Defence Stocks: डिफेंस शेयरों में क्यों लगी है आग? तीन बड़े कारण और एक चेतावनी

Defence Stocks: डिफेंस सेक्टर के शेयरों में पिछले कुछ दिनों से जबरदस्त उछाल देखने को मिल रही है। सिर्फ एक हफ्ते में 30% तक की तेजी और हाल के निचले स्तरों से 100% तक की धुआंधार तेजी देखने को मिली है। लेकिन क्या यह सिर्फ एक अस्थायी तेजी है, या इस तेजी में लंबी अवधि का दम है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं

अपडेटेड Mar 24, 2025 पर 9:50 AM
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Defence Stocks: रक्षा मंत्रालय ने मार्च महीने में अब तक 54,000 करोड़ के नए प्रस्तावों को मंजूरी दी है

Defence Stocks: डिफेंस सेक्टर के शेयरों में पिछले कुछ दिनों से जबरदस्त उछाल देखने को मिल रही है। सिर्फ एक हफ्ते में 30% तक की तेजी और हाल के निचले स्तरों से 100% तक की धुआंधार तेजी देखने को मिली है। लेकिन क्या यह सिर्फ एक अस्थायी तेजी है, या इस तेजी में लंबी अवधि का दम है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं

1. बड़ी गिरावट के बाद बड़ी वापसी

इस साल की शुरुआत में स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में जबरदस्त गिरावट आई थी, जिसमें डिफेंस स्टॉक्स भी बुरी तरह पिटे थे। कई शेयर 2023 के उच्चतम स्तरों से 50-75% तक गिर गए थे, लेकिन अब उनमें जोरदार रिकवरी हो रही है।

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स के शेयरों में हाल के निचले स्तर से 183% की तेजी देखने को मिली है, जबकि गार्डन रीच शिपबिल्डर्स & इंजीनियर्स 126% और कोचिन शिपयार्ड 67% चढ़ा है। वहीं, पारस डिफेंस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, भारत डायनामिक्स और जेन टेक्नोलॉजीज के शेयरों में 48-56% तक की तेजी देखने को मिली।


हालांकि, इस शानदार बढ़त के बावजूद, कई स्टॉक्स अभी भी अपने पिछले उच्चतम स्तर से नीचे हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सिर्फ एक 'रिलीफ रैली' यानी राहत भरी तेजी है। प्रभुदास लीलाधर के डिफेंस एनालिस्ट अमित अनवानी का कहना है कि "इस तेजी के पीछे मुख्य कारण बाजार के सेंटीमेंट में आया बदलाव है, लेकिन अभी तक इन शेयरों में कोई बड़ी संस्थागत खरीदारी नहीं दिखी है।"

जब बाजार में मोमेंटम लौटता है, तो ट्रेडर्स पॉजिटिव खबरों का पीछा करते हैं और हाल के दिनों में डिफेंस सेक्टर को लेकर लगातार अच्छी खबरें आ रही हैं।

2. घरेलू मोर्चे पर मजबूत ग्रोथ स्टोरी

मार्च का महीना डिफेंस ऑर्डर के लिहाज से अहम होता है, और इस साल भी रक्षा मंत्रालय ने इस महीने 54,000 करोड़ के नए प्रस्तावों को मंजूरी दी है। FY25 में अब तक कुल 2.2 लाख करोड़ रुपये के रक्षा सौदों को हरी झंडी मिल चुकी है।

भारत में घरेलू रक्षा खरीद बढ़कर 75% हो गई है, जो कि FY19 में 54% थी। यह सरकार की 'मेक इन इंडिया' रणनीति का नतीजा है, जो घरेलू डिफेंस कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है। सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि अब रक्षा खरीद की प्रक्रिया में लगने वाला समय दो साल से घटाकर सिर्फ छह महीने कर दिया गया है।

इससे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), मझगांव डॉक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), भारत डायनामिक्स और PTC इंडस्ट्रीज जैसी घरेलू कंपनियों को जबरदस्त फायदा हो सकता है।

अनवानी का कहना है, "HAL के नासिक प्लांट के शुरू होने से सप्लाई चेन में सुधार होगा, जिससे कंपनी ज्यादा तेजी से एयरक्राफ्ट डिलीवर कर सकेगी।" इसी तरह, BEL को डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स ऑर्डर्स में बढ़ोतरी का फायदा मिल रहा है, जबकि मझगांव डॉक के पास मजबूत ऑर्डर बुक है।

