डिजिटल एसेट्स को सुरक्षित रखना उतना ही जरूरी है जितना कैश को सुरक्षित रखना। लेकिन, डिजिटल एसेट्स को स्पेशियलाइज्ड वॉलेट्स पर स्टोर करने के लिए साइनिंग प्रोसेस जरूरी होता है। इसमें प्राइवेट की का इस्तेमाल होता है। इससे मामला थोड़ा जटिल हो जाता है। प्राइवेट की का मतलब लंबे अल्फान्यूमेरिक कोड से है, जो पासवर्ड का काम करता है। यह क्रिप्टो ट्रांजेक्शन के लिए अथॉराइज करता है। प्राइवेट की को डिजिटल डिवाइस या क्लाउड पर रखना आसान नहीं है। इसके लिए कुछ सेफगार्ड्स और प्रोटोकॉल की जरूरत पड़ती है।
