इंजिनियर्स से फाइनेंशियल एनालिस्ट तक... किन नौकरियों को खत्म कर सकता है AI, एंथ्रोपिक की स्टडी में हुआ खुलासा

AI कंपनी एंथ्रोपिक की नई स्टडी में बताया गया है कि आने वाले समय में कई व्हाइट कॉलर नौकरियों के काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संभाल सकता है। प्रोग्रामर से लेकर फाइनेंशियल एनालिस्ट तक कई पेशों में ऑटोमेशन बढ़ने की संभावना है। जानिए कौन सी नौकरियां खत्म हो सकती हैं और कौन सी रहेंगी सेफ।

अपडेटेड Mar 09, 2026 पर 6:50 PM
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एंथ्रोपिक के मुताबिक, जॉब पर AI के असर वाली यह रिसर्च एक तरह की 'अर्ली वॉर्निंग सिस्टम' का हिस्सा है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आने वाले समय में कई व्हाइट कॉलर नौकरियों के काम को संभाल सकता है। AI कंपनी एंथ्रोपिक की एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है। इस रिसर्च में यह समझने की कोशिश की गई है कि मौजूदा AI तकनीक अलग अलग पेशों में किए जाने वाले कामों से कितनी मेल खाती है और किन नौकरियों में ऑटोमेशन ज्यादा बढ़ सकता है।

एंथ्रोपिक के मुताबिक यह रिसर्च एक तरह की 'अर्ली वॉर्निंग सिस्टम' का हिस्सा है। इसका मकसद यह ट्रैक करना है कि आने वाले समय में AI लेबर मार्केट को किस तरह प्रभावित कर सकता है। अलग अलग पेशों में होने वाले काम और AI की क्षमताओं की तुलना करके यह पता लगाने की कोशिश की गई है कि किन नौकरियों में रोजमर्रा के काम का बड़ा हिस्सा AI सिस्टम संभाल सकते हैं।

हालांकि स्टडी में यह भी कहा गया है कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है कि AI की वजह से बड़े पैमाने पर रोजगार कम हो गए हों।


किन नौकरियों पर AI का सबसे ज्यादा असर?

एंथ्रोपिक की स्टडी में पाया गया कि कई ऐसे पेशे हैं जिनमें किए जाने वाले काम आधुनिक AI सिस्टम की क्षमताओं से काफी मेल खाते हैं। यानी इन नौकरियों के अंदर मौजूद कई काम AI की मदद से ऑटोमेट या आसान हो सकते हैं।

नौकरी
AI से प्रभावित होने वाले काम
कंप्यूटर प्रोग्रामर 75 प्रतिशत
कस्टमर सर्विस प्रतिनिधि 70 प्रतिशत
डाटा एंट्री ऑपरेटर 67 प्रतिशत
मेडिकल रिकॉर्ड्स स्पेशलिस्ट 67 प्रतिशत
मार्केट रिसर्च एनालिस्ट और मार्केटिंग स्पेशलिस्ट
65 प्रतिशत
सेल्स प्रतिनिधि 63 प्रतिशत
फाइनेंशियल और इन्वेस्टमेंट एनालिस्ट 57 प्रतिशत
सॉफ्टवेयर क्वालिटी एश्योरेंस एनालिस्ट 52 प्रतिशत
इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी एनालिस्ट 49 प्रतिशत
कंप्यूटर यूजर सपोर्ट स्पेशलिस्ट 47 प्रतिशत

हालांकि, एंथ्रोपिक ने साफ किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि ये पूरी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि इन पेशों के अंदर मौजूद कई काम AI टूल्स की मदद से ऑटोमेट या आसान हो सकते हैं। मिसाल के तौर पर AI प्रोग्रामर्स को कोड लिखने में मदद कर सकता है, एनालिस्ट्स के लिए डाटा प्रोसेसिंग आसान बना सकता है या कस्टमर सर्विस से जुड़े सामान्य सवालों के जवाब दे सकता है।

क्या AI की वजह से नौकरियां कम हो रही हैं?

स्टडी में कहा गया है कि फिलहाल ऐसा कोई साफ सबूत नहीं है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से उद्योगों में रोजगार का स्तर कम हो गया है। हालांकि रिसर्चर्स ने कुछ शुरुआती संकेत जरूर देखे हैं। जिन नौकरियों में AI टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, वहां नई भर्तियों की रफ्तार धीमी हो रही है।

स्टडी के मुताबिक जिन पेशों में AI का असर ज्यादा है, उनमें आने वाले दशक में रोजगार की वृद्धि भी धीमी रह सकती है। एंथ्रोपिक का कहना है कि AI पूरी नौकरियों को खत्म करने के बजाय काम करने के तरीके को ज्यादा बदलने वाला है।

किन नौकरियों को AI से कम खतरा

स्टडी में यह भी पाया गया कि जिन कामों में शारीरिक कौशल या आमने सामने की बातचीत की जरूरत होती है, वे ऑटोमेशन से कम प्रभावित होते हैं।

इनमें कुक, बारटेंडर, लाइफगार्ड, मोटरसाइकिल मैकेनिक और ग्राउंड्सकीपर जैसे पेशे शामिल हैं। इन नौकरियों में शारीरिक गतिविधि, वास्तविक परिस्थितियों में फैसला लेने की क्षमता और इंसानी संपर्क की जरूरत होती है, जिन्हें मौजूदा AI सिस्टम आसानी से नहीं दोहरा सकते।

AI के असर को समझना क्यों जरूरी

एंथ्रोपिक के शोधकर्ताओं का कहना है कि जैसे जैसे AI तकनीक तेजी से विकसित हो रही है, वैसे वैसे इसके असर और सीमाओं को समझना बेहद जरूरी होगा।

कर्मचारियों, कंपनियों और नीति निर्माताओं के लिए यह समझना महत्वपूर्ण होगा कि AI किन कामों को बदल सकता है और किन क्षेत्रों में इंसानी कौशल की भूमिका अभी भी अहम बनी रहेगी।

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