
Motorbike Ambulances: दरअसल, इन इलाकों में घने जंगल और कई घाट पड़ते हैं। दुर्गम इलाका होने की वजह से यहां सड़क भी नहीं है। अस्पताल जाते वक्त बीच रास्ते में कई सारी चट्टाने और नाले बड़ी बाधा है।
Motorbike Ambulances: एम्बुलेंस साइडकार को गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाते वक्त काफी मशक्कत करनी पड़ती है। कई बार तो मोटरसाइकिल को धक्का देना पड़ता है। बाइक का पिछला टायर किचड़ की वजह से एक ही जगह घूमने लगता है।
Motorbike Ambulances: नारायणपुर जिला भारत के सबसे कम आबादी वाले जिलों में से एक है, जिसमें लगभग 139,820 निवासी डेलावेयर से बड़े क्षेत्र में फैले हुए हैं। कई स्थानीय गांव से अच्छी सड़कें 16 किलोमीटर या उससे भी अधिक दूर हैं।
Motorbike Ambulances: अधिकारी और स्वास्थ्य कार्यकर्ता इस बात से सहमत हैं कि गर्भवती महिलाओं के लिए ये बाइक एंबुलेंस की वरदान से कम नहीं है। राज्य की स्वास्थ्य सिस्टम सुदूर जैसे गांवों तक पहुंचने के लिए आज भी संघर्ष कर रही है।
Motorbike Ambulances: कोडोली गांव के निवासी आमतौर पर निकटतम शहर ओरछा तक 20 किलोमीटर पैदल चलकर जाते हैं। इसमें करीब ढाई घंटे का समय लगता है। सड़कों की कमी के कारण अक्सर ग्रामीणों को बहुत बीमार लोगों को लाने-ले जाने के लिए अस्थायी पालकी का सहारा लेना पड़ता है।
Motorbike Ambulances: हालांकि सरकार सड़क नेटवर्क बनाने की कोशिश कर रही है। बाइक एंबुलेंस को पहली बार 2014 में नारायणपुर में तैनात किया गया था। आज, छत्तीसगढ़ के तीन जिलों में 13 बाइक एम्बुलेंस चल रही हैं।
Motorbike Ambulances: हालांकि सरकार सड़क नेटवर्क बनाने की कोशिश कर रही है। बाइक एंबुलेंस को पहली बार 2014 में नारायणपुर में तैनात किया गया था। आज, छत्तीसगढ़ के तीन जिलों में 13 बाइक एम्बुलेंस चल रही हैं।
Motorbike Ambulances: ये बाइक एंबुलेंस माताओं को अस्पताल पहुंचाने और लाने पर ध्यान केंद्रित करती है। तिवारी ने बताया कि कई बार सांप के काटने और अन्य इमरजेंसी स्थितियों में पीड़ितों को ले जाने के लिए भी हमें बुलाया जाता है।