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क्या पिता की संपत्ति में विवाहित बेटी का भी बराबर का हक है?

हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 में 2005 में संशोधन हुआ था। इसके बाद संपत्ति में बेटी का भी उतना ही हक है, जितना बेटे का है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बेटी विवाहित है या अविवाहित है। बेटी एचयूएफ की संपत्ति के बंटवारे में अपना हिस्सा मांगने की हकदार है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 02, 2026 पर 6:00 PM
क्या पिता की संपत्ति में विवाहित बेटी का भी बराबर का हक है?
संपत्ति में बेटी का बराबर का हक उसके जन्म से जुड़ा है। जन्म लेने के साथ ही बेटी संपत्ति में बराबर की हकदार बन जाती है।

पैतृक संपत्ति पर बेटी के अधिकार को लेकर अक्सर बातें होती रहती हैं। बेटी के विवाहित होने पर उलझन और बढ़ जाती है। हालांकि, सरकार ने हिंदू सक्सेशन एक्ट में 2005 में संशोधन किया था, जिसके बाद स्थिति स्पष्ट हो गई है। इस बारे में नोएडा के प्रशांत लाल ने एक सवाल पूछा है। उन्होंने बताया है कि उनकी एक बेटी और एक बेटा हैं। उनकी एक विवाहित बहन है। उनके पिता का देहांत 2000 के पहले हो गया था। बहन की शादी 1999 में हो गई। उनका सवाल है कि पिता की संपत्ति के बंटवारे में क्या उनकी विवाहित बहन का भी हक है? मनीकंट्रोल ने यह सवाल मशहूर टैक्स एक्सपर्ट और सीए बलवंत जैन से पूछा।

हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 में संशोधन

जैन ने कहा कि हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 में 2005 में संशोधन हुआ था। इसके बाद संपत्ति में बेटी का भी उतना ही हक है, जितना बेटे का है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बेटी विवाहित है या अविवाहित है। बेटी एचयूएफ की संपत्ति के बंटवारे में अपना हिस्सा मांगने की हकदार है। हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 का यह संशोधन 9 सितंबर, 2005 को लागू हो गया। इसका मतलब है कि अगर बेटी 9 सितंबर, 2005 को जीवित थी तो संपत्ति में उसका भी हिस्सा है।

9 सितंबर, 2005 को लागू हुआ यह संशोधन

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