विप्रो का प्रदर्शन चौथी तिमाही में कमजोर रहा। रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान से कम रही। यह लगातार दूसरा वित्त वर्ष (2024-25) है, जब कंपनी के रेवेन्यू में गिरावट आई है। हालांकि, मार्जिन के लिहाज से प्रदर्शन अच्छा रहा। चौथी तिमाही में ऑर्डर इनफ्लो भी अच्छा रहा। मैनेजमेंट की कमेंट्री में जोर सावधानी पर रहा है, जिससे पता चलता है कि नए वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी का गाइडेंस काफी कमजोर है। इसका मतलब है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भी कंपनी का प्रदर्शन कमजोर रह सकता है।
सिर्फ हेल्थकेयर वर्टिकल का अच्छा प्रदर्शन
आईटी सर्विसेज के रेवेन्यू में रिपोर्टेड करेंसी में तिमाही दर तिमाही आधार पर 1.2 फीसदी कमी आई, जबकि कंस्टैंट करेंसी में रेवेन्यू 0.8 फीसदी घटा। अमेरिका 2 और यूरोप से कंपनी का रेवेन्यू घटा है। अगल-अलग वर्टिकल के लिहाज से देखा जाए तो हेल्थकेयर की ग्रोथ अच्छी रही है। एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग में भी थोड़ी ग्रोथ दिखी। लेकिन, बाकी वर्टिकल्स में प्रदर्शन कमजोर रहा। ग्लोबल इकोनॉमी में अनिश्चितता का असर सभी इंडस्ट्रीज पर पड़ता दिख रहा है। कंज्यूमर और मैन्युफैक्चरिंग पर इसका ज्यादा असर दिखा है।
ऑपरेटिंग मार्जिन में स्थिरता दिखी
रेवेन्यू के मामले में कमजोर प्रदर्शन के बावजूद कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन तिमाही दर तिमाही आधार पर करीब स्थिर रहा। लेकिन, पूरे साल की बात करें तो इसमें 100 बेसिस प्वाइंट्स का इजाफा हुआ। कंपनी ने अपनी एंप्लॉयी बेंच का अच्छा इस्तेमाल किया। इससे फिक्स्ड-प्राइस्ड प्रोजेक्ट्स की प्रोडक्टिविटी में इम्प्रूवमेंट दिखा। कंपनी को मार्जिन मौजूदा लेवल पर बने रहने का भरोसा है। चौथी तिमाही में कंपनी को 7 नए बड़े ऑर्डर्स मिले।
ग्लोबल इकोनॉमी में अनिश्चितता को देखते हुए विप्रो को इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में रेवेन्यू में 3.5 से 1.5 फीसदी गिरावट का अनुमान है। इस तरह FY26 रेवेन्यू में गिरावट वाला लगातार तीसरा साल हो सकता है। अब यह साफ हो गया है कि प्रदर्शन के लिहाज से विप्रो प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से पिछड़ गई है। अभी स्टॉक की कीमत अट्रैक्टिव दिख रही है। इसके बावजूद रेवेन्यू के मोर्चे पर तस्वीर साफ होने तक निवेश करना ठीक नहीं होगा।
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इस साल 22 फीसदी गिरा है स्टॉक
विप्रो के शेयरों में 17 अप्रैल को बड़ी गिरावट दिखी। विप्रो के शेयर कारोबार के अंत में 4.14 फीसदी गिरकर 237.40 रुपए पर बंद हुए हैं। इस साल यह स्टॉक करीब 22 फीसदी गिरा है। बीते एक साल में इसका रिटर्न सिर्फ 5.50 फीसदी रहा है। हालांकि, इंफोसिस और टीसीएस जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों का प्रदर्शन भी इस दौरान अच्छा नहीं रहा है।