Bangladesh Crisis: कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सोमवार (12 अगस्त) को कहा कि बांग्लादेश की मुक्ति की याद में बनाई गई एक ऐतिहासिक प्रतिमा को "भारत विरोधी उपद्रवियों" ने तोड़ दिया है। थरूर ने टूटी हुई प्रतिमा की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें 1971 के युद्ध के बाद पाकिस्तान के आत्मसमर्पण के पल को दर्शाया गया है। बता दें कि बांग्लादेश में बीते कुछ समय से जारी हिंसा के बीच पड़ोसी देश में सत्ता बदल गई है। शेख हसीना के इस्तीफे और फिर संसद भंग होने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश में अंतरिम सरकार बनी है। नई सरकार की ओर से हिंसा बंद करने की कई अपील के बावजूद देश में अराजकता रुकने का नाम नहीं ले रही है।
तिरुवनंतपुरम के सांसद ने X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, "मुजीबनगर में 1971 के शहीद स्मारक परिसर में स्थित प्रतिमाओं को भारत विरोधी उपद्रवियों द्वारा नष्ट किए जाने की ऐसी तस्वीरें देखना दुखद है।" उन्होंने कहा, "यह भारतीय सांस्कृतिक केंद्र, मंदिरों और कई स्थानों पर हिंदू घरों पर अपमानजनक हमलों के बाद हुआ है, जबकि मुस्लिम नागरिकों द्वारा अन्य अल्पसंख्यक घरों और पूजा स्थलों की रक्षा करने की खबरें भी आई हैं।"
1971 के युद्ध में भारत ने न केवल बांग्लादेश को आजाद कराया, बल्कि पाकिस्तान को भी करारा झटका दिया। इस प्रतिमा में पाकिस्तानी सेना के मेजर जनरल अमीर अब्दुल्ला खान नियाजी द्वारा भारतीय सेना और बांग्लादेश की मुक्ति वाहिनी के समक्ष 'समर्पण के दस्तावेज' पर हस्ताक्षर किए जाने को दर्शाया गया है। मेजर जनरल नियाजी ने अपने 93,000 सैनिकों के साथ भारत के पूर्वी कमान के तत्कालीन जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा सैन्य आत्मसमर्पण था।
बांग्लादेश में 450 की मौत
बांग्लादेश में छात्रों के नेतृत्व में हुए विद्रोह के कारण पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और कई अन्य शीर्ष अधिकारियों को इस्तीफा देना पड़ा है। एक महीने से अधिक समय तक चले घातक विरोध प्रदर्शनों में कम से कम 450 लोग मारे गए, जिसके कारण 5 अगस्त को हसीना को पद छोड़ना पड़ा। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के एक वरिष्ठ सदस्य अमीर खोसरू महमूद चौधरी ने कहा कि हसीना पर हत्या, जबरन गायब किए जाने और भ्रष्टाचार के आरोप हैं। उन्हें कानून का सामना करना चाहिए।
बांग्लादेश में में रहने वाले हिंदुओं पर भी विरोध प्रदर्शन का बहुत बुरा असर पड़ा है, जिन पर हिंदू घरों, मंदिरों और व्यवसायों पर कई हमले हुए हैं। हिंदू मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में सबसे बड़ा अल्पसंख्यक धर्म है। उन्हें हसीना की पार्टी अवामी लीग का समर्थक माना जाता है। हिंसा से प्रभावित देश में अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों को सरकार गिरने के बाद से 52 जिलों में 205 से अधिक हमलों का सामना करना पड़ा है।
शशि थरूर ने नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली नई कार्यवाहक सरकार से कानून और व्यवस्था बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "कुछ आंदोलनकारियों का एजेंडा बिल्कुल स्पष्ट है। यह आवश्यक है कि मुहम्मद यूनुस और उनकी अंतरिम सरकार सभी बांग्लादेशियों, हर धर्म के लोगों के हित में कानून और व्यवस्था बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाए। भारत इस अशांत समय में बांग्लादेश के लोगों के साथ खड़ा है, लेकिन इस तरह की अराजकता को कभी भी माफ नहीं किया जा सकता है।"