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उतारचढ़ाव वाले बाजार में कभी नहीं करें एकमुश्त निवेश, सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान का अपनाएं रास्ता

एसटीपी का पहला फायदा यह है कि इसमें निवेश अलग-अलग समय पर होता है, जिससे रिस्क घट जाता है। औसत पर्चेज प्राइस कम रहता है। इस्तेमाल नहीं किया गया पैसा डेट या लिक्विड फंड में पड़ा रहता है, जिस पर रिटर्न मिलता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 26, 2024 पर 5:57 PM
उतारचढ़ाव वाले बाजार में कभी नहीं करें एकमुश्त निवेश, सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान का अपनाएं रास्ता
सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) ऐसी स्ट्रेटेजी है, जिसमें रेगुलर इंटरवल पर एक फिक्सड अमाउंट एक म्यूचुअल फंड से दूसरे म्यूचुअल फंड में ट्रांसफर किया जाता है।

मार्केट में जब उतारचढ़ाव हो तो एकमुश्त निवेश करने से नुकसान हो सकता है। इसकी जगह आप सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह निवेश का ऐसा तरीका है, जो मार्केट में आपको धीरे-धीरे पैसे डालने की सुविधा देता है। इसके रिस्क घट जाता है और रिटर्न बढ़ जाता है। ऐक्सपर्ट्स यही वजह है कि मार्केट में वोलैटिलिटी बढ़ने पर एकमुश्त निवेश की सलाह नहीं देते हैं। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या है सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान?

सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) ऐसी स्ट्रेटेजी है, जिसमें रेगुलर इंटरवल पर एक फिक्सड अमाउंट एक म्यूचुअल फंड से दूसरे म्यूचुअल फंड में ट्रांसफर किया जाता है। सबसे पहले कम रिस्क वाले किसी म्यूचुअल फंड में एकमुश्त पैसा डाल दिया जाता है। आम तौर पर यह लिक्विड या डेट फंड होता है। उसके बाद इस फंड से पैसा सिस्टमैटिक तरीके से इक्विटी या हाइब्रिड फंड में ट्रांसफर किया जाता है। इसलिए इस स्ट्रेटेजी को सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान कहा जाता है।

STP के क्या हैं फायदे?

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