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अभी और गिरेगा शेयर बाजार? जून तिमाही के आंकड़ों ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

मनीकंट्रोल ने करीब 1,335 कंपनियों के जून तिमाही नतीजों और उनके आंकड़ों का विश्लेषण किया है। इससे यह पता चला है कि भारतीय कंपनियों को जून तिमाही में शुद्ध सालाना आधार पर औसतन महज 8.3 प्रतिशत बढ़ा, जो दिसंबर 2023 के बाद की सबसे धीमी रफ्तार है। वहीं तिमाही आधार पर मुनाफे में 11 प्रतिशत की गिरावट आई, जो सितंबर 2022 के बाद की सबसे बड़ी तिमाही गिरावट है

Edited By: Vikrant singhअपडेटेड Aug 08, 2025 पर 6:51 PM
अभी और गिरेगा शेयर बाजार? जून तिमाही के आंकड़ों ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता
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शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से लगातार गिरावट जारी है। सेंसेक्स और निफ्टी पिछले एक महीने में करीब 4.5 फीसदी तक नीचे आ चुके हैं। अब इसी बीच कंपनियों के जून तिमाही के जो नतीजे सामने आ रहे हैं, वो निवेशकों के लिए एक और चिंता की घंटी बनाती दिखाई दे रही हैं। अगर हम बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, बीमा (BFSI) और ऑयल-गैस सेक्टर को छोड़ दें,तो बाकी सभी सेक्टर की भारतीय कंपनियों का प्रदर्शन पिछले कई तिमाहियों में सबसे कमजोर रहा है। शुद्ध मुनाफा और रेवेन्यू, दोनों में तिमाही आधार पर गिरावट आई है, जबकि सालाना आधार पर इनकी ग्रोथ की रफ्तार धीमी हुई है।

मनीकंट्रोल ने करीब 1,335 कंपनियों के जून तिमाही नतीजों और उनके आंकड़ों का विश्लेषण किया है। इससे यह पता चला है कि भारतीय कंपनियों को जून तिमाही में शुद्ध सालाना आधार पर औसतन महज 8.3 प्रतिशत बढ़ा, जो दिसंबर 2023 के बाद की सबसे धीमी रफ्तार है। वहीं तिमाही आधार पर मुनाफे में 11 प्रतिशत की गिरावट आई, जो सितंबर 2022 के बाद की सबसे बड़ी तिमाही गिरावट है।

सिर्फ मुनाफा ही नहीं कंपनियों के रेवेन्यू में यही ट्रेंड देखने को मिली। रेवेन्यू सालाना आधार पर 8.4 फीसदी बढ़ा, जो पिछली तीन तिमाही की सबसे धीमी ग्रोथ है। वहीं तिमाही आधार पर इसमें 2.2% की गिरावट आई, जो जून 2023 के बाद सबसे तेज है। ऑपरेटिंग प्रॉफिट भी सालाना आधार पर 10% बढ़ा, लेकिन तिमाही आधार पर इसमें 3.3% की गिरावट आई, जो सितंबर 2022 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है।

यहां सवाल ये बनता है कि आखिर इन कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ में क्यों गिरावट आ रही है? एक्सपर्ट्स का कहना है कि आईटी कंपनियों की कमाई पर कमजोर स्पेंडिंग, ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितता और क्लाइंट्स के फैसलों में देरी का असर पड़ा है। जबकि कंज्मप्शन कंपनियों का वॉल्यूम ग्रोथ कमजोर रहा और कच्चे माल की लागत में इजाफे से उनका मुनाफा और घट गया। शहरी इलाकों में कमजोर मांग और कॉम्पिटीशन में इजाफे से उनका प्रदर्शन कमजोर हुआ है।

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