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लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी मैच्योर हो गई है? जानिए क्लेम का क्या है प्रोसेस

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी मैच्योर होने के बाद क्लेम करना जरूरी है। इसके बाद ही पैसा जीवन बीमा कंपनी पॉलिसीहोल्डर के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करती है। पॉलिसीहोल्डर के जीवित होने पर क्लेम करना बहुत आसान होता है। पॉलिसीहोल्डर के जीवित नहीं होने पर कुछ अतिरिक्त डॉक्युमेंट क्लेम फॉर्म के साथ लगाना जरूरी होता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 23, 2024 पर 5:22 PM
लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी मैच्योर हो गई है? जानिए क्लेम का क्या है प्रोसेस
LIC अपने पॉलिसीहोल्डर्स को मैच्योरिटी से कम से कम 2 महीने पहले लेटर भेजती है। इसके जरिए उन्हें मैच्योरिटी डेट और मैच्योरिटी अमाउंट के बारे में बताया जाता है।

निवेश करने से ज्यादा जरूरी है अपने निवेश को ट्रैक करना। आपको लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी (Life Insurance Policy), बैंक एफडी (Bank FD) सहित हर इनवेस्टमेंट का ट्रैक रखना चाहिए। कई लोगों की जीवन बीमा पॉलिसी मैच्योर हो जाती है। लेकिन, उन्हें इसके बारे में पता नहीं होता है। इतना ही नहीं आपको अपनी सभी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी और दूसरे इनवेस्टमेंट के बारे में अपने परिवार के सदस्यों को बताना चाहिए। अगर आपको अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी की मैच्योरिटी की तारीख की जानकारी है तो आप अपने पैसे के लिए समय पर क्लेम कर सकेंगे। मनीकंट्रोल आपको भारतीय जीवन बीमा निगम की पॉलिसी की मैच्योरिटी पर क्लेम प्रोसेस के बारे में बता रहा है।

एन्डॉमेंट पॉलिसी में वापस मिलता है पैसा

पहले यह जान लेना जरूरी है कि लाइफ इंश्योरेंस की सिर्फ एन्डॉमेंट पॉलिसी में सेविंग का कंपोनेंट होता है। टर्म पॉलिसी में सेविंग का कंपोनेंट नहीं होता है। इसका मतलब है कि अगर आपने टर्म पॉलिसी खरीदी है तो उसके मैच्योर होने के बाद आपको बीमा कंपनी से कोई पैसा नहीं मिलेगा। अगर आपने एन्डॉमेंट पॉलिसी खरीदी है तो ही आपको पॉलिसी मैच्योर होने के बाद कंपनी की तरफ से मैच्योरिटी अमाउंट मिलेगा।

बीमा कंपनी पॉलिसीहोल्डर को लेटर भेजती है

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