Manipalcigna ने पेश किया खास हेल्थ प्लान, सब-लिमिट की शर्त नहीं

मणिपालसिग्ना की प्राइम सीनियर पॉलिसी में हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने से पहले मेडिकल चेक-अप पर जोर नहीं दिया जाता है। सीनियर सिटीजंस को सिर्फ प्रपोजल फॉर्म भरना होता है और कंपनी की तरफ से पूछे गए सवालें के जवाब देने होते हैं। इस पॉलिसी का सम अश्योर्ड 3 से 50 लाख रुपये तक हो सकता है

अपडेटेड Feb 16, 2023 पर 4:59 PM
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इस पॉलिसी का खास बात यह है कि Proportionate Deduction Clause नहीं होने से पॉलिसीहोल्डर अपनी एलिजिबिलिटी से ज्यादा रेंट वाले रूम ले सकता है।

ManipalCigna  ने सीनियर सिटीजंस के लिए एक खास हेल्थ पॉलिसी पेश की है। इसका नाम प्राइम सीनियर है। इस पॉलिसी की खासियत यह है कि इसमें रूम रेंट की सब-लिमिट नहीं है। पहले से मौजूदा बीमारियों के इलाज के लिए वेटिंग पीरियड भी कम है। मणिपालसिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस बेचने वाली एक प्राइवेट कंपनी है। कंपनी ने कहा है कि बुजुर्गों को इलाज के दौरान कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बुजुर्गों के लिए यह खास पॉलिसी इन दिक्कतों को दूर करेगी।

सीनियर सिटीजंस के लिए बनाई गई है यह पॉलिसी

मणिपालसिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस की मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ प्रसून सिकदार ने कहा कि बुजुर्गों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्हें पहले से कई बीमारी हो सकती है या उनके सामने इनकम की प्रॉब्लम हो सकती है, क्योंकि ज्यादातर बुजुर्ग खर्च के लिए अपने रिटायरमेंट फंड पर निर्भर करते हैं।


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50 लाख रुपये तक के सम अश्योर्ड की सुविधा

प्राइम सीनियर पॉलिसी में 3 से 50 लाख रुपये तक का सम अश्योर्ड लिया जा सकता है। क्लासिक स्कीम में हर क्लेम-फ्री साल के लिए 10 फीसदी क्युमुलेटिव बोनस मिलता है। एलिट प्लान में हर साल के लिए 10 फीसदी गारंटीड बोनस मिलता है। यह सम-अश्योर्ड के 100 फीसदी तक पहुंच सकता है।

पॉलिसी खरीदने से पहले मेडिकल चेक-अप जरूरी नहीं

इस पॉलिसी एक दूसरी खासियत यह है कि कंपनी पॉलिसी खरीदने से पहले सीनियर सिटीजंस के मेडिकल चेक-अप पर जोर नहीं देती है। इसकी जगह कंपनी ग्राहक के हेल्थ डेक्लेरेशन पर भरोसा करती है। सीनियर सिटीजन के लिए प्रपोजल फॉर्म ध्यान से भरना और कंपनी की तरफ से पूछे गए सवालों के जवाब देना जरूरी है।

ज्यादा रेंट वाला रूम लेने की सुविधा

Proportionate Deduction Clause नहीं होने से पॉलिसीहोल्डर अपनी एलिजिबिलिटी से ज्यादा रेंट वाले रूम ले सकता है। सिकदार ने कहा, "इस क्लॉज की वजह से इलाज का पूरा बिल बढ़ जाता है, क्योंकि डॉक्टर की फीस और इंजेक्शंस की कॉस्ट बढ़ जाती है। इस पॉलिसी में पॉलिसीहोल्डर को रूम रेट में फर्क का पेमेंट करने की जरूरत नहीं बड़ती है।" ओपीडी कवर के तहत नॉन-हॉस्पिटलाइजेशन के खर्च कवर हो जाते हैं।

नॉन-मेडिकल एक्सपेंसेज भी हो सकते हैं कवर

हॉस्पिटलाइजेशन के तहत आने वाले नॉन-मेडिकल एक्सपेंसेज इंश्योरेंस कंपनियों की तरफ से रिइम्बर्स नहीं किए जाते हैं। सिकदार ने कहा कि ऐसे खर्च हॉस्पिटलाइजेशन बिल के 15-20 फीसदी तक होते हैं। इन्हें पॉलिसीहोल्डर को अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है। प्राइम सीनियर के तहत पॉलिसीहोल्डर ऐसे खर्चों के लिए ऑप्शनल कवर खरीद सकता है।

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