भारतीय सोलर इंडस्ट्री को अमेरिका में बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के कॉमर्स डिपार्टमेंट ने भारत से आयात होने वाले सोलर सेल और सोलर पैनल पर भारी काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। भारत के अलावा इंडोनेशिया और लाओस से आने वाले सोलर उत्पादों पर भी भारी काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) लगाई गई है।
अमेरिकी सरकार का कहना है कि इन देशों की कंपनियों को सरकारी सब्सिडी का लाभ मिलता है। इसके चलते अमेरिकी कंपनियों को नुकसान होता है।
कितनी है आयात की हिस्सेदारी
व्यापार आंकड़ों के अनुसार 2025 में इन तीन देशों से अमेरिका ने करीब 4.5 अरब डॉलर के सोलर उत्पाद आयात किए थे। यह कुल अमेरिकी सोलर आयात का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है।
यह इस मामले में पहला फैसला है। अगले महीने अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट यह भी तय करेगा कि क्या इन देशों की कंपनियों ने अमेरिका में अपने उत्पाद उत्पादन लागत से कम कीमत पर बेचे। अगर डंपिंग का आरोप सही पाया गया तो इन देशों पर अतिरिक्त एंटी-डंपिंग ड्यूटी भी लगाई जा सकती है।
किन कंपनियों पर कितना असर
देशों के हिसाब से ड्यूटी लगाने के अलावा कुछ कंपनियों पर अलग से दरें तय की गई हैं। भारत की मुंद्रा सोलर पर 125.87% ड्यूटी लगाई गई है। इंडोनेशिया की PT ब्लू स्काई सोलर पर 143.3% और PT REC सोलर एनर्जी पर 85.99% ड्यूटी लगाई गई है। लाओस की सोलरस्पेस टेक्नोलॉजी सोल कंपनी और वियतनाम सनर्जी जॉइंट स्टॉक कंपनी पर 80.67% ड्यूटी तय की गई है।
सोलरस्पेस के वकील मैथ्यू नाइसली ने इस फैसले से असहमति जताई है। उनका कहना है कि यह दर वास्तविक स्थिति को नहीं दिखाती।
अमेरिकी इंडस्ट्री की दलील
यह शिकायत 'अलायंस फॉर अमेरिकन सोलर मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेड' ने की थी। इसमें साउथ कोरिया की हनवा क्यूसेल्स, एरिजोना की फर्स्ट सोलर और टेक्सास की मिशन सोलर जैसी कंपनियां शामिल हैं। ग्रुप का कहना है कि सब्सिडी वाले इंपोर्ट से अरबों डॉलर के घरेलू निवेश और नौकरियों पर खतरा है।
अलायंस के लीड अटॉर्नी टिम ब्राइटबिल ने कहा कि यह फैसला निष्पक्ष कॉम्पिटीशन बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने एक बयान में कहा, "अमेरिकी कंपनियां घरेलू कैपेसिटी को फिर से बनाने और अच्छी सैलरी वाली नौकरियां बनाने के लिए अरबों डॉलर इन्वेस्ट कर रही हैं। अगर गलत तरीके से ट्रेड किए गए इंपोर्ट को मार्केट को बिगाड़ने दिया गया तो ये इन्वेस्टमेंट सफल नहीं हो सकते।"
अमेरिका पहले भी सोलर आयात पर सख्ती कर चुका है। पहले के मामलों में मलेशिया, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया से आयात पर भारी ड्यूटी लगाई गई थी। इसके बाद वहां से आयात में तेज गिरावट आई थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस नए फैसले से ग्लोबल सोलर सप्लाई चेन में फिर बदलाव आ सकता है। भारतीय सोलर कंपनियों और निर्यातकों के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है। आगे का फैसला आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
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