Gold Rate: यह 1983 के बाद गोल्ड के लिए सबसे खराब हफ्ता, क्या आपको इनवेस्ट करना चाहिए?

28 फरवरी को मध्यपूर्व में लड़ाई शुरू होने के बाद से गोल्ड और सिल्वर में नरमी देखने को मिली है। इसमें अमेरिकी बॉन्ड्स यील्ड में उछाल और अमेरिकी डॉलर में मजबूती का हाथ है। डॉलर में मजबूती से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है

अपडेटेड Mar 21, 2026 पर 1:38 PM
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हालिया गिरावट के बावजूद इस साल गोल्ड की कीमतें करीब 5 फीसदी ऊपर हैं।

गोल्ड के लिए यह 1983 के बाद सबसे खराब हफ्ता है। हफ्ते के आखिरी दिन डॉलर और बॉन्ड यील्ड में उछाल से गोल्ड में 2.1 फीसदी की गिरावट आई। इस खबर का असर कई एसेट्स पर पड़ा कि अमेरिका मध्यपूर्व में तीन युद्धपोत और हजारों सैनिक भेज रहा है। उधर, ट्रेडर्स को अब अक्तूबर तक अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि मध्यपूर्व की लड़ाई की वजह से दुनिया में इनफ्लेशन बढ़ने का डर है।

मध्यपूर्व में लड़ाई शुरू होने के बाद से गिर रहा गोल्ड

आम तौर पर सोने को निवेश के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है। लेकिन, 28 फरवरी को मध्यपूर्व में लड़ाई शुरू होने के बाद से गोल्ड और सिल्वर में नरमी देखने को मिली है। इसमें अमेरिकी बॉन्ड्स यील्ड में उछाल और अमेरिकी डॉलर में मजबूती का हाथ है। डॉलर में मजबूती से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इससे सोने की चमक फीकी पड़ जाती है।


2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद 8 महीने तक गिरा था गोल्ड

मध्यपूर्व में गिरावट शुरू होने के बाद से गोल्ड में जिस तरह की गिरावट है, उससे 2022 की याद ताजा हो जाती है। तब यूक्रेन पर रूस के हमले से एनर्जी की कीमतों में उछाल आया था। इसका असर दुनियाभर के मार्केट पर पड़ा था। 2022 में अक्तूबर तक बुलियन की कीमतों में गिरावट दिखी थी। यह गोल्ड में गिरावट का सबसे लंबा सिलसिला था। सोने और चांदी में गिरावट का असर गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ पर भी पड़ रहा है। लगातार तीसरे हफ्ते बुलियन ईटीएफ से निवेशकों ने पैसे निकाले हैं।

हालिया गिरावट के बावजूद इस साल गोल्ड 5% ऊपर

हालिया गिरावट के बावजूद इस साल गोल्ड की कीमतें करीब 5 फीसदी ऊपर हैं। इस साल जनवरी के आखिर में सोने की कीमतें 5,600 डॉलर प्रति बैरल की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। इसमें इनवेस्टर्स की दिलचस्पी, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और अमेरिका में फेडरल रिजर्व की आजादी पर लटकती तलवार का हाथ था।

फिलहाल गोल्ड में उतार-चढ़ाव जारी रहने के आसार

कमोडिटी एनालिस्ट अनुज गुप्ता ने कहा कि मध्यपूर्व में लड़ाई शुरू होने के बाद से गोल्ड की कीमतों का ट्रेंड सुस्त से लेकर निगेटिव रहा है। इसकी बड़ी वजह मध्यपूर्व की लड़ाई की वजह से इनफ्लेशन बढ़ने का डर है। आगे दुनिया के केंद्रीय बैंकों के लिए इनफ्लेशन को काबू में करना काफी मुश्किल हो सकता है। इससे वे इंटरेस्ट रेट बढ़ाने को मजबूर हो सकते हैं। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर गोल्ड की चमक फीकी पड़ जाती है, क्योंकि गोल्ड पर किसी तरह का इंटरेस्ट नहीं मिलता है। ऐसे में फिलहाल गोल्ड में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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क्या आपको निवेश करना चाहिए?

जेपी मॉर्गन चेज एंड कंपनी के पूर्व ट्रेडर रॉबर्ट गोटलीएब ने कहा, "अभी गिरावट पर गोल्ड नहीं खरीदें। अभी कीमतों में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव है। जब तक सोने में उतार-चढ़ाव कम नहीं हो जाता और कीमतों में कंसॉलिडेशन शुरू नहीं हो जाता, इसमें बिकवाली जारी रह सकती है।" गोल्ड और सिल्वर में आई गिरावट ने कीमती मेटल्स के निवेशकों को निराश किया है।

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