ITR Filing 2026: खेती की कमाई पर नहीं लगता टैक्स, इन 6 वजहों से किसानों को छूट देती है सरकार

ITR Filing 2026: अगर कोई किसान खेती से करोड़ों रुपये भी कमाता है, तब भी उसे इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता। आखिर कृषि आय को टैक्स फ्री क्यों रखा गया है, इसके पीछे इतिहास, मौसम का जोखिम और कई व्यावहारिक कारण जुड़े हुए हैं। जानिए पूरी डिटेल।

अपडेटेड May 21, 2026 पर 4:14 PM
Story continues below Advertisement
सरकारी नियमों में कृषि आय यानी खेती से होने वाली कमाई को इनकम टैक्स से बाहर रखा गया है।

ITR Filing 2026: भारत में अगर कोई शख्स नौकरी करता है, बिजनेस करता है या दूसरी तरह की कमाई करता है, तो उसे इनकम टैक्स देना पड़ सकता है। लेकिन खेती से होने वाली कमाई पर टैक्स नहीं लगाया जाता। यही वजह है कि अक्सर लोग पूछते हैं कि अगर कोई किसान करोड़ों रुपये भी कमा रहा हो, तब भी उसे टैक्स छूट क्यों मिलती है।

सरकारी नियमों में कृषि आय यानी खेती से होने वाली कमाई को इनकम टैक्स से बाहर रखा गया है। आयकर कानून की धारा 10(1) के तहत कृषि आय टैक्स फ्री मानी जाती है। इसका मतलब है कि किसानों को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल (ITR Filing 2026) करने की जरूरत नहीं, चाहे उनकी कमाई कितनी भी हो।

सरकार कृषि आय किसे मानती है?


हर तरह की कमाई को कृषि आय नहीं माना जाता। सरकार के नियमों के मुताबिक वही आय कृषि आय कहलाती है, जो सीधे खेती या जमीन से जुड़े उत्पादन से आती हो। जैसे फसल उगाना, जमीन से अनाज, फल या दूसरी उपज लेना और कुछ मामलों में शुरुआती प्रोसेसिंग से होने वाली कमाई।

लेकिन अगर कोई व्यक्ति खेती की जमीन खरीदकर सिर्फ उसे बेचकर पैसा कमाता है या कोई ऐसा कारोबार करता है जिसका खेती से सीधा संबंध नहीं है, तो उस कमाई को कृषि आय नहीं माना जाएगा।

किसानों को 6 कारणों से टैक्स छूट दी गई

जब भारत आजाद हुआ था, तब देश की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर थी। आज भी करोड़ों लोग सीधे या परोक्ष रूप से कृषि से जुड़े हैं। खेती को हमेशा जोखिम वाला काम माना गया, क्योंकि किसान मौसम समेत कई अनिश्चितताओं पर निर्भर रहते हैं। इसलिए सरकार ने किसानों को टैक्स छूट दी है।

1. मौसम पर निर्भरता : किसान किसी भी दूसरे क्षेत्र के मुकाबले मौसम से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। कम बारिश होना, ज्यादा बारिश हो जाना, सूखा पड़ जाना, फसल खराब होना... इन सबसे उनकी खेती प्रभावित होती है। उनकी कमाई भी स्थिर नहीं रहती। ऐसे में टैक्स का बोझ उनकी समस्या बढ़ा सकता है।

2. कीमत पर नियंत्रण नहीं : ज्यादातर फसलों के दाम सरकार खुद तय करती है। यहां तक कि वो घरेलू बाजार में कीमतों को काबू में रखने के लिए खाद्यान्न के एक्सपोर्ट पर भी अंकुश लगाती है। जैसा कि गेहूं और चीनी के मामले में देखने को मिलता है। यह एक तरह से किसानों का नुकसान है, टैक्स छूट इसकी भरपाई करती है।

3. महंगाई का फैक्टर : खाद्यान्न हर किसी की बुनियादी जरूरत है। सरकार इनकी कीमतों को काबू में रखने का हर मुमकिन कोशिश करती है। ऐसे में किसानों से टैक्स वसूला जाने लगा, तो उसका असर कीमतों में तेजी के रूप में देखने को मिल सकता है। क्योंकि किसाना मुनाफा बढ़ाने के लिए कीमतों में इजाफे की मांग करेंगे।

4. खेती में कम मार्जिन : खेती में लागत लगातार बढ़ती रहती है। जैसे कि डीजल, खाद, बीज, बिजली और मजदूरी महंगी होती जा रही है। लेकिन, कीमतों उस हिसाब से नहीं बढ़ती हैं। किसानों को कई बार फसल का अच्छा दाम नहीं मिलता। ऐसे में सरकारें मानती हैं कि टैक्स लगाने से खेती को हतोत्साहित कर सकती है।

5. व्यावहारिक दिक्कत : भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं। उनके पास बहुत कम जमीन होती है और सालाना कमाई इतनी नहीं होती कि वे टैक्स स्लैब में आएं। ऐसे में पूरे कृषि सेक्टर पर टैक्स सिस्टम लागू करने की लागत, मिलने वाले टैक्स से ज्यादा पड़ सकती है।

6. कमाई ट्रैक मुश्किल: बिजनेस या नौकरी की तरह खेती में हर लेनदेन का रिकॉर्ड नहीं होता। नकद लेनदेन, मंडी बिक्री, मौसम आधारित उत्पादन और छोटे स्तर के कारोबार की वजह से असली कृषि आय मापना बहुत कठिन माना जाता है। सरकार के लिए करोड़ों किसानों का ऑडिट करना व्यावहारिक रूप से बहुत बड़ा काम होगा।

फिर टैक्स छूट पर सवाल क्यों उठते हैं?

भारत में ज्यादातर किसान छोटे और सीमांत हैं, लेकिन कुछ बड़े किसान और एग्री बिजनेस से जुड़े लोग खेती से करोड़ों रुपये की कमाई भी करते हैं। यही वजह है कि समय-समय पर यह बहस शुरू हो जाती है कि क्या बहुत ज्यादा कृषि आय वालों को भी पूरी टैक्स छूट मिलनी चाहिए।

कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि छोटे किसानों को राहत मिलनी चाहिए, लेकिन जिन लोगों की कृषि आय बहुत ज्यादा है, उन पर टैक्स लगाने पर विचार हो सकता है।

वहीं किसान संगठनों का तर्क है कि खेती पहले से ही जोखिम वाला क्षेत्र है। उनका कहना है कि अगर कृषि आय पर टैक्स लगाया गया, तो इसका असर किसानों पर पड़ेगा और बाद में छोटे किसानों पर भी दबाव बढ़ सकता है।

Income Tax Return: 31 जुलाई तक ही फाइल करना है ITR? या इस साल मिलेगा और समय?

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

 

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।