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एस्टेट प्लानिंग में इन 6 बातों का जरूर रखें ध्यान, बाद में नहीं आएगी कोई दिक्कत

कई सीनियर सिटीजंस अपने एस्टेट प्लान को सीक्रेट बनाए रखना चाहते हैं। उन्हें यह डर रहता है कि इसके बारे में पता लगने पर परिवार की शांति को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए परिवार के सदस्यों को एस्टेट प्लान के बारे में बताना बहुत जरूरी है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 06, 2023 पर 5:37 PM
एस्टेट प्लानिंग में इन 6 बातों का जरूर रखें ध्यान, बाद में नहीं आएगी कोई दिक्कत
यह देखा गया है कि अक्सर सीनियर सिटीजंस अपने बैंक अकाउंट्स और दूसरे सिक्योरिटीज के लिए नॉमिनी तय नहीं करते हैं। ऐसे में सीनियर सिटीजंस के उत्तराधिकारी के लिए उस पर दावा पेश करना मुश्किल हो जाता है। इससे कई तरह की कानूनी दिक्कतें भी पैदा होती हैं।

एस्टेट प्लानिंग (Estate Planning) मुश्किल काम है। सीनियर सिटीजंस के लिए यह और मुश्किल हो जाता है। एस्टेट प्लान का डॉक्युमेंट स्पष्ट होने पर परिवार में विवाद की संभावना नहीं रह जाती है। इससे परिवार के सदस्यों के बीच शांति और स्नेह बना रहता है। यह देखने में आया है कि कुछ गलतियों की वजह से एस्टेट प्लानिंग में दिक्कत आती है। मनीकंट्रोल ने एस्टेट प्लानिंग में सीनियर सिटीजंस की तरफ से होने वाली आम गलतियों की पहचान की है। अगर आप एस्टेट प्लानिंग करना चाहते हैं तो आपको इन गलतियों से दूर रहना होगा। इससे आगे दिक्कत नहीं आएगी।

  • कम्युनिकेशन का अभाव
  • कई सीनियर सिटीजंस अपने एस्टेट प्लान को सीक्रेट बनाए रखना चाहते हैं। उन्हें यह डर रहता है कि इसके बारे में पता लगने पर परिवार की शांति को नुकसान पहुंच सकता है। सैंक्टम वेल्थ की स्नेहा मखीजा ने कहा, "ऐसा करने से परिवार के सदस्य अंधेरे में रहते हैं। ऐसे में उनके पास इंटेस्टेट सक्सेशन लॉज को मानने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं रह जाता है।" इसलिए परिवार के सदस्यों को एस्टेट प्लान के बारे में बताना बहुत जरूरी है। एक एग्जिक्यूटर को नियुक्त किया जा सकता है। उसे आपको अपने एस्टेट प्लान के बारे में बताना होगा।

    2. अस्पष्ट ट्रस्ट डीड की ड्राफ्टिंग

    सीनियर सिटीजंस अपने एसेट्स की सुरक्षा के लिए उसे ट्रस्ट में रख सकते हैं। एसेट्स के लिए ट्रस्ट बनाने के बाद उन सभी लाभार्थियों की लिस्ट बनाई जा सकती है, जिन्हें सीनिटर सिटीजन के निधन के बाद एसेट्स में हिस्सेदारी मिलने वाली है। एसेट्स में उनके हिस्से का स्पष्ट उल्लेख होना जरूरी है। डीएसके लीगल के पार्टनर हेमंग पारेख ने कहा, "ट्रस्ट डीड का क्लियर होना जरूरी है। इसमें क्लाइंट की मंशा स्पष्ट रूप से पता चलनी चाहिए। इसकी लैंग्वेज जटिल नहीं होनी चाहिए।"

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