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मार्शल लॉ लगाने वाले दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पास, सभी शक्तियां निलंबित

South Korea’s President: दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति यून सुक-योल के खिलाफ शनिवार (14 दिसंबर) को महाभियोग प्रस्ताव पास हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण कोरिया की संसद में उनके खिलाफ 204 वोट पड़े, जबकि उनके समर्थन में महज 85 वोट डाले गए। यून ने तीन दिसंबर को देश में मार्शल लॉ लागू करने का आदेश दिया था

Akhileshअपडेटेड Dec 14, 2024 पर 11:07 PM
मार्शल लॉ लगाने वाले दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पास, सभी शक्तियां निलंबित
South Korea’s President: यून ने तीन दिसंबर को देश में मार्शल लॉ लागू करने का आदेश दिया था

South Korea’s President: दक्षिण कोरिया की संसद ने शनिवार (14 दिसंबर) को राष्ट्रपति यून सुक-योल के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित कर दिया। यह फैसला उनके विवादित 3 दिसंबर के मार्शल लॉ के ऐलान के बाद लिया गया है। 204 सांसदों द्वारा पारित इस प्रस्ताव के बाद राष्ट्रपति यून को उनके पद से निलंबित कर दिया गया है। संसद में उनके खिलाफ 204 वोट पड़े, जबकि उनके समर्थन में सिर्फ 85 मत डाले गए। यून ने 3 दिसंबर को देश में मार्शल लॉ लागू करने का आदेश दिया था, जिसके कारण देश में राजनीतिक उथल-पुथल मच गई। अब अधिकारी उनपर लगे विद्रोह के आरोपों की जांच कर रहे हैं।

NBC News की रिपोर्ट के मुताबिक, महाभियोग के पक्ष में 204 और इसके खिलाफ 85 वोट पड़े। अब देश की संवैधानिक अदालत यह निर्णय करेगी कि यून सुक-योल (Yoon Suk Yeol) स्थायी रूप से हटाया जाए या नहीं। इस दौरान प्रधानमंत्री हान डक-सू कार्यवाहक राष्ट्रपति का पद संभालेंगे ताकि सरकार की स्थिरता बनी रहे। संसद के स्पीकर किम जिन-प्यो ने इस राजनीतिक संकट के बीच देश की आर्थिक और विदेशी नीतियों को स्थिर बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "हमें इस महत्वपूर्ण समय में अर्थव्यवस्था और विदेशी संबंधों को स्थिर करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।"

संवैधानिक अदालत पर सभी की नजर

किम जिन-प्यो ने संवैधानिक अदालत में जल्द से जल्द जजों की नियुक्ति की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि महाभियोग प्रस्ताव पर समयबद्ध निर्णय लिया जा सके। अदालत का फैसला आने वाले हफ्तों में देश के राजनीतिक भविष्य को तय करेगा। इस महाभियोग ने दक्षिण कोरिया की लोकतांत्रिक व्यवस्था और शासन पर व्यापक बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम देश की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। अदालत के पास यह तय करने के लिए 180 दिन का समय है कि यून को राष्ट्रपति पद से हटाया जाए या नहीं। अगर उन्हें पद से हटा दिया जाता है, तो 60 दिन में आम चुनाव कराने होंगे।

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