Himachal Pradesh News: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार को बड़ा झटका देते हुए हाई कोर्ट ने हाल ही में हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) के घाटे में चल रहे 18 होटलों को बंद करने का आदेश दिया। जस्टिस अजय मोहन गोयल की सिंगल पीठ ने कहा कि एचपीटीडीसी के ये होटल 25 नवंबर तक बंद कर दिए जाने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि निगम के प्रबंध निदेशक आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। हाई कोर्ट ने इन संपत्तियों को "सफेद हाथी" करार दिया।
पीटीआई के मुताबिक, अदालत ने कहा कि इन होटल को बंद किया जा रहा है, क्योंकि ये वित्तीय रूप से अव्यवहारिक हैं। साथ ही अदालत ने कहा कि एचपीटीडीसी को इन 'सफेद हाथियों' के रखरखाव में सार्वजनिक संसाधनों को बर्बाद नहीं करना चाहिए। बता दें कि 'सफेद हाथी' का इस्तेमाल तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति किसी महंगी चीज का शोक करता है लेकिन उसके रख-रखाव में असमर्थ होता है, तो उस स्थिति के संदर्भ में इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है।
आदेश के अनुसार, पैलेस होटल (चैल), होटल गीतांजलि (डलहौजी), होटल बाघल (दारलाघाट); होटल धौलाधर, होटल कुणाल धर्मशाला और होटल कश्मीर हाउस (धर्मशाला); होटल एप्पल ब्लॉसम (फागू), होटल चंद्रभागा (केलांग), होटल देवदार (खजियार), होटल गिरिगंगा (खड़ापत्थर), होटल मेघदूत (कियारीघाट), होटल सरवन (कुल्लू); होटल लॉग हट्स, होटल हडिम्बा कॉटेज और होटल कुंजुम (मनाली); होटल लिहागसा (मैकलोडगंज), द कैसल (नग्गर) और होटल शिवालिक (परवाणू) इस सोमवार तक बंद कर दिये जाएंगे।
जज ने कहा कि इन होटलों में आने वाले विजिटर्स की संख्या अदालत की अपेक्षा से बहुत अधिक निराशाजनक है, जो दर्शाती है कि एचपीटीडीसी लाभ कमाने के लिए अपनी संपत्तियों का उपयोग करने में सक्षम नहीं है। अदालत ने मंगलवार को अपने आदेश में कहा कि इन संपत्तियों का संचालन जारी रहना राज्य के खजाने पर बोझ के अलावा और कुछ नहीं है।
साथ ही अदालत ने यह भी आदेश दिया कि उल्लिखित संपत्तियों के रखरखाव के लिए आवश्यक कर्मचारियों को परिसर में ही रखा जाए तथा पर्यटन निगम को अपने शेष कर्मचारियों को स्थानांतरित करने की स्वतंत्रता होगी, ताकि अन्य स्थानों पर उसकी आवश्यकता पूरी हो सके। मामले की अगली सुनवाई तीन दिसंबर को होगी।
दिल्ली हिमाचल भवन की बिक्री की भी अनुमति
इस सप्ताह की शुरुआत में हाई कोर्ट ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली सुखविंदर सिंह सुखू सरकार द्वारा लगभग 150 करोड़ रुपये की बिजली बकाया राशि का भुगतान करने में विफल रहने के बाद दिल्ली में हिमाचल भवन को कुर्क करने का आदेश जारी किया। हिमाचल भवन राष्ट्रीय राजधानी के मंडी हाउस में स्थित है।
सरकार जाएगी सुप्रीम कोर्ट
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू ने इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की योजना की घोषणा की है। हालांकि, इस बारे में कोई अपडेट नहीं है कि राज्य अपने ऋण चुकौती को कैसे संबोधित करना चाहता है और अपने खर्चों का प्रबंधन कैसे करना चाहता है। हाई कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि यदि ये होटल वित्तीय रूप से अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं, तो वैकल्पिक कदम उठाए जा सकते हैं।