लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसीज के मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स के नियम बदल गए हैं, CBDT ने जारी की है नई गाइडलाइंस

सीबीडीटी ने गाइडलाइंस में कहा है कि अगर किसी एक लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम बीते सालों में 5 लाख रुपये से ज्यादा है तो मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स चुकाना होगा। अगर किसी व्यक्ति के एक से ज्यादा पॉलिसीज है और अलग-अलग पॉलिसीज का पिछले सालों में चुकाया गया कुल प्रीमिमय सालाना 5 लाख रुपये से ज्यादा रहता है तो सभी पॉलिसी के मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स चुकाना होगा

अपडेटेड Aug 19, 2023 पर 4:23 PM
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नए नियम के दायरे में सिर्फ 1 अप्रैल, 2023 या उसके बाद जारी की गई पॉलिसीज आएंगी। यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसीज (ULIPs) इस नियम के दायरे में नहीं आएंगी। ULIPS के मैच्योरिटी अमाउंट के टैक्स के नियमों में पिछले साल ही बदलाव किया जा चुका है।

सेट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने जीवन बीमा पॉलिसीज (Life Insurance Policies) से जुड़े टैक्स के नियमों पर नई गाइडलाइंस जारी की है। 1 अप्रैल, 2023 से जीवन बीमा पॉलिसी से जुड़े टैक्स के नियमों में बदलाव को ध्यान में रख यह गाइडलाइंस जारी की गई है। दरअसल, इस साल फरवरी में पेश बजट में सरकार ने कहा था कि जीवन बीमा पॉलिसी का प्रीमियम एक सीमा से ज्यादा होने पर मैच्योरिटी अमाउंट पूरी तरह से टैक्स-फ्री नहीं होगा। नई गाइडलाइंस में यह बताया गया है कि अगर प्रीमियम अमाउंट तय सीमा को पार कर जाता है तो मैच्योरिटी अमाउंट का कितना हिस्सा टैक्स-फ्री होगा। गाइडलाइंस में इसके कैलकुलेशन का तरीका बताया गया है। दरअसल, इस साल पेश बजट में यह गया था कि अगर जीवन बीमा पॉलिसी का प्रीमिमय एक फाइनेंशियल ईयर में 5 लाख रुपये से ज्यादा हो जाता है मैच्योरिटी अमाउंट टैक्स-फ्री नहीं होगा।

नए नियम 1 अप्रैल, 2023 से लागू होंगे

नए नियम के दायरे में सिर्फ 1 अप्रैल, 2023 या उसके बाद जारी की गई पॉलिसीज आएंगी। यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसीज (ULIPs) इस नियम के दायरे में नहीं आएंगी। ULIPS के मैच्योरिटी अमाउंट के टैक्स के नियमों में पिछले साल ही बदलाव किया जा चुका है। इसके मुताबिक, अगर यूलिप का प्रीमियम एक साल में 2.5 लाख रुपये से ज्यादा रहता है तो मैच्योरिटी अमाउंट टैक्स के दायरे में आएगा। यह नियम 1 फरवरी, 2022 से लागू हो चुका है।


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पॉलिसीहोल्डर की मौत पर टैक्स के नियम लागू नहीं

सीबीडीटी ने गाइडलाइंस में कहा है कि अगर किसी एक लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम बीते सालों में 5 लाख रुपये से ज्यादा है तो मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स चुकाना होगा। अगर किसी व्यक्ति के एक से ज्यादा पॉलिसीज है और अलग-अलग पॉलिसीज का पिछले सालों में चुकाया गया कुल प्रीमिमय सालाना 5 लाख रुपये से ज्यादा रहता है तो सभी पॉलिसी के मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स चुकाना होगा। मैच्योरिटी अमाउंट को दूसरे स्रोत से आय माना जाएगा। यहां एक बात ध्यान में रखना जरूरी है कि अगर पॉलिसीहोल्डर की मौत हो जाती है तो प्रीमियम अमाउंट 5 लाख रुपये से ज्यादा होने पर भी मैच्योरिटी अमाउंट टैक्स के दायरे में नहीं आएगा।

उदाहरण से ऐसे समझें नए नियम 

सीबीडीटी ने उदाहरण के साथ नए नियम स्पष्ट करने की कोशिश की है। मान लीजिए किसी व्यक्ति के पास A, B, C और D चार लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसीज हैं। एक का सालाना प्रीमियम 4.5 लाख रुपये है। B का सालाना प्रीमियम 1 लाख रुपये है। C का सालाना प्रीमिमय 1.5 लाख रुपये है। D का सालाना प्रीमियम 6 लाख रुपये है। ऐसे में A पॉलिसी का मैच्योरिटी अमाउंट टैक्स के दायरे में नहीं आएगा। इसकी वजह यह है कि इसका सालाना प्रीमिमय 5 लाख रुपये से कम है। लेकिन, B, C, और D के मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स लगेगा, क्योंकि इन तीनों पॉलिसी का कुल प्रीमियम एक साल में 5 लाख रुपये से ज्यादा है।

पॉलिसीहोल्डर के स्लैब के हिसाब से लगेगा टैक्स

सीबीडीटी ने यह भी कहा है कि टैक्स के लिहाज से प्रीमियम में जीएसटी का हिस्सा शामिल नहीं होगा। एलआईसी पॉलिसी के मैच्योरिटी अमाउंट पर पॉलिसीहोल्डर्स के स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होगा। इसका मतलब है कि ज्यादा इनकम ब्रैकेट में आने वाले लोगों को मैच्योरिटी अमाउंट पर ज्यादा टैक्स देना होगा। कम इनकम ब्रैकेट में आने वाले लोगों को कम टैक्स देना होगा।

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