Russia-Ukraine War: रूस-यूक्रेन संघर्ष अब तीसरे विश्व युद्ध की तरफ जाता हुआ दिखाई दे रहा है। रूस ने गुरुवार (21 नवंबर) को यूक्रेन पर जवाबी हमला करने के लिए अपने दक्षिणी अस्त्राखान क्षेत्र से एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) दागी। यह पहली बार है जब मास्को ने युद्ध में इतनी शक्तिशाली और लंबी दूरी की मिसाइल का इस्तेमाल किया है। यह हवाई हमला ऐसे समय में हुआ है जब यूक्रेन ने इस सप्ताह रूसी क्षेत्र में अंदर तक सैन्य ठिकानों पर हमला करने के लिए अमेरिका और ब्रिटेन द्वारा निर्मित मिसाइलों का इस्तेमाल किया।
यूक्रेन के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह मिसाइल हमला पश्चिमी देशों से प्राप्त लंबी दूरी की मिसाइलों द्वारा रूस पर किए गए हमलों के जवाब में हुआ है।पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध और भी बढ़ गया है। यह हमला एक नई रणनीतिक बढ़त को दिखाता है। अपने बयान में यूक्रेनी वायु सेना ने यह नहीं बताया कि मिसाइल में किस तरह का वारहेड था या मॉस्को ने किस तरह की मिसाइल लॉन्च की। इस बात का कोई संकेत नहीं था कि यह परमाणु हथियार से लैस थी।
ICBM एक रणनीतिक हथियार हैं जिन्हें परमाणु हथियार पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है। ये रूस के परमाणु निवारक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में युद्ध छिड़ गया, जब रूस ने कई यूक्रेनी क्षेत्रों पर आक्रमण किया था। इस युद्ध के अब तीन साल पूरा होने वाले हैं।
अधिकारियों ने बताया कि बैलिस्टिक मिसाइल का पहले कभी युद्ध में इस्तेमाल नहीं किया गया था। उन्होंने बताया कि रूस ने यूक्रेन के मध्य शहर द्निप्रो में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया, लेकिन इससे हुए नुकसान का खुलासा करने से इनकार कर दिया।
रूस का यह कदम न केवल यूक्रेन के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी है। इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल पहले केवल परमाणु युद्ध की स्थिति में किया जाता था। इसका लक्ष्य दूर-दूर तक होता है। इस हमले के बाद यूक्रेन ने भी पश्चिमी देशों से और अधिक सैन्य सहायता की मांग की है, ताकि रूस के हमलों का सामना किया जा सके।
जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ रहा है यूक्रेन और रूस के बीच तनाव और बढ़ता जा रहा है। अब यह संघर्ष न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा संकट बन चुका है। इस युद्ध के परिणाम पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। कई देश इसे तीसरा युद्ध मान रहे हैं।