इसके अलावा, चीन की आक्रामक नीतियों और ग्लोबल भू-राजनीतिक तनावों को देखते हुए भारत आने वाले सालों में अपने डिफेंस बजट में और बढ़ोतरी कर सकता है।

3. ग्लोबल स्तर पर डिफेंस खर्च में उछाल

ग्लोबल सैन्य खर्च में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। 2024 में 2024 में ग्लोबल सैन्य बजट बढ़तकर 2.46 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो 2023 में 2.24 ट्रिलियन डॉलर था। यानी इसमें 7.4% की वास्तविक बढ़ोतरी हुई है। यूरोप, अमेरिका और एशिया में कई देशों ने अपने रक्षा खर्च में भारी इजाफा किया है।

जर्मनी ने हाल ही में 500 अरब यूरो (लगभग 45 लाख करोड़ रुपये) के डिफेंस कार्यक्रम को मंजूरी दी है। वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो देशों से कहा है कि वे अपनी GDP का 5% रक्षा बजट पर खर्च करें, नहीं तो अमेरिका उन्हें सुरक्षा की गारंटी नहीं देगा।

ग्लोबल स्तर पर डिफेंस खर्च में ढ़ोतरी से अमेरिका, यूरोप और एशिया में डिफेंस स्टॉक्स को जबरदस्त सपोर्ट मिला है। लॉकहीड मार्टिन, BAE सिस्टम्स, राइनमेटल और हानव्हा एयरोस्पेस जैसी कंपनियों के शेयर बढ़े हैं, जिससे भारतीय डिफेंस कंपनियों के लिए भी एक पॉजिटिव माहौल बना है।

चेतावनी: हर उछाल मौका नहीं होता

भारतीय डिफेंस कंपनियों के लिए लंबी अवधि की संभावनाएं मजबूत हैं, लेकिन यह मानना कि उन्हें ग्लोबल सैन्य खर्च में बढ़ोतरी से सीधे फायदा मिलेगा, गलत होगा।

डिफेंस एनालिस्ट अनवानी कहते हैं, "मुझे संदेह है कि यूरोपीय रक्षा खर्च का भारतीय कंपनियों को कोई तात्कालिक फायदा मिलेगा। भारत का फोकस अभी आत्मनिर्भरता पर है। यानी अभी डिफेंस इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया जा रहा है, न कि एक्सपोर्ट बढ़ाने पर।"

यूरोपीय डिफेंस मार्केट में आई तेजी से सबसे ज्यादा लाभ दक्षिण कोरिया और जापान की कंपनियों को मिलने का अनुमान है, क्योंकि उनकी इस मार्केट में पहले से मजबूत पकड़ है। भारतीय कंपनियां—जैसे डाटा पैटर्न्स, एस्ट्रा माइक्रोवेव, सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स, और डायनामेटिक टेक्नोलॉजीज, को कुछ अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है, लेकिन यह भी याद रखना चाहिएकि डिफेंस सेक्टर में बड़े ऑर्डर मिलने में सालों लग जाते हैं।

एलारा कैपिटल में इंडस्ट्रियल्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रिन्यूएबल्स के वाइस-प्रेसिडेंट, हर्षित कपाड़िया ने बताया, "यूरोप की रक्षा जरूरतों के कारण भारतीय स्टॉक्स में तेजी आ रही है, यह सिर्फ एक हाइप है। भारत को पहले मजबूत सप्लायर नेटवर्क विकसित करना होगा, प्रोटोटाइप बनाने होंगे और फिर डील फाइनल करनी होगी—जो लंबा समय लेता है।"

क्या अभी खरीदारी करें?

इस समय, ज्यादातर डिफेंस स्टॉक्स FY27 के अनुमानित लाभ के 40 गुना PE रेशियो पर ट्रेड कर रहे हैं। यह महंगा नहीं है, लेकिन सस्ता भी नहीं कहा जा सकता। इस रैली को अभी संस्थागत निवेशकों का पूरा सपोर्ट नहीं मिला है। ऐसे में अगर बाजार में आगे फिर से गिरावट आती है, तो यह तेजी भी खत्म हो सकती है। इसलिए एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस सेक्टर में खरीदारी करने वाले निवेशकों को गिरावट के दौरान धीरे-धीरे स्टॉक्स इकट्ठा करने की रणनीति अपनानी चाहिए, बजाय इसके कि वे तेजी के माहौल में जल्दबाजी में खरीदारी करें।

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