Mutual Funds Budget 2026: म्यूचुअल फंड्स इनवेस्टर्स के लिए हो सकते हैं बड़े ऐलान, एंफी ने सरकार को दिए हैं ये सुझाव

एंफी ने सरकार को डेट म्यूचुअल फंड्स के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) पर इंडेक्सेशन बेनेफिट्स दोबारा शुरू करने की सलाह दी है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2024 में इस बेनेफिट्स को वापस ले लिया था। फाइनेंस एक्ट, 2023 के लागू होने के बाद डेट फंड्स से हुए कैपिटल गेंस पर टैक्सपेयर्स के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है

अपडेटेड Jan 22, 2026 पर 4:17 PM
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एंफी ने डेट-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (डीएलएसएस) शुरू करने की सलाह दी है। इसके लिए पांच साल का लॉक-इन पीरियड तय किया जा सकता है।

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एंफी) ने यूनियन बजट से पहले सरकार को कुछ सुझाव दिए हैं। इससे म्यूचुअल फंड्स के जरिए लोगों की लॉन्ग टर्म सेविंग्स बढ़ाने में मदद मिलेगी। म्यूचुअल फंड्स देश में करोड़ों परिवारों के लिए निवेश का पहला विकल्प बन गया है। बड़ी संख्या में इनवेस्टर्स सिप के जरिए इक्विटी म्यूचुअल फंड्स की स्कीमों में निवेश कर रहे हैं। एंफी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था है।

एलटीसीजी पर इंडेक्सेशन बेनेफिट्स शुरू करने की सलाह

एंफी ने सरकार को डेट म्यूचुअल फंड्स के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) पर इंडेक्सेशन बेनेफिट्स दोबारा शुरू करने की सलाह दी है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने Union Budget 2024 में इस बेनेफिट्स को वापस ले लिया था। एंफी का कहना है कि फाइनेंस एक्ट, 2023 के लागू होने के बाद डेट फंड्स से हुए कैपिटल गेंस पर टैक्सपेयर्स के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। होल्डिंग पीरियड का कोई मतलब नहीं रह गया है। इसका असर डेट फंड्स में निवेश पर पड़ा है।


डेट म्यूचुअल फंड्स में निवेश पर इनवेस्टर्स के लिए रिस्क कम

एसोसिएशन का कहना है कि 36 महीनों तक रखे गए डेट फंडों के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर इंडेक्सेशन बेनेफिट शुरू किया जा सकता है। इससे डेट फंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी फिर से बढ़ सकती है। खासकर रिटायर्ड लोग और परिवार सेविंग्स के लिए कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट्स का रुख कर सकते हैं। डेट फंड्स में निवेश पर इक्विटी फंड के मुकाबले रिटर्न कम मिलता है। लेकिन, इसमें रिस्क कम होता है।

डेट-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम शुरू करने की सलाह

एंफी ने डेट-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (डीएलएसएस) भी शुरू करने की सलाह दी है। इसके लिए पांच साल का लॉक-इन पीरियड तय किया जा सकता है। डीएलएसएस में निवेश पर इनवेस्टर्स को सेक्शन 80सी से अलग डिडक्शन की सुविधा दी जा सकती है। इससे निवेशकों फिक्स्ड इनकम सेविंग्स के लिए अट्रैक्टिव ऑप्शन मिलेगा। इससे देश में कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को बढ़ावा मिलेगा। कई इनवेस्टर्स की ज्यादा दिलचस्पी फिक्स्ड रिटर्न वाले ऑप्शन में होती है।

इक्विटी में निवेश करने वाले एफओएफ के टैक्स नियम में बदलाव की मांग

एसोसिएशन ने इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने वाले फंड ऑफ फंड्स (FoFs) के टैक्स के नियमों में बदलाव की मांग की है। अभी ऐसे एफओएफ पर नॉन-इक्विटी टैक्स फंड्स के नियम लागू होते हैं, जबकि ये भी इनडायरेक्ट रूप से लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं। एंफी ने इक्विटी के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में भी बदलाव की सलाह सरकार को दी है। उसका मानना है कि इक्विटी फंड्स के लिए टैक्स-फ्री एलटीसीजी की सीमा बढ़ाई जा सकती है। इससे लंबी अवधि के निवेश में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ेगी।

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नई रीजीम में भी ईएलएसएस पर डिडक्शन शुरू करने की सलाह

नई टैक्स रीजीम में भी ईएलएसएस पर डिडक्शन शुरू करने की सलाह एंफी ने दी है। अभी इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस) पर डिडक्शन की इजाजत सिर्फ इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में है। कोई इनवेस्टर सेक्शन 80सी की 1.5 लाख रुपये की लिमिट का इस्तेमाल ईएलएसएस में डिडक्शन के लिए कर सकता है। एंफी का कहना है कि नई टैक्स रीजीम में ईलएसएस में निवेश पर अलग से टैक्स डिडक्शन दिया जा सकता है।

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