8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग का शुरू हुआ प्रोसेस, कर्मचारियों और पेंशनर्स से मांगे गए सुझाव

8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह आयोग केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों की समीक्षा करेगा। वित्त मंत्रालय ने कर्मचारियों, पेंशनरों, कर्मचारी संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे हैं

अपडेटेड Mar 11, 2026 पर 5:44 PM
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8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी है।

8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह आयोग केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों की समीक्षा करेगा। वित्त मंत्रालय ने कर्मचारियों, पेंशनरों, कर्मचारी संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है, जहां 30 अप्रैल 2026 तक सुझाव भेजे जा सकते हैं।

सरकार ने 3 नवंबर 2025 को आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस जारी किए थे। आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। रिपोर्ट आने और सरकार की मंजूरी के बाद ही वेतन और पेंशन में बदलाव लागू होगा।

कितने लोगों पर पड़ेगा असर


8वें वेतन आयोग की सिफारिशों से देश के करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और लगभग 69 लाख पेंशनर प्रभावित होंगे। अगर आयोग नई सिफारिशें देता है और सरकार उन्हें मंजूर करती है, तो कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में बड़ा बदलाव हो सकता है।

क्या होता है वेतन आयोग

केंद्र सरकार समय-समय पर वेतन आयोग बनाती है। इसका काम सरकारी कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर की समीक्षा करना होता है। आयोग महंगाई, आर्थिक स्थिति और सरकार की वित्तीय क्षमता को ध्यान में रखते हुए सैलरी और भत्तों में बदलाव की सिफारिश करता है। भारत में पहला वेतन आयोग 1946 में बनाया गया था। तब से अब तक 7 वेतन आयोग लागू हो चुके हैं।

7वें वेतन आयोग में क्या हुआ था

7वां वेतन आयोग 2016 में लागू किया गया था। इसके तहत केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये प्रति मंथली तय की गई थी। वहीं अधिकतम बेसिक सैलरी 2.5 लाख रुपये प्रति मंथली रखी गई थी।

समय के साथ कैसे बढ़ी सैलरी

वेतन आयोगों के जरिए सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में लगातार बढ़ोतरी हुई है।

पहला वेतन आयोग (1946-47): न्यूनतम सैलरी 55 रुपये, अधिकतम 2,000 रुपये।

दूसरा वेतन आयोग (1957-59): न्यूनतम 80 रुपये, अधिकतम 3,000 रुपये।

तीसरा वेतन आयोग (1972-73): न्यूनतम 196 रुपये, अधिकतम 3,500 रुपये।

चौथा वेतन आयोग (1986): न्यूनतम 750 रुपये, अधिकतम 8,000 रुपये।

पांचवां वेतन आयोग (1996): न्यूनतम 2,550 रुपये, अधिकतम 26,000 रुपये।

छठा वेतन आयोग (2006): न्यूनतम 7,000 रुपये, अधिकतम 80,000 रुपये।

सातवां वेतन आयोग (2016): न्यूनतम 18,000 रुपये, अधिकतम 2.5 लाख रुपये।

क्या 46,000 रुपये हो सकती है न्यूनतम सैलरी

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग के बाद न्यूनतम सैलरी 40,000 से 46,000 रुपये तक हो सकती है। यह अनुमान फिटमेंट फैक्टर के आधार पर लगाया जा रहा है। फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर होता है, जिससे पुराने वेतन को नए वेतन में बदला जाता है। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि अभी नई सैलरी को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। यह अभी एक लंबा प्रोसेस है। सरकार के अनुसार वेतन बढ़ोतरी तुरंत लागू नहीं होगी। पहले आयोग अपनी रिपोर्ट देगा। इसके बाद सरकार उस पर विचार करेगी और मंजूरी देगी। फिर बजट में इसके लिए प्रावधान किया जाएगा। इसलिए फिलहाल सुझाव लेने की प्रक्रिया पहला कदम है। सैलरी और पेंशन में बदलाव लागू होने में अभी समय लग सकता है।

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