Gold Silver Price: सोना ₹85000 से भी सस्ता होगा? अमेरिका ईरान वॉर के बावजूद नहीं बढ़ीं कीमतें, क्या और क्रैश होंगे गोल्ड-सिल्वर
Gold Silver Rate: अमेरिका ईरान वॉर के बाद भी सोने-चांदी की कीमतें बढ़ने की जगह लगातार घट रही है। आखिर क्यों इस बार सोने-चांदी ने उल्टा ट्रेंड दिखाया है? निवेशकों के मन में यही सवाल है कि कब चांदी 4 लाख और गोल्ड 1.90 लाख रुपये के पार जाएगा? या सोना 85000 रुपये और चांदी 1 लाख रुपये के स्तर पर आएगा
Gold Silver Rate: सोना 85000 रुपये और चांदी 1 लाख रुपये के स्तर पर आएगा?
Gold Silver Rate: सोने-चांदी के मामले में हमेशा यह देखा गया है कि वॉर के समय इनकी कीमतें आसमान छूने लगती है। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि अमेरिका ईरान वॉर के बाद भी सोने-चांदी की कीमतें बढ़ने की जगह लगातार घट रही है। सोना-चांदी जनवरी के अंत में जहां पीक पर था। अब बड़ा करेक्शन आ चुका है। इसने निवेशको, एक्सपर्ट और आम लोगों को भी चौंका दिया है। आखिर क्यों इस बार सोने-चांदी ने उल्टा ट्रेंड दिखाया है? निवेशकों के मन में यही सवाल है कि कब फिर चांदी 4 लाख और गोल्ड 1.90 लाख रुपये के पार जाएगा? या सोना 85000 रुपये और चांदी 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आएगा?
वैश्विक अनिश्चितता के समय सोने-चांदी को हमेशा सेफ हेवन माना गया है। आमतौर पर वॉर, आर्थिक संकट या राजनीतिक तनाव के दौरान इनकी कीमतें बढ़ती हैं। लेकिन इस बार तस्वीर अलग नजर आ रही है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई है।
साल 2025 में सोना और चांदी ने जबरदस्त रिटर्न दिया था। चांदी की कीमतों में 165% से ज्यादा उछाल आया। वहीं, सोना करीब 75% तक चढ़ा। यह तेजी 2026 की शुरुआत में भी जारी रही। जनवरी 2026 में सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस और चांदी 121 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। निवेशकों और सेंट्रल बैंकों ने बड़े पैमाने पर इन मेटल में निवेश किया, जिससे कीमतें लगातार ऊपर जाती रहीं।
जंग शुरू होते ही बदला ट्रेंड
जैसे ही पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा, शुरुआत में सोना और चांदी की कीमतों में हल्की तेजी आई। लेकिन यह तेजी ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। कुछ ही हफ्तों में दोनों मेटल की कीमतों में गिरावट शुरू हो गई।
वॉर के बाद लगातर गिरा सोना-चांदी
वॉर के बाद से सोना 10% से ज्यादा गिर चुका है। चांदी में 22% से अधिक की गिरावट आई है। अगर उच्चतम स्तर से तुलना करें तो सोना करीब 16% नीचे आ चुका है। यानी, लगभग 4,680 डॉलर प्रति औंस और चांदी 35% तक गिरकर करीब 74 डॉलर प्रति औंस रह गई है।
आखिर क्यों गिर रहे हैं सोना-चांदी?
1. मजबूत डॉलर बना सबसे बड़ा कारण
एक्सपर्ट का कहना है कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है। वॉर के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ी, जिससे निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर डॉलर की ओर शिफ्ट हो गए। जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना और चांदी महंगे हो जाते हैं, जिससे अन्य देशों के निवेशकों की मांग घट जाती है। डिमांड घटने का असर कीमतों पर दिखा है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
संघर्ष के कारण कच्चे तेल की सप्लाई पर भी असर पड़ा। खासकर ईरान और होर्मुज से जुड़े जोखिमों के कारण। इससे तेल की कीमतें बढ़ीं और महंगाई का खतरा बढ़ गया। महंगाई बढ़ने पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरें कम नहीं करते, बल्कि उन्हें ऊंचा बनाए रखते हैं।
3. ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका
जब ब्याज दरें ज्यादा होती हैं, तो निवेशक सोना-चांदी से पैसा निकालकर बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों में लगाते हैं। इससे बुलियन सोना-चांदी पर दबाव बढ़ता है।
4. बॉन्ड यील्ड में तेजी
अमेरिका के सरकारी बॉन्ड (Treasuries) पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ गया है। ऐसे में निवेशकों को बिना जोखिम के अच्छा रिटर्न मिल रहा है, जिससे सोना-चांदी का आकर्षण कम हो गया है।
5. चांदी पर इंडस्ट्रियल डिमांड का असर
चांदी केवल निवेश का ऑप्शन नहीं है, बल्कि इसका बड़ा हिस्सा इंडस्ट्री में इस्तेमाल होता है। करीब 60% चांदी की मांग इंडस्ट्रियल सेक्टर से आती है, जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर आदि। जंग के कारण जब इंडस्ट्री की रफ्तार धीमी होती है, तो चांदी की मांग भी घट जाती है। यही वजह है कि चांदी में सोने से ज्यादा गिरावट देखी गई।
6. सेंट्रल बैंकों की सेल
कुछ देशों खासकर रूस और तुर्की ने अपनी करेंसी को स्थिर करने के लिए सोने के भंडार को बेचा है। इससे बाजार में सप्लाई बढ़ी और कीमतों पर दबाव आया।
7. निवेशकों की मुनाफावसूली
2025 में जबरदस्त तेजी के बाद कई निवेशकों ने मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया है। बड़े पैमाने पर बिकवाली (Profit Booking) और शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के बाहर निकलने से कीमतों में और गिरावट आई है।
क्या कहता है इतिहास?
इतिहास बताता है कि किसी भी वॉर की शुरुआत में सोना-चांदी की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन जैसे-जैसे संघर्ष लंबा खिंचता है, बाजार उसे प्राइस इन कर लेता है और कीमतें स्थिर या नीचे आने लगती हैं। जैसे 2022 में रूस-यूक्रेन वॉर के दौरान शुरुआती हफ्ते में सोना बढ़ा, लेकिन बाद में ठंडा पड़ गया। साल 2025 के भारत-पाकिस्तान तनाव में भी कीमतों पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।
आगे क्या होगा?
एक्सपर्ट का मानना है कि जब तक महंगाई कम नहीं होती, ब्याज दरों में कटौती नहीं होती, डॉलर कमजोर नहीं पड़ता, तब तक सोना और चांदी में बड़ी तेजी लौटना मुश्किल है। हालांकि, बीच-बीच में गिरावट देखने को मिल सकती है।