Smoking Alert: नए साल के पहले दिन ही स्मोकर्स को लगेगा बड़ा झटका! बंद हो जाएगी यह खास प्रकार की सिगरेट

E-Cigarette: धूम्रपान करना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। सरकारी स्तर पर जागरुकता फैलाने की तमाम कोशिशों के बावजूद महामारी की तरह से इसकी लत तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में सरकार इसे लेकर समय-समय पर दिशा-निर्देश लाती है। हालांकि नशा के कुछ ऐसे विकल्प भी होते हैं जिन पर सरकारी स्तर पर रोक लगी हुई है लेकिन फिर भी ये लोगों को अपने शिकंजे में फंसा रहे हैं

अपडेटेड Dec 30, 2024 पर 12:19 PM
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अभी जो ई-सिगरेट इस्तेमाल हो रही हैं, उसकी शुरुआत चाइनीज फार्मासिस्ट Hon Lik ने वर्ष 2003 में की थी।

E-Cigarette: धूम्रपान करना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। सरकारी स्तर पर जागरुकता फैलाने की तमाम कोशिशों के बावजूद महामारी की तरह से इसकी लत तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में सरकार इसे लेकर समय-समय पर दिशा-निर्देश लाती है। हालांकि नशा के कुछ ऐसे विकल्प भी होते हैं जिन पर सरकारी स्तर पर रोक लगी हुई है लेकिन फिर भी ये लोगों को अपने शिकंजे में फंसा रहे हैं। ऐसा ही एक खतरनाक नशा है ई-सिगरेट का। आइए यहां ई-सिगरेट के बारे में और इससे होने वाले खतरों के बारे में जानते हैं। कुछ देशों में नए साल से इस पर रोक लगने वाली है। अभी जो ई-सिगरेट इस्तेमाल हो रही हैं, उसकी शुरुआत चाइनीज फार्मासिस्ट Hon Lik ने वर्ष 2003 में की थी।

E-Cigarette: क्या है ई-सिगरेट और कितना खतरनाक है यह?

ई-सिगरेट को वेप कहते हैं। यह एक ऐसी डिवाइस है जिसमें पावर सोर्स के लिए बैट्री की तरह एटमाइजर और कार्ट्रिज या टैंक के रूप में एक कंटेनर होता है। इसक यूजर वेपर यानी भाप अपने अंदर खींचते हैं जिसमें निकोटीन और दूसरे रसायन होते हैं। यह भाप एक खास लिक्विड के गर्म होने पर बनती है। ई-लिक्विड में आमतौर पर 95 फीसदी प्रोपिलीन ग्लाईकॉल और ग्लिसरीन होता है और बाकी 5 फीसदी में फ्लेवर, निकोटिन और बाकी एडीटिव्स होते हैं। आमतौर पर यह नॉर्मल स्मोकिंग की तुलना में कम हानिकारक होती है लेकिन होती यह भी नुकसानदेह है।


नए साल में कहां बैन की है तैयारी?

ई-सिगरेट में निकोटीन और खतरनाक रसायन होता है जोकि शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा इसे फेंकने पर प्लास्टिक और बैटरी का कचरा बनता है, जिससे कचरा और प्रदूषण बढ़ता है। ऐसे में बेल्जियम ने नए साल में 1 जनवरी से डिस्पोजेबल ई-सिगरेट पर रोक लगाने का फैसला किया है ताकि बच्चों की सेहत के साथ-साथ पर्यावरण को बचाया जा सके। भारत में बात करें तो ई-सिगरेट पर पूरी तरह रोक है। इसे बनाना, बेचना और रखना गैर-कानूनी है।

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