सैलरी इंक्रीमेंट सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन कई मिडिल क्लास परिवारों के पर्चेंजिंग पावर में इससे इजाफा नहीं हुआ है। इसकी वजह इनफ्लेशन है। इससे कॉस्ट ऑफ लिविंग, हेल्थकेयर, एजुकेशन और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो गई हैं। कई टैक्सपेयर्स 30 फीसदी टैक्स ब्रैकेट में आ गए हैं, जबकि खर्च करने की उनकी क्षमता नहीं बढ़ी है। सैलरीड टैक्सपेयर्स का मानना है कि टैक्स स्लैब में वृद्धि इनफ्लेशन से लिंक्ड होनी चाहिए। इससे टैक्सपेयर्स को लिविंग कॉस्ट के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा।
