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Why Sensex-Nifty Crashed: ट्रंप का जादू खत्म! इन सात वजहों से मार्केट धड़ाम

Why Sensex-Nifty Crashed: अमेरिका में फिर से डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने की खुशी में 6 नवंबर को मार्केट जितना ऊपर चढ़ा था, उसमें से अधिकतर तेजी आज गायब हो गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही एक-एक फीसदी से अधिक टूट गए और लगभग सभी सेक्टर के इंडेक्स रेड जोन में हैं। ओवरऑल बात करें तो बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Nov 07, 2024 पर 4:27 PM
Why Sensex-Nifty Crashed: ट्रंप का जादू खत्म! इन सात वजहों से मार्केट धड़ाम

Sensex-Nifty Slips: अमेरिका में एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बन रहे हैं, इस खुलासे पर एक काराबोरी दिन पहले घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 एक-एक फीसदी से अधिक उछल गए थे। हालांकि आज पिछले कारोबारी दिन की अधिकतर तेजी गायब हो गई। इसकी एक बड़ी वजह तो ये है कि मार्केट की नजरें फिलहाल फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक है। सेंसेक्स आज 836.34 प्वाइंट्स यानी 1.04 फीसदी की फिसलन के साथ 79,541.79 और निफ्टी 50 भी 284.70 प्वाइंट्स यानी 1.16 फीसदी की गिरावट के साथ 24,199.35 पर बंद हुआ है। पीएसयू बैंक को छोड़ निफ्टी के सभी सेक्टर के इंडेक्स रेड जोन में हैं और पीएसयू बैंक का भी निफ्टी इंडेक्स फ्लैट ही बंद हुआ है। सबसे अधिक दबाव मेटल, आईटी, ऑटो, रियल्टी और फार्मा शेयरों में दिखा। ट्रंप की धमाकेदार वापसी के अगले दिन भारतीय स्टॉक मार्केट में गिरावट की अहम वजहों के बारे में यहां बताया जा रहा है।

अमेरिकी फेड के फैसले का इंतजार

जैसे रेपो रेट को लेकर भारतीय केंद्रीय बैंक आरबीआई की एमपीसी के बैठक के फैसले का इंतजार मार्केट को रहता है, वैसे ही अमेरिकी फेड के भी फैसले का इंतजार मार्केट कर रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों पर फैसला लेने वाला है और माना जा रहा है कि इस बार ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती हो सकती है। निवेशकों की नजर फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल के भाषण पर भी रहेगी ताकि आने वाले समय में इंटेरेस्ट रेट को लेकर फेड किस रास्ते पर बढ़ेगा, इसका संकेत मिल सके।

इसे लेकर जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर वीके विजयकुमार का कहना है कि ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' की रणनीति अमेरिकी इकॉनमी को मजबूत कर सकती है। हालांकि वीके विजयकुमार का यह भी कहना है कि अगर वह चीन से आयात पर 60 फीसदी और बाकी देशों से आयात पर 10-20 फीसदी का टैरिफ लगाते हैं तो महंगाई बढ़ सकती है और फेड की महंगाई पर काबू पाने की नीति संकट में पड़ जाएगी। ऐसे में अमेरिकी फेड रेट में कटौती की नीति पर फिर से विचार कर सकता है। ऐसा हुआ तो दुनिया भर के स्टॉक मार्केट को झटका लगेगा।

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