प्रॉपर्टी की कीमतें साल 2022 में 6 फीसदी बढ़ीं। साल 2021 में प्रॉपर्टी की औसत कीमत 5,826 रुपये प्रति वर्ग फीट थी। यह साल 2022 में बढ़कर 6,150 रुपये प्रति वर्ग फीट हो गई। बेंगुलरु और हैदराबाद में पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा 10 फीसदी वृद्धि देखने को मिली। Anarock Research के एनालिसिस से यह जानकारी मिली है। इस एनालिसिस में एनसीआर, कोलकाता, MMR, हैदराबाद, चेन्नई और बेंगलुरु को शामिल किया गया। RBI इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी पर ब्रेक लगा सकता है, जिससे आने वाले दिनों में घरों की मांग अच्छी बने रहने की उम्मीद है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए भी अच्छा मौका
रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2023 में घरों की मांग ऐसे ग्राहकों की तरफ से ज्यादा रहने की उम्मीद है, जो खुद के इस्तेमाल के लिए घर खरीदना चाहते हैं। लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स के लिए भी बाजार की स्थितियां अनुकूल दिखाई देती हैं। बड़े शहरों में घरों की कीमतें और 5-8 फीसदी बढ़ने की उम्मीद दिखती है। यह उन निवेशकों के लिए अच्छा है, जो घरों की कीमतें बढ़ने की कआस लगाए बैठे हैं। लेकिन, इससे रेंटल डिमांड भी बढ़ेगी।
पांच साल में औसत वृद्धि 7 फीसदी रही
अभी सबसे बड़े 7 शहरों में औसत कीमत करीब 6,150 रुपये है। इससे पता चलता है कि पिछले पांच साल में औसत वृद्धि 11 फीसदी से ज्यादा रही है। 2018 में औसत कीमत 5,551 रुपये प्रति वर्ग फीट थी, जो 2022 में बढ़कर 6,150 रुपये हो गई। साल 2022 में सबसे ज्यादा 6 फीसदी की सालाना वृद्धि देखने को मिली। इससे पहले के पांच साल में कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ था या अधिकतम 3-4 फीसदी इजाफा हुआ था।
बेंगलुरु और हैदराबाद में सबसे ंज्यादा उछाल
कोरोना की महामारी शुरू होने से पहले कई शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें सीमित दायरे में बनी हुई थीं। इसकी वजह लंबे से जारी डिमांड में सुस्ती थी। पिछले पांच साल में बेंगलुरु और हैदराबाद में सबसे ज्यादा 10 फीसदी वृद्धि देखने को मिली। 2018 में बेंगलुरु में औसत कीमत 4,894 रुपये प्रति वर्ग फीट थी। यह 2022 में बढ़कर 5,570 रुपये प्रति वर्ग फीट हो गई। हैदराबाद में औसत कीमत 2018 में 4,128 रुपये थी, जो 2022 में बढ़कर 4,620 रुपये प्रति वर्ग फीट हो गई।
घरों की रेंटल यील्ड में भी इजाफा
2019 के मुकाबले 2020 में अधिकतर शहरों में रेंटल यील्ड में गिरावट देखने को मिली। इसकी वजह कोरोना की महामारी और वर्क फ्रॉम होम पर ज्यादा जोर था। 2021 में कई शहरों में रेंटल यील्ड में उछाल आया, जिससे यह 2019 के स्तर के करीब पहुंच गया। लेकिन, 2022 में रेंटल यील्ड में उछाल देखने को मिला। इससे टॉप 7 शहरों में रेंटल यील्ड कोविड से पहले के लेवल पर पहुंच गई। इसकी वजह यह है कि पिछले साल ऑफिसेज और स्कूल-कॉलेज पूरी तरह खुलने शुरू हो गए।