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चीन के प्रोत्साहन पैकेज से ग्लोबल मेटल मार्केट में किसी बड़े उलटफेर की संभावना नहीं

दूसरी तिमाही में चीन की इकोनॉमी में सकुंचन की आशंका है। ऐसे में कोरोना वायरस के बार-बार होने हमले के चलते इस साल प्रेसिडेंट शी जिनपिंग का 5.5 फीसदी का ग्रोथ लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नजर आ रहा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 11, 2022 पर 2:18 PM
चीन के प्रोत्साहन पैकेज से ग्लोबल मेटल मार्केट में किसी बड़े उलटफेर की संभावना नहीं
सोमवार को लंदन मेटल एक्सचेंज (London Metal Exchange) पर कॉपर के भाव 1.9 फीसदी टूटकर 7,657 डॉलर प्रति टन तक जाते नजर आए थे

ऐसे कमोडिटी निवेशक जो ग्लोबाल मेटल मार्केट में किसी सकारात्मक उलटफेर के लिए चीन से उम्मीद लगाए बैठे हैं उनको इस बार निराशा का सामना करना पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि चीन इस बार अपनी निवेश नीतियों से मेटल सेक्टर में उस तरह का जोश भरने में कामयाब नहीं रहेगा जैसा कि पिछले दौर में देखने को मिला था।

सूत्रों के हवाले से मीडिया में आई जानकारी के मुताबिक चीन स्थानीय सरकारों को साल के दूसरे छमाही में 220 अरब डॉलर के स्पेशल बॉन्ड बेचने की मंजूरी दे सकता है। इसके चलते इंफ्रा सेक्टर में बूस्ट आने की उम्मीद के चलते कमोडिटी की कीमतों में सुधार होता नजर भी आया। बताते चलें कि 2008, 2015 और फिर 2020 के दौरान चीन में आए वित्तीय संकट के दौरान चीन सरकार के प्रोत्साहन पैकेजों ने स्थिति सुधारने में अहम योगदान दिया था लेकिन जानकारों का कहना है कि इस बार चीन सरकार द्वारा घोषित राहत पैकेज से ग्लोबल मेटल मार्केट में कोई बहुत बड़ा उलटफेर होने की संभावना नहीं है।

जानकारों का कहना है कि इस एक्स्ट्रा फंड का उपयोग कोविड के दौरान बने बजटीय गैप को भरने में किया जाएगा। इससे मेटल की डिमांड, मंदी के दौर से गुजर रहे प्रॉपर्टी मार्केट और मुश्किल में चल रहे मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को कोई बड़ा फायदा नहीं होगा।

कैपिटल इकोनॉमिक्स के कैरोलाइन बेन (Caroline Bain)का कहना है कि दूसरी छमाही से चीन की इकोनॉमी में सुधार देखने को मिलेगा लेकिन यह सुधार हल्के स्तर का ही रहेगा। इससे चाइना किसी नई रैली को शुरु करने में सक्षम होगा, इस बात की संभावना नहीं है।

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