Vodafone Idea FPO: इश्यू का आज आखिरी दिन, आपको इस FPO में पैसा लगाना चाहिए या दूर रहना बेहतर

Vodafone Idea FPO: वोडाफोन आइडिया का इश्यू आज बंद होने वाला है। दो दिनों में अब तक कंपनी का इश्यू सिर्फ 36 फीसदी ही भर पाया है। ऐसे में जानिए क्या आपको इससे दूरी बनाकर रखना चाहिए या निवेश का चांस लेना चाहिए

अपडेटेड Apr 22, 2024 पर 1:50 AM
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Vodafone Idea FPO: वोडा आइडिया की योजना डेट और इक्विटी के जरिए 45 हजार करोड़ रुपए जुटाने की है और यह एफपीओ इसी का एक हिस्सा है।
     
     
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    Vodafone Idea FPO: वोडाफोन आइडिया (Voda Idea) का फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) आज यानी 18 अप्रैल था। इस इश्यू का 22 अप्रैल यानि आज आखिरी दिन है। Vodafone Idea का इश्यू दो दिनों में सिर्फ 36 फीसदी सब्सक्राइब हो चुका है। इश्यू जारी करने से पहले Vodafone Idea ने करीब 60 एंकर इनवेस्टर्स से 5000 करोड़ रुपए जुटाए थे। कंपनी का FPO आज बंद होने वाला है। ऐसे में जान लीजिए कि क्या इसमें आपको पैसा लगाना चाहिए या दूर से बैठकर तमाशा देखना ही बेहतर है।

    वित्तीय संकट से जूझ रही वोडा आइडिया का 18 हजार करोड़ रुपये का एफपीओ देश का अब तक का सबसे बड़ा है तो इसे लेकर चर्चा भी खूब हो रही है कि इसमें पैसे लगाने चाहिए कि नहीं। इस इश्यू के लिए कंपनी ने जो प्राइस बैंड फिक्स किया है, वह इसके मौजूदा भाव से 17-29 फीसदी के डिस्काउंट पर है। इसके शेयर 16 अप्रैल को इक्विटी मार्केट का कारोबार खत्म होने पर 12.90 रुपये के भाव (Voda Idea Share Price) पर बंद हुआ था।  वहीं इश्यू के लिए प्राइस बैंड 10-11 रुपये है। हाल ही में कंपनी के प्रमोटर आदित्य बिड़ला ग्रुप ने प्रिफरेंशियल इश्यू के तहत 14.87 रुपये प्रति शेयर के भाव पर इसमें 2075 करोड़ रुपये डाले थे।

    Vodafone Idea FPO की डिटेल्स


    वोडा आइडिया के एफपीओ में निवेश को लेकर एक्सपर्ट्स की राय जानने से पहले यह जान लेते हैं कि कंपनी यह इश्यू लेकर क्यों आई है। कंपनी की योजना डेट और इक्विटी के जरिए 45 हजार करोड़ रुपए जुटाने की है और यह एफपीओ इसी का एक हिस्सा है। इसे बकाया चुकाने और घाटा कम करने के लिए लाया जा रहा है। पिछले वित्त वर्ष 2023-24 के शुरुआती नौ महीने अप्रैल-दिसंबर 2023 में वोडा आइडिया को 23,564 करोड़ रुपये का भारी-भरकम घाटा हुआ था। दिसंबर 2023 के आंकड़ों के मुताबिक इस पर 2.15 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके अलावा कंपनी पर स्पेक्ट्रम का 58,254 करोड़ रुपये का बकाया है।

    इस इश्यू के तहत सिर्फ नए शेयर जारी होंगे। इश्यू का 50 फीसदी हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB), 15 फीसदी नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) और बाकी 35 फीसदी खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित है। एफपीओ से मिले 12750 करो़ड रुपये का इस्तेमाल नेटवर्क इंफ्रा का विस्तार करने के लिए इक्विपमेंट की खरीदारी में होगी। इसके तहत यह 4जी साइट्स बढ़ाएगी और नए 5जी साइट्स बनाएगी। इसके अलावा एफपीओ के 2,175.31 करोड़ रुपये का इस्तेमाल स्पेक्ट्रम के बकाए को चुकाने में होगा।

    Vodafone Idea FPO: पैसे लगाएं या छोड़ दें?

    वोडाफोन आइडिया का 18,000 करोड़ रुपये का एफपीओ अगर सफल रहा, तो वोडाफोन आइडिया को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन कंपनी के लगातार घाटे, नकदी संकट के साथ-साथ रिलायंस जियो और भारती एयरटेल से हाई कॉम्पटीशन के चलते एनालिस्ट्स ने निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मेहता इक्विटीज के प्रशांत तापसे का कहना है कि जियो और एयरटेल से कॉम्पटीशन में यह लगातार अपने सब्सक्राइबर्स गंवा रही है और इसका घाटा भी बढ़ रहा है जिसके चलते एफपीओ में पैसे लगाने से बचना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर एफपीओ पूरा भर जाता है तो इससे कंपनी को काफी वित्तीय राहत मिलेगी। इससे कंपनी को अपने 4जी इंफ्रा में तेजी से निवेश और विस्तार करने और 5 जी इंफ्रा स्थापित सेटअप करने में मदद करेगा।

    पेस360 के को-फाउंडर और चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट अमित गोएल ने भी निवेशकों को इस एफपीओ से दूर रहने की सलाह दी है। अमित के मुताबिक मार्केट इस समय काफी ओवरवैल्यूएड है और वैल्यूएशन काफी महंगा है। अमित का कहना है कि एफपीओ से पैसे मिलने पर वोडाफोन आइडिया को अपने नेटवर्क कैपिटल एक्सपेंडिचर को बढ़ाने, 4जी कवरेज में असमानता को कम करने और 5जी इंफ्रा को लाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा चुनाव के बाद टैरिफ में बढ़ोतरी और एजीआर (एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू) में राहत की उम्मीजों के चलते इसके कैश फ्लो की स्थिति सुधर सकती है।

    स्वास्तिक इन्वेस्टमार्ट की वेल्थ हेड शिवानी न्याति का कहना है कि नियर टर्म में वोडाफोन आइडिया के ट्रैक पर आने की गुंजाइश अनिश्चित दिख रही है। ऐसे में एफपीओ में पैसे लगाने से पहले निवेशकों को इस पर सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए। शिवानी के मुताबिक एफपीओ के सफल होने पर इसका बुनियादी ढांचा मजबूत हो सकता है। रिस्क की बात करें तो इसके यूजर्स लगातार घट रहे हैं और 2026 में जब 400 करोड़ डॉलर तक का स्पेक्ट्रम और एजीआर बकाया देना होगा तो इसकी वित्तीय सेहत डांवाडोल हो सकती है।

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