Credit Card की EMI सुविधा कई बार हमारी मुश्किलें कम कर देती है। एक बार में पूरा पैसा पेमेंट करने की जगह हम किस्तों (EMI) में उसे चुका देते हैं। हालांकि, यह फैसिलिटी आपके लिए फायदेमंद है, लेकिन आपको अपने क्रेडिट कार्ड बिल को EMI में कनवर्ट करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना सही रहेगा।
1. फीस एंड चार्ज को कम्पेयर करें
क्रेडिट कार्ड पर ईएमआई सुविधा के लिए कुछ चार्ज देना पड़ता है। इसमें इंटरेस्ट रेट, प्रोसेसिंग फीस, फोरक्लोजर चार्ज आदि शामिल होते हैं। प्रोसेसिंग फीस वन टाइम चार्ज है, जो 0-3 फीसदी के बीच होता है। आपको EMI की अवधि में इंटरेस्ट भी चुकाना पड़ता है। अगर आप तय वक्त से पहेल पूरे पैसे चुका देते हैं तो आपको फोरक्लोजर चार्ज देना पड़ता है। अगर आपके पास एक से ज्यादा कार्ड हैं और आप कोई पर्जेज करना चाहते हैं तो सभी कार्ड के रेट चेक कर लें।
2. सही पीरियड को सेलेक्ट करें
आम तौर पर EMI का पीरियड ज्यादा होने पर इंटरेस्ट रेट कम होता है। लेकिन, लंबा पीरियड सेलेक्ट करने से पहले आपको इंटरेस्ट को कैलकुलेट कर लेना चाहिए, जो आप EMI की अवधि में चुकाएंगे। इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है। मान लीजिए आप 10000 रुपये के पर्चेज को EMI में कनवर्ट करते हैं। 3 महीने की EMI पर इंटरेस्ट रेट 20 फीसदी होगा। 12 महीने की EMI पर इंटरेस्ट रेट 18 फीसदी होगा। अगर आप 18 फीसदी इंटरेस्ट रेट को सेलेक्ट करते हैं तो आप इंटरेस्ट के रूप में ज्यादा पैसे चुकाएंगे।
3. लॉस ऑफ रिवॉर्डस और डिस्काउंट का ध्यान रखें
आम तौर पर क्रेडिट कार्ड इश्यू करने वाला बैंक ट्रांजेक्शन को EMI में कनवर्ट करने पर किसी तरह का रिवॉर्ड प्वॉइंट या एडिशनल डिस्काउंट नहीं देते हैं। ऐसे में आपके लिए यह जान लेना जरूरी है कि ट्रांजेक्शन को EMI में कनवर्ट करने पर आपको जिस रिवॉ्ड प्वाइंट या एडिशनल डिस्काउंट का लॉस हो रहा है, उसकी वैल्यू कितनी है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि जब आप क्रेडिट कार्ड पर EMI फैसिलिटी लेते हैं तो ट्रांजेक्शन अमाउंट आपकी क्रेडिट लिमिट से घटा दी जाती है। जैसे-जैसे आप EMI का पेमेंट करते हैं अमाउंट आपकी क्रेडिट लिमिट में जुड़ती जाती है। इसलिए अगर आपकी कार्ड लिमिट कम है तो आपको बड़ी रकम का पर्चेज करने से पहले उसे चेक कर लेना होगा। ऐसा इसलिए जरूरी है कि ज्यादा अमाउंट ब्लॉक हो जाने पर आप अपने क्रेडिट कार्ड का ज्यादा इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।