Stock Markets: कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर नीलेश शाह ने आज के बाजार में निवेशकों को बड़े 3 मंत्र दिए हैं। शाह को इनवेस्टमेंट खासकर शेयर बाजार का व्यापक अनुभव है। उनके मंत्र आज निवेशकों के तब काफी काम आ सकते हैं, जब बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। अमेरिका और ईरान की लड़ाई की वजह से बाजार की दिशा को लेकर पक्के तौर पर कुछ कहना मुश्किल है। न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने शेयरों के बारे में कई अहम बातें बताईं।
शाह ने कहा कि निवेश में अनुशासन बनाए रखना जरूरी है। साथ ही एसेट ऐलोकेशन स्ट्रेटेजी का ध्यान रखना है। उन्होंने कहा कि अभी बाजार न तो बहुत सस्ता है और न ही बहुत महंगा है। इसलिए निवेशकों को शॉर्ट-टर्म सेंटिमेंट की जगह अपने एसेट ऐलोकेशन के हिसाब से निवेश करना चाहिए।
शाह ने कहा कि कोई नहीं जानता कि मार्केट की दिशा क्या होगी। लेकिन, कुछ चीजें आपके हाथ में हैं। आप अलग-अलग एसेट क्लास और जियोग्राफी के हिसाब से निवेश कर सकते हैं। यह लंबी अवधि में वेल्थ-क्रिएशन का बुनियादी सिद्धांत है। उन्होंने कहा, "कुछ पैसा डेट में, कुछ शेयरों में, कुछ सोने-चांदी में, कुछ रियल एसेट में, कुछ भारत में और कुछ भारत के बाहर निवेश करना जरूरी है। इससे आपको रियल रिटर्न मिलेगा।"
शाह ने कहा कि उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू निवेशकों का निवेश मजबूत बना हुआ है। उन्होंने कहा, "घरेलू निवेशकों की चिंता बढ़ी है, लेकिन उनके निवेश पर असर नहीं पड़ा है। उनका सपोर्ट एक मजबूत दीवार की तरह रहा है। इसका श्रेय सिप और म्यूचुअल फंड्स डिस्ट्रिब्यूटर्स को जाता है।"
उन्होंने कहा कि वैल्यूएशन इस बात पर निर्भर करती है कि बाजार से आप कितने रिटर्न की उम्मीद करते हैं। उन्होंने कहा, "अगर आप हर साल 30 फीसदी रिटर्न की उम्मीद कर रहे हैं तो यह मार्केट बहुत-बहुत महंगा है...लेकिन अगर आप आप 10 फीसदी रिटर्न को ठीक मानते हैं तो यह मार्केट निवेश के लिए सही है।"
विदेशी निवेश के ट्रेंड को उन्होंने मिलाजुला बताया। उन्होंने कहा कि कुछ विदेशी इनवेस्टर्स भारत में निवेश करना चाहते हैं...वे आईपीओ, प्राइवेट इक्विटी...में पैसे लगा रहे हैं...लेकिन कई एक्टिव एफपीआई बाजार से पैसे निकाल रहे हैं। उनका मानना है कि इंडिया में AI से जुड़ी कंपनियां नहीं हैं। उन्हें दूसरे बाजारों के मुकाबले भारतीय बाजार महंगा लगता है। हालांकि, लंबी अवधि के लिहाज से भारत पर उनके भरोसे पर असर नहीं पड़ा है।
ऑयल की कीमतों के बारे में उन्होंने कहा कि अगर क्रूड की कीमतें 100 डॉलर से नीचे बनी रहती हैं तो इसका मतलब है कि हम खराब समय को पीछे छोड़ चुके हैं। अगर क्रूड की कीमतें 100 के पार जाती हैं तो इसका मतलब है कि हमारे लिए रिस्क बना हुआ है। उन्होंने कहा कि बाजार हमेशा इवेंट्स पर रिएक्ट करता है।
डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।