ईरान युद्ध से बाजार में बड़ी गिरावट, क्या रिटायरमेंट प्लानिंग को भी लगेगा झटका? जानिए एक्सपर्ट से
ईरान युद्ध के बाद बाजार में आई गिरावट ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है... क्या जल्दी रिटायरमेंट का सपना अब टूट जाएगा? FIRE स्ट्रैटेजी पर दबाव बढ़ रहा है और निवेशकों की सोच तेजी से बदलती दिख रही है। समझिए पूरी तस्वीर।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि FIRE स्ट्रैटेजी खत्म नहीं हो रही, बल्कि समय के साथ बदल रही है।
ईरान युद्ध के चलते शेयर मार्केट में भारी गिरावट आई है। आर्थिक अनिश्चितता और महंगाई का खतरा भी बढ़ा है। इससे उन सैलरीड लोगों के सपनों पर भी असर पड़ा है, जो फाइनेंशियल फ्रीडम हासिल करके जल्दी रिटायर होना चाहते थे। इस दिशा में FIRE (Financial Independence, Retire Early) एक पॉपुलर स्ट्रैटेजी रही है, जिसमें लोग ज्यादा रिटर्न के लिए हाई रिस्क वाले एसेट्स में आक्रामक निवेश करते हैं।
लेकिन अब मार्केट से मिल रहे कमजोर रिटर्न इस लक्ष्य को मुश्किल बना रहे हैं। कई सेक्टरों में रिटर्न या तो बहुत कम हैं या नेगेटिव हैं। इससे वेल्थ बनाना और जल्दी रिटायरमेंट का सपना पूरा करना कठिन होता जा रहा है।
FIRE स्ट्रैटेजी क्या है
FIRE यानी ऐसी फाइनेंशियल स्ट्रैटेजी है, जिसमें लोग कम उम्र में इतना पैसा जमा करने की कोशिश करते हैं कि वे पारंपरिक रिटायरमेंट एज से पहले ही काम छोड़ सकें। इसके लिए आमतौर पर ज्यादा बचत, नियंत्रित खर्च और इक्विटी जैसे एसेट्स में भारी निवेश किया जाता है, ताकि लंबे समय में अच्छा रिटर्न मिल सके।
हालांकि मौजूदा मार्केट हालात को देखते हुए इस स्ट्रैटेजी की प्रासंगिकता पर सवाल उठने लगे हैं।
बदल रही है FIRE स्ट्रैटेजी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि FIRE स्ट्रैटेजी खत्म नहीं हो रही, बल्कि समय के साथ बदल रही है। अब निवेशक सिर्फ हाई रिटर्न के पीछे नहीं भाग रहे, बल्कि फाइनेंशियल स्थिरता पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। इसका मकसद है कि उनके पास पर्याप्त लिक्विडिटी और स्थिर कैश फ्लो बना रहे।
आक्रामक निवेश से दूरी?
Olyv के को-फाउंडर और CEO रोहित गर्ग के मुताबिक, मौजूदा मार्केट हालात ने लोगों को अपनी निवेश स्ट्रैटेजी पर फिर से सोचने पर मजबूर किया है। अब लोग हाई रिस्क और हाई रिटर्न वाले निवेश की बजाय ज्यादा संतुलित और स्थिर विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
उनका कहना है कि लोग अब जल्दी रिटायरमेंट के टारगेट को लेकर उतने आक्रामक नहीं हैं। वे लिक्विडिटी बनाए रखने, अलग-अलग इनकम सोर्स बनाने और फाइनेंशियल सुरक्षा मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं। फोकस अब मार्केट को टाइम करने से हटकर एक मजबूत और टिकाऊ फाइनेंशियल सिस्टम बनाने पर है।
कैश फ्लो मैनेजमेंट की चुनौती
SalarySe के को-फाउंडर पियूष बगड़िया के मुताबिक, आज सैलरीड लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती हर महीने के कैश फ्लो को संभालना है। बढ़ती महंगाई, EMI का बोझ और बदलते टैक्स स्ट्रक्चर की वजह से लोगों के पास निवेश के लिए बचत कम हो रही है। इसका सीधा असर FIRE के टारगेट पर पड़ रहा है, जिससे जल्दी रिटायरमेंट हासिल करना और मुश्किल हो गया है।
पियूष यह भी बताते हैं कि अब लोग अपने पैसे को लंबे समय के निवेश में लॉक करने के बजाय इमरजेंसी फंड बनाने, लिक्विडिटी बनाए रखने और टेक-होम इनकम को बेहतर तरीके से मैनेज करने पर ध्यान दे रहे हैं।
छोटे कर्ज का भी सहारा
आज के समय में अचानक आने वाले खर्च अक्सर कैश फ्लो बिगाड़ देते हैं। ऐसे में शॉर्ट टर्म क्रेडिट टूल्स, जैसे UPI पर क्रेडिट, तुरंत पैसे की सुविधा देते हैं।
इससे लोग अपने जरूरी खर्च पूरे कर पाते हैं, बिना म्यूचुअल फंड या FD जैसे लंबे समय के निवेश को तोड़े। ये टूल्स सैलरी आने तक के लिए एक छोटा सहारा देते हैं और फाइनेंशियल प्लानिंग को पटरी पर बनाए रखते हैं।
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