स्टॉक मार्केट में बीते कुछ महीनों में जो बिकवाली हुई है, वह बड़े बुल रन के बीच सिर्फ एक सामान्य करेक्शन है। दिग्गज इनवेस्टर रमेश दमानी ने यह बात कही है। सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में उन्होंने स्टॉक मार्केट्स और निवेश को लेकर कई बड़ी बातें बताईं। उन्होंने कहा कि दुनिया खासकर अमेरिका में राजनीतिक और आर्थिक बदलाव देखने को मिले हैं। यह मुश्किल थोड़े समय के लिए है। इससे ग्लोबलाइजेशन पर असर पड़ने वाला नहीं है।
वैश्वीकरण की प्रक्रिया रुकने वाली नहीं है
Ramesh Damani कहा कि अमेरिका में बाजार में थोड़े समय के लिए मुश्किल बनी रह सकती है। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से दुनिया को लेकर अमेरिका की पॉलिसी बदली है। अमेरिका पहली बार अपने अंदर बदलाव लाने पर इतना फोकस कर रहा है। असका असर दुनिया पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इससे वैश्वीकरण की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है लेकिन वह रुकेगी नहीं। गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी की वजह से दुनिया में टैरिफ वॉर बढ़ने की आशंका दिख रही है।
हालिया बिकवाली बुलरन के बीच का करेक्शन
इंडियन स्टॉक मार्केट्स में आए करेक्शन के बारे में उन्होंने कहा यह 2021 में शुरू हुए बुलरन के बीच का करेक्शन है। करीब पांच साल में आया यह बड़ा करेक्शन है। लेकिन, यह छोटा होगा। उन्होंने कहा कि मार्केट में गिरावट के बावजूद कई स्टॉक्स हैं, जो ऑल टाइम हाई पर बने हुए हैं। आम तौर पर ऐसा बेयर फेज में नहीं होता है। इसके अलावा कंपनियों का फोकस कारोबार के विस्तार, ग्रोथ और मार्जिन बढ़ाने पर है। इससे आर्थिक ताकत का पता चलता है।
निवेशकों को चिंता करने की जरूरत नहीं
उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब मार्केट में ट्रांजेक्शन होता है तो कोई खरीदता है और कोई बेचता है। इसलिए जब FIIs बेच रहे हैं तो कोई खरीद रहा है। उनका संकेत घरेलू निवेशकों की तरफ था, जिन्होंने एफआईआई की बिकवाली के बीच अपनी खरीदारी से मार्केट को बड़ा सहारा दिया है।
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यह गिरावट खरीदारी का बड़ा मौका
उतारचढ़ाव से चिंतित निवेशकों के लिए उन्होंने कहा कि स्टॉक मार्केट में पैसे बनाना आसान नहीं है। सभी दिग्गज इनवेस्टर्स का मानना रहा है कि जब करेक्शन आता है तब लोग घबरा जाते हैं। हालांकि, यह सामान्य और मार्केट को खुद को करेक्ट करने का तरीका है। जब कभी वैल्यूएशन बहुत बढ़ जाती है लोग बिकवाली शुरू कर देते हैं। इससे खरीदारी के मौके बनते हैं। उन्होंने कहा कि फाइनेंशियल सिस्टम में ज्यादा कर्ज नहीं है। सरकार ने अपनी वित्तीय स्थिति को नियंत्रण में रखा है।