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क्रिप्टो जैसे डिजिटल एसेट्स में निवेश किया है? जानिए बच्चों को उसका मालिकाना हक ट्रांसफर करने का क्या प्रोसेस है

डिजिटल एसेट्स को फिजिकल एसेट्स की तरह सुरक्षित रखना जरूरी है। इसे आम तौर पर स्पेशियलाइज्ड वॉलेट्स पर स्टोर किया जाता है। फिर प्राइवेट की की मदद से इसे एक्सेस किया जा सकता है। निवेशक अगर डिजिटल एसेट्स का मालिकाना हक अपने बच्चों को ट्रांसफर करना चाहता है तो यह बहुत मुश्किल है

MoneyControl Newsअपडेटेड May 20, 2024 पर 4:45 PM
क्रिप्टो जैसे डिजिटल एसेट्स में निवेश किया है? जानिए बच्चों को उसका मालिकाना हक ट्रांसफर करने का क्या प्रोसेस है
रेगुलेटेड कस्टोडियंस डिजिटल एसेट्स का मालिकाना हक व्यक्ति के उत्तराधिकारी को ट्रांसफर करने में मदद करते हैं।

डिजिटल एसेट्स को सुरक्षित रखना उतना ही जरूरी है जितना कैश को सुरक्षित रखना। लेकिन, डिजिटल एसेट्स को स्पेशियलाइज्ड वॉलेट्स पर स्टोर करने के लिए साइनिंग प्रोसेस जरूरी होता है। इसमें प्राइवेट की का इस्तेमाल होता है। इससे मामला थोड़ा जटिल हो जाता है। प्राइवेट की का मतलब लंबे अल्फान्यूमेरिक कोड से है, जो पासवर्ड का काम करता है। यह क्रिप्टो ट्रांजेक्शन के लिए अथॉराइज करता है। प्राइवेट की को डिजिटल डिवाइस या क्लाउड पर रखना आसान नहीं है। इसके लिए कुछ सेफगार्ड्स और प्रोटोकॉल की जरूरत पड़ती है।

कस्टडी प्रोवाइडर्स डिजिटल एसेट्स को स्टोर करने में मदद करते हैं

स्टोरेज में डिजिटल एसेट्स (Digital Assets) का अमाउंट बढ़ने पर जटिलता कई गुना बढ़ जाती है। यही वजह है कि कई बड़े कस्टडी प्रोवाइडर्स मार्केट्स में आ गए हैं, जो इनवेस्टर्स को प्राइवेट की (Private Key) सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। अगर दूसरे यूजर्स को प्राइवेट की के इस्तेमाल के लिए अथॉराइज करना है तो इसका प्रोसेस बहुत जटिल है। इसमें कानूनी प्रक्रिया भी शामिल है। दूसरा बड़ा चैलेंज सक्सेशन प्लानिंग है।

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