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Daily Voice:मुझे आश्चर्य नहीं होगा अगर सरकार IPO के लिए LIC का मूल्यांकन 19-23 लाख करोड़ रुपये रखे: नितिन भसीन

इस बात की पूरी संभावना है कि कैलेंडर ईयर 2022 की पहली छमाही में एफआईआई नेट सेलर बने रहेंगे। इस बिकवाली की वजह यह है कि भारतीय इक्विटी बाजार में इक्विटी रिस्क प्रीमियम दूसरे उबरते बाजारों की तुलना में काफी ज्यादा हो गया है.

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 17, 2022 पर 12:44 PM
Daily Voice:मुझे आश्चर्य नहीं होगा अगर सरकार IPO के लिए LIC का मूल्यांकन 19-23 लाख करोड़ रुपये रखे: नितिन भसीन
आनेवाले समय में ग्लोबल ऑयल इन्वेंटरी घटने और जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी कायम नजर आएगी

Ambit Capital के नितिन भसीन ने मनीकंट्रोल के साथ इक्विटी मार्केट, देश की इकोनॉमी, एलआईसी के आईपीओ जैसे मुद्दों पर व्यापक बातचीत की । इस बातचीत में उन्होंने कहा कि बैंकों (खासकर प्राइवेट बैंकों को ) कोरोना के बाद रिओपनिंग के दौर में हायर यील्ड, हाउसिंग मार्केट में मजबूती और रियल एस्टेट में आ रही रिकवरी से फायदा होने की उम्मीद है। अगले 12-18 महीनों में एनपीए से निपटने के लिए बैंकों की तरफ से की जा रही प्रोविजनिंग में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है ।जिससे बैंकों की आय में जोरदार बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। गौरतलब है कि नितिन भसीन को इक्विटी रिसर्च का 14 साल से ज्यादा का अनुभव है।

एलआईसी के आईपीओ पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस समय दलाल स्ट्रीट में एलआईसी के आईपीओ को लेकर भारी गहमागहमी है। एलआईसी को भारत में तमाम प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल है। हालांकि हाल के दिनों में इसकी कुछ बाजार हिस्सेदारी प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों की तरफ जाती दिखी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनको यह देखकर आश्चर्य नहीं होगा कि सरकार इस आईपीओ के लिए एलआईसी का मुल्याकांन 19-23 लाख करोड़ रुपये रखे।

उन्होंने आगे कहा कि एलआईसी के लक्षित वैल्यूएशन से इस बात के संकेत मिलते है कि मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से यह सबसे बड़ा आईपीओ होगा।

यूक्रेन-रूस के बीच के तनाव के साथ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य 2022 से ही कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। हाल के दिनों में रशिया -यूक्रेन तनाव के कारण इसकी कीमतों में और बढ़ोतरी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों के बारे में भविष्यवाणी करना बहुत ही मुश्किल काम है। उम्मीद है कि आनेवाले समय में ग्लोबल ऑयल इन्वेंटरी घटने और जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी कायम नजर आएगी।

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