल उठता है कि किन शेयरों पर दांव लगाएं तो एनालिस्ट्स के मुताबिक एलएंडटी, सीमेन्स और एबीबी बेहतर परफॉर्म कर सकते हैं। एक एनालिस्ट के मुताबिक एलएंडटी देश की सबसे बेहतर इन्फ्रा और इंजीनियरिंग कंपनी है। खाड़ी देशों में इसका काफी प्रभाव है और उनकी इकॉनमी बढ़ रही हैं। कंपनी का ऑर्डरबुक मजबूत है और कंपनी का ओवरऑल आउटलुक काफी बेहतर है। एलएंडटी का टोटल कंसालिडेटेड ऑर्डर बुक अब करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये का है जिसमें करीब 35 फीसदी हिस्सा इंटरनेशनल ऑर्डर से आता है।
मजबूत ऑर्डर बुक के चलते एनालिस्ट्स एबीबी को लेकर भी काफी पॉजिटिव हैं। दलाल ब्रोचा की रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे सेगमेंट में इसे प्रोजेक्ट मिले जिससे ट्रैक्शन मोटर और प्रोपल्शन सिस्टम क्षमता जैसे अन्य क्षेत्रों में भी इसका कारोबार बढ़ा। डिफेंस और रेलवे स्टॉक्स की बात करें तो 'मेक इन इंडिया' से इसे सपोर्ट मिल रहा है। टीटागढ़ वैगन्स और RVNL ने इस साल कई रेलवे और मेट्रो परियोजनाएं हासिल की हैं। इसके अलावा HAL, BHEL और BEL को भारतीय सेना से ऑर्डर मिला है। कुछ फंड मैनेजेर्स के मुताबिक इसका वैल्यूएशन अब हाई हो चुका है लेकिन कुछ एनालिस्ट्स का यह भी मानना है कि मजबूत, स्ट्रक्चरल ट्रिगर में ऐसे हाई वैल्यूएशन की डिमांड रहती है।
पावर सेक्टर की बात करें तो रिन्यूएबल पर फोकस बढ़ रहा है जिससे पावर शेयरों को बूस्ट मिल रहा है। जेफरीज के मुताबिक पावर कैपिटल एक्सपेंडिचर वित्त वर्ष 2024-26 के बीच सालाना 9 फीसदी की चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़ सकता है। इसका फायदा पावर ग्रिड, थर्मैक्स, NTPC और JSW Energy में निवेश कर उठा सकते हैं।
अमनीश के मुताबिक कंज्यूमर स्टेपल्स से अच्छे रिटर्न की उम्मीद नहीं की जा सकती है क्योंकि ग्रामीण मांग सुस्त बनी हुई है। हालांकि उनका मानना है कि डिस्क्रेशनरी जैसे कि टाइटन से बेहतर उम्मीद की जा सकती है। इसकी वजह ये है कि हाई क्लास के ज्वैलरी खरीदने वालों पर महंगाई का खास असर नहीं पड़ता है।
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