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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था: झूठे आंकड़ों से भरा बजट, क्या श्रीलंका की राह पर निकल पड़ा पाक?

आज जब पाकिस्तान अपना ख़र्च चलाने के लिए भी जूझ रहा है। ऐसे में साफ तौर पर पता चल रहा है कि वो भी श्रीलंका बनने की राह पर चल पड़ा है। विदेश मुद्रा भंडार काफी नीचे चला गया है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 04, 2022 पर 4:46 PM
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था: झूठे आंकड़ों से भरा बजट, क्या श्रीलंका की राह पर निकल पड़ा पाक?
पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 9 अरब डॉलर से भी नीचे चला गया है।

SUSHANT SAREEN 

विदेशी मुद्रा भंडार 9 अरब डॉलर से भी नीचे चले गए हैं. इसका मतलब ये है कि पाकिस्तान के पास विदेश से सिर्फ़ एक महीने की ज़रूरत का सामान आयात करने लायक़ विदेशी मुद्रा भंडार बचा है; खुले बाज़ार में एक डॉलर अब 216 पाकिस्तानी रुपए (PKR) का मिल रहा है, यानी डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तानी रुपए की क़ीमत पिछले एक साल में 33 प्रतिशत से भी ज़्यादा गिर चुकी है; विदेशी मुद्रा बचाने के लिए पाकिस्तान के बैंकों ने आयातकों को क़र्ज़ देना बंद कर दिया है; तो, विदेशी बैंक तेल के आयात के बदले में 100 फ़ीसद नक़दी की मांग कर रहे हैं।

तेल आयात करने की दिक़्क़तों के चलते, पाकिस्तान की कई तेल रिफ़ाइनरी बंद होने की कगार पर हैं; 10-12 घंटे की बिजली कटौती आम हो चली है, जिसका कारोबार और उद्योगों और उनके साथ निर्यात पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है; पिछले एक महीने में ही पेट्रोल की क़ीमत 84 रुपए (PKR) और डीज़ल के दाम 120 रुपए बढ़ चुके हैं और पूरी आशंका है कि पेट्रोल-डीज़ल अभी और महंगा होगा.

इसकी एक वजह पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाया गया टैक्स कुछ हद तक तेल के बाज़ार का हाल भी है; बिजली सेक्टर का घाटा कम करने के लिए बिजली की दरों में 100 फ़ीसद तक का इज़ाफ़ा होना क़रीब क़रीब तय है; महंगाई आसमान छू रही है और स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों के मुताबिक़, वित्तीय वर्ष 2023 में पाकिस्तान की महंगाई दर में 25 फ़ीसद तक का उछाल आ सकता है; पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक, स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान (SBP) की नीतिगत ब्याज दरें पहले ही बेहद ऊंची यानी 13.75 प्रतिशत हैं.

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