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इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने NGO पर कसा शिकंजा, ऑडिट में कई डिटेल्स देनी होगी

नए नियमों से एनजीओ और ऐसे दूसरे संस्थानों के लिए कंप्लायंस की कॉस्ट बढ़ जाएगी, लेकिन ऐसे एनजीओ के गलत कामों पर रोक लग जाएगी, जो वह काम नहीं कर रहे हैं, जिनके लिए उन्होंने रजिस्ट्रेशन कराए थे

Curated By: Abhishek Anejaअपडेटेड Mar 04, 2023 पर 8:06 AM
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने NGO पर कसा शिकंजा, ऑडिट में कई डिटेल्स देनी होगी
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने चैरिटेबल एवं रिलिजियस ट्रस्ट्स, सोसायटीज और दूसरे इंस्टीट्यूशंस के ऑडिट के लिए नए नियम नोटिफाई कर दिए हैं। ये 1 अप्रैल, 2023 से लागू होंगे।

पिछले कुछ सालों में NGO सेक्टर के लिए नियमों में कई बदलाव किए गए हैं। दरअसल, सरकार एनजीओ को लेकर सख्ती बढ़ा रही है। चैरिटेबल और रिलिजियस ट्रस्ट्स और दूसरे संस्थानों के रजिस्ट्रेशन और कंप्लायंस के नियमों को सख्त बनाया जा रहा है। चैरिटेबल और रिलिजियस ट्रस्ट्स, सोसायटीज और कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कंपनीज एक्ट 2013 के सेक्शन 8 के तहत होता है। इन्हें इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10, 11, 12 और 80G के तहत कई तरह के एग्जेम्प्शंस और एप्रूवल्स मिलते हैं। हालांकि, ये एग्जेम्प्शंस और बेनेफिट हासिल करने के लिए इन्हें कुछ शर्तें पूरी करनी होती है।

यूनियन बजट में भी नियमों में कई बदलाव

यूनियन बजट 2023 में भी NGO से जुड़े इनकम टैक्स के नियमों में कई बदलाव किए गए हैं। अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने चैरिटेबल एवं रिलिजियस ट्रस्ट्स, सोसायटीज और दूसरे इंस्टीट्यूशंस के ऑडिट के लिए नए नियम नोटिफाई कर दिए हैं। ये 1 अप्रैल, 2023 से लागू होंगे। इस फाइनेंशियल ईयर (2022-23) के लिए ट्रस्ट्स एंव इंस्टीट्यूशंस के ऑडिट के लिए नए फॉर्म्स का इस्तेमाल होगा। नए फॉर्म्स में पहले के फॉर्म्स के मुकाबले काफी डिटेल जानकारियां देनी हैं। टैक्स ऑडिट के तहत जरूरी कई क्लॉज को भी फॉर्म में शामिल किया गया है।

ऑडिटर्स को अब ट्रस्ट्स के लिए इस्तेमाल होने वाले दर तरह के ऑडिट फॉर्म्स में सही फॉर्म का चुनाव करना होगा।

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