Income Tax Budget 2026: टैक्स के नियमों को आसान बनाने पर होगा वित्तमंत्री का फोकस, जानिए किन-किन उपायों का ऐलान हो सकता है

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इनकम टैक्स की नई रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1,00,000 रुपये कर सकती हैं। होम लोन के इंटरेस्ट रेट पर भी डिडक्शन बढ़ सकता है। शेयरों में निवेश करने वाले लोग कैपिटल गेंस के नियमों में बदलाव चाहते हैं

अपडेटेड Jan 30, 2026 पर 3:40 PM
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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2025 में टैक्सपेयर्स को बड़ा तोहफा दिया था। उन्होंने सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री कर दी थी।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का फोकस टैक्स के नियमों को आसान बनाने पर होगा। इस साल 1 अप्रैल से इनकम टैक्स का नया एक्ट लागू होने जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि वित्तमंत्री 1 फरवरी को बजट भाषण में इस बारे में ऐलान करेंगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूनियन बजट में टैक्सपेयर्स खासकर मिडिल क्लास को राहत देने वाले छोटे-छोटे उपायों का ऐलान हो सकता है।

बजट 2026 में स्टैंडर्ड डिडक्शन कितना बढ़ सकता है?

सबसे ज्यादा उम्मीद स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने की है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इनकम टैक्स की नई रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1,00,000 रुपये कर सकती हैं। होम लोन के इंटरेस्ट रेट पर भी डिडक्शन बढ़ सकता है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 24(बी) के तहत अभी होम लोन के इंटरेस्ट रेट पर एक वित्त वर्ष में मैक्सिमम 2 लाख रुपये डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। इसे बढ़ाकर कम से कम 3 लाख रुपये किया जा सकता है। यह डिडक्शन इनकम टैक्स की सिर्फ ओल्ड रीजीम में मिलता है।


क्या निर्मला सीतारमण हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन भी बढ़ाएंगी?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तमंत्री हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन बढ़ाने का भी ऐलान कर सकती है। अभी हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन इनकम टैक्स की सिर्फ पुरानी रीजीम में मिलता है। नई रीजीम के टैक्सपेयर्स को भी यह डिडक्शन देने का ऐलान यूनियन बजट में हो सकता है। इलाज कराने का खर्च तेजी से बढ़ रहा है। इससे हेल्थ इंश्योरेंस खरीदना लोगों की मजबूरी बन गई है। नई रीजीम में भी इस पर डिडक्शन मिलने से आम लोगों को काफी राहत मिलेगी। इनकम टैक्स की नई रीजीम में टैक्स के रेट्स कम हैं। लेकिन ज्यादातर डिडक्शंस और एग्जेम्प्शंस नहीं मिलते हैं।

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स में इनवेस्टर्स को कितनी मिलेगी राहत?

शेयरों में निवेश करने वाले लोग कैपिटल गेंस के नियमों में बदलाव चाहते हैं। सरकार ने 2024 के यूनियन बजट में कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव किया था। अभी इक्विटी म्यूचुअल फंड्स और लिस्टेड कंपनियों के शेयरों को एक साल से पहले बेचने पर 20 फीसदी के रेट से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगता है। 1 साल के बाद बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगता है। इसका रेट 12.5 फीसदी है। यह टैक्स तभी लगता है जब एक वित्त वर्ष में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस 1.25 लाख रुपये से ज्यादा होता है। इनवेस्टर्स शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स के रेट में कमी चाहते हैं।

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बजट 2025 में वित्तमंत्री ने टैक्सपेयर्स को दिया था क्या तोहफा?

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने Union Budget 2025 में टैक्सपेयर्स को बड़ा तोहफा दिया था। उन्होंने सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री कर दी थी। नौकरी करने वाले लोगों को तो सालाना 12.75 लाख रुपये की इनकम पर टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं रह गई है। इससे मिडिल क्लास को काफी राहत मिली है। उन्हें इस बार भी बजट में राहत मिलने की उम्मीद है।

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