Gold Silver Price: सोना $5000 के पार, चांदी ने छुआ $110 का लेवल; जानिए किस वजह से आई ऐतिहासिक तेजी

Gold Silver Price: सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,000 डॉलर के पार और चांदी 110 डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है। एक्सपर्ट से जानिए कि दोनों कीमती धातुओं में किस वजह ऐतिहासिक तेजी देखने को मिल रही है और आगे का रुख कैसा रहने वाला है।

अपडेटेड Jan 26, 2026 पर 7:56 PM
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सोने की कीमत 1.5% से अधिक उछलकर $5,000 प्रति औंस के ऊपर निकल गई।

Gold Silver Price: ग्लोबल मार्केट में सोमवार, 26 जनवरी को सोना और चांदी दोनों ने नया रिकॉर्ड हाई बना लिया। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और पॉलिसी अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया, जिससे कीमती धातुओं में जोरदार तेजी देखने को मिली।

सोने की कीमत 1.5% से अधिक उछलकर $5,000 प्रति औंस के ऊपर निकल गई। वहीं, चांदी ने भी जबरदस्त छलांग लगाते हुए $110.88 प्रति औंस का नया ऑल-टाइम हाई छू लिया। चांदी में एक दिन में 6% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई।

सोने में ऐतिहासिक तेजी की वजह


सोने में यह तेजी कई बड़े फैक्टर्स का नतीजा है। यूक्रेन और गाजा में जारी संघर्ष, वेनेजुएला पर अमेरिका की नया एक्शन और दुनिया भर में बढ़ती जियोपॉलिटिकल टेंशन ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को कमजोर किया है।

इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी ने भी बाजारों में अनिश्चितता बढ़ाई है। कनाडा पर 100% टैरिफ लगाने की धमकी जैसे बयानों ने ग्लोबल ट्रेड को लेकर चिंता और गहरा दी है।

मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर्स ने भी दी मजबूती

भू-राजनीतिक तनाव के साथ बड़े मैक्रो फैक्टर्स भी सोने और चांदी को सपोर्ट कर रहे हैं। महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ है। सेंट्रल बैंक लगातार खरीदारी कर रहे हैं। इस साल अमेरिकी फेड से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है। इन वजहों से कीमती धातुओं को मजबूत आधार मिला है।

इन हालात में जब शेयर और बॉन्ड जैसे पारंपरिक एसेट्स भरोसेमंद नहीं लगते, तब निवेशक सुरक्षित विकल्प तलाशते हैं। सोना और चांदी की वैल्यू ऐसे समय में बेहतर तरीके से बनी रहती है। इसी वजह से इन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है।

सोना बना ‘जियोपॉलिटिकल इंश्योरेंस’

आनंद राठी के मुताबिक, सोना और चांदी में आई मौजूदा तेजी कोई शॉर्ट टर्म मूव नहीं है। यह ग्लोबल इकोनॉमिक सिस्टम में हो रहे बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है। अब आर्थिक फैसले सिर्फ एफिशिएंसी के आधार पर नहीं हो रहे हैं। इनमें पावर पॉलिटिक्स की भूमिका ज्यादा हो गई है। ट्रेड सैंक्शन, टेक्नोलॉजी पर पाबंदियां और एनर्जी सिक्योरिटी जैसे मुद्दे अब खुले ग्लोबल कैपिटल फ्लो की जगह ले चुके हैं।

आनंद राठी का कहना है कि सोना अब सिर्फ महंगाई से बचाव का जरिया नहीं रहा। अनिश्चित और अस्थिर दुनिया में यह एक तरह का 'जियोपॉलिटिकल इंश्योरेंस' बन गया है। लगातार बढ़ते फिस्कल डेफिसिट और सेंट्रल बैंकों की आक्रामक बैलेंस शीट एक्सपैंशन से फिएट करेंसी पर भरोसा कमजोर हुआ है। इसी वजह से सोने की अहमियत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

सेंट्रल बैंकों की खरीद ने बढ़ाया भरोसा

2010 के बाद से सेंट्रल बैंकों की सोने की खरीद लगातार मजबूत बनी हुई है। 2018 के बाद इसमें तेजी आई और 2022 के बाद यह ट्रेंड और ज्यादा मजबूत हो गया। अब रिजर्व मैनेजर्स डॉलर और यूरो पर निर्भरता कम कर रहे हैं। वे अपने रिजर्व को ज्यादा सुरक्षित और डायवर्सिफाई करना चाहते हैं। इसकी बड़ी वजह करेंसी कंसन्ट्रेशन और रिजर्व को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाने का डर है।

सोने की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसमें कोई काउंटरपार्टी रिस्क नहीं होता। यह किसी एक देश या पेमेंट सिस्टम के कंट्रोल में नहीं रहता। इसी वजह से सेंट्रल बैंकों का भरोसा सोने पर लगातार बढ़ रहा है।

बाजार गिरने पर सोना कैसे करता है मदद

लॉन्ग टर्म डेटा बताता है कि जब बाजारों में तेज गिरावट आती है, तब सोने का इक्विटी से कोरिलेशन कम या नेगेटिव रहता है। हालांकि इक्विटी लंबे समय में बेहतर रिटर्न देती है, लेकिन अस्थिरता के दौर में सोना पोर्टफोलियो को बैलेंस देने का काम करता है। इसी वजह से सोना ट्रेडिंग से ज्यादा स्ट्रैटेजिक एलोकेशन माना जाता है।

सोने से अलग है चांदी की कहानी

आनंद राठी के मुताबिक, चांदी को सोने की तरह नहीं देखना चाहिए। चांदी एक हाइब्रिड एसेट है। यह आंशिक रूप से मौद्रिक धातु है और आंशिक रूप से इंडस्ट्रियल कमोडिटी भी है। इसी वजह से चांदी में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहता है। इसकी चाल सीधे तौर पर इकोनॉमिक साइकिल से जुड़ी होती है।

दुनिया की करीब 60 प्रतिशत चांदी कॉपर, जिंक और लेड जैसी बेस मेटल माइनिंग से बाय-प्रोडक्ट के तौर पर निकलती है। इस कारण चांदी की सप्लाई बहुत ज्यादा लचीली नहीं होती। जब इकोनॉमी में तेजी या रिफ्लेशन का माहौल बनता है, तो इसी वजह से चांदी की कीमतों में तेज और अचानक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।

आगे चांदी की चाल किस पर निर्भर करेगी

हालिया तेजी गिरती रियल ब्याज दरों और रिफ्लेशन की उम्मीदों का नतीजा है। यह सोने के मुकाबले लंबे समय से कमजोर प्रदर्शन के बाद आई कैच-अप रैली भी है। ब्रोकरेज का मानना है कि यह कैच-अप फेज अब काफी हद तक पूरा हो चुका है।

आगे चांदी की चाल इंडस्ट्रियल डिमांड तय करेगी। सोलर पावर, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और इलेक्ट्रिफिकेशन जैसे सेक्टर इसके सबसे बड़े ड्राइवर रहेंगे।

इतिहास बताता है कि चांदी रिस्क-ऑन माहौल में बेहतर प्रदर्शन करती है। बाजार में तनाव बढ़ने पर यह कमजोर पड़ती है। इसी वजह से चांदी को डिफेंसिव हेज नहीं माना जाता, बल्कि टैक्टिकल या सैटेलाइट इनवेस्टमेंट के तौर पर देखा जाता है।

